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Home› Khabar Junction› Poor Crop In Africa Drives Up Arhar Prices Rising From 65 To 70 75 Per Kg Will Indian Farmers Benefit

अफ्रीका में फसल कमजोर, अरहर के दाम चढ़े : 65 से बढ़कर 70-75 रुपये प्रति किलो, भारतीय किसानों को होगा फायदा?

गांव जंक्शन डेस्क, चंडीगढ़ Published by: Devesh Saraswat Updated Fri, 02 Oct 2026 09:10 AM IST
सार

  • भारत में तुअर की कटाई शुरू होने में कुछ समय बचा है।
  • इस बीच अफ्रीकी बाजारों से अरहर की कीमतों में उछाल की खबर है।
  • कीमतों में इस बढ़ोतरी के बावजूद अफ्रीकी अरहर की कीमतें 8,450 रुपये प्रति क्विंटल की एमएसपी से कम ही है।
  • उत्पादन कमजोर रहने की आशंका से अफ्रीका में तुअर के भाव 65 से बढ़कर 70-75 रुपये किलो हुए।
  • भारत ने जनवरी-जुलाई 2026 के दौरान 5.79 लाख टन तुअर का आयात किया।

अफ्रीकी अरहर की कीमतों में तेजी।
अफ्रीकी अरहर की कीमतों में तेजी। - फोटो : AI Image
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विस्तार
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भारत में खरीफ अरहर की कटाई शुरू होने में अभी कुछ महीने बचे हैं। इस बीच भारतीय किसानों के लिए अहम खबर है। दरअसल घरेलू जरूरत को पूरा करने के लिए भारत पूर्वी अफ्रीकी देशों से बड़ी मात्रा में अरहर का आया करता है। लेकिन, इस बार यहां उत्पादन कमजोर रहने के चलते कीमतों में 10 प्रतिशत से ज्यादा का उछाल आया है। हालांकि कीमतों में इस बढ़ोतरी के बावजूद अफ्रीकी अरहर की कीमतें 8,450 रुपये प्रति क्विंटल की एमएसपी से कम ही है।

65 से 70-75 हुआ अरहर का दाम
बाजार के जानकारों का कहना है कि अरहर पहले काफी सस्ती मिल रही थी। उत्पादन में कमी की आशंका के चलते अब इसके भाव बढ़कर 70 से 75 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं, जो पहले 65 रुपये प्रति किलो थे।  जानकारों के अनुसार, कीमतों में यह तेजी फसल के अनुमान से कमजोर रहने की वजह से आई है। उन्होंने बताया कि पहले यह उम्मीद की जा रही थी कि इस बार अफ्रीका में फसल पिछले साल से बेहतर रहेगी, लेकिन अब व्यापारिक अनुमानों के मुताबिक उत्पादन पिछले साल की तुलना में कम रह सकता है।

चालू वर्ष में भारत के अरहर आयात में 44 प्रतिशत का बड़ा उछाल
भारत मुख्य रूप से मोजाम्बिक, म्यांमार, तंजानिया, सूडान और मलावी जैसे देशों से अरहर का आयात करता है। आंकड़ों के अनुसार, कैलेंडर वर्ष 2026 के शुरुआती सात महीनों (जनवरी से जुलाई) में भारत का तुअर आयात 44 प्रतिशत बढ़कर 5.79 लाख टन पर पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान 4.01 लाख टन का आयात हुआ था। इससे पहले कैलेंडर वर्ष 2025 में भी भारत का तुअर आयात 5.42 प्रतिशत बढ़कर 13.25 लाख टन रहा था।

इस अवधि में मोजाम्बिक 2.18 लाख टन के साथ भारत का सबसे बड़ा निर्यातक देश बना रहा। इसके बाद म्यांमार से 1.35 लाख टन, तंजानिया से 1.04 लाख टन और सूडान से 68,499 टन से अधिक अरहर का आयात किया गया।

देश में बुआई का रकबा बढ़ा, सितंबर की बारिश से फसल को मदद की उम्मीद
देश के भीतर अरहर की देखें तो प्रमुख उत्पादक राज्यों कर्नाटक और महाराष्ट्र में सूखे के कारण फसल प्रभावित होने की चिंता जताई जा रही थी और उत्पादन घटने की आशंका थी। हालांकि, जानकारों का कहना है कि सितंबर महीने में हुई बारिश से फसल को मदद मिलने की उम्मीद है और फसल की कटाई में अभी ढाई महीने का समय बाकी है।

खरीफ 2026 सीजन के आंकड़ों के मुताबिक, देश में अरहर की कुल बुआई 47.25 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले साल के 45.95 लाख हेक्टेयर से अधिक है। कर्नाटक में बुआई क्षेत्र 6 प्रतिशत घटकर 14.16 लाख हेक्टेयर और महाराष्ट्र में 1.5 प्रतिशत घटकर 12.02 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया। दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश में रकबा 33 प्रतिशत बढ़कर 4.95 लाख हेक्टेयर और गुजरात में 11 प्रतिशत बढ़कर 3.3 लाख हेक्टेयर पहुंच गया। इसके अलावा तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी अरहर के बुआई रकबे में वृद्धि दर्ज की गई है।


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