राजस्थान के अनार उत्पादन के गढ़- बाड़मेर मे ंइन दिनों किसानों को भारी नुकसान की चिंता सता रही है। जिले के पादरू, मिठोड़ा, पऊं, इटवाया, कांखी, कुण्डल और धारणा गांवों में अनार के पौधे सूख रहे हैं। किसान बाग में उकठा रोग के प्रकोप की संभावना जता रहे हैं। हालांकि पौधों के सूखने का असल कारण वैज्ञानिक जांच के बाद ही साफ हो पाएगा।
बिना जांच नए पौधे लगाने से बचें किसान
अनार के बाग को तैयार करने में भारी निवेश करना पड़ता है। ऐसे में जानकारों ने किसानों को अनार के नए पौधों की रोपाई को टालने का सुझाव दिया है, जब तक पौधों ेके सूखने का असल कारण सामने नहीं आ जाता। गंभीर बात यह है कि मिट्टी में रोग का प्रकोप होने पर नए पौधे भी सूख सकते हैं। ऐसे में जल्द से जल्द रोग की पहचान करना काफी अहम हो गया है।
सर्वे और प्रयोगशाला जांच की जरूरत
इस समस्या को देखते हुए कृषि और उद्यानिकी विभाग से गांववार सर्वे करने की मांग की गई है ताकि पता चल सके कि कितने बाग प्रभावित हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रभावित पौधों के नमूने लेकर प्रयोगशाला में जांच करानी चाहिए। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही किसानों को सही दवा और सिंचाई प्रबंधन की सलाह दी जा सकती है। फिलहाल किसानों को सलाह है कि वे अपने खेतों में ड्रिप सिंचाई व्यवस्था और मिट्टी की नमी की जांच करते रहें।