मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में लगातार बारिश के कारण खेतों में नमी की मात्रा काफी बढ़ गई है। ऐसे में मांडू कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख सह प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सुधांशु शेखर ने किसानों को मिट्टी सूखने के बाद ही आलू की बुवाई करने की सलाह दी है। इसके अलावा उन्होंने 25 से 40 ग्राम वजन वाले रोगमुक्त प्रमाणित बीज के चुनाव का सुझाव दिया है।
बुवाई से पहले और बाद में इस बात का रखें ध्यान
वैज्ञानिक के अनुसार, बुवाई से पहले बीजों को कार्बेंडाजिम 12 प्रतिशत और मैंकोजेब 63 प्रतिशत डब्ल्यूपी (साफ) से उपचारित करके छाया में सुखाना बहुत जरूरी है। खेत में कतार से कतार की दूरी 50-60 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 15-20 सेंटीमीटर रखें। मिट्टी की जांच के आधार पर ही खाद का इस्तेमाल करें।
नमी के सहारे चने की शानदार खेती
गुमला (झारखंड)। गुमला कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को रबी सीजन में चने की वैज्ञानिक खेती करने की सलाह दी है। वैज्ञानिकों के अनुसार, चना कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाली फसल है। गुमला जिले की रेतीली-दोमट मिट्टी और टांड़ भूमि चने की खेती के लिए बहुत अच्छी है।
कम पानी और कम लागत में ज्यादा मुनाफा
कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि चने की खेती पूरी तरह से बारिश और मिट्टी में बची हुई नमी के सहारे की जा सकती है। सिंचाई के कम साधन होने के बावजूद, मिट्टी की नमी का सही उपयोग करके किसान चने की शानदार पैदावार ले सकते हैं। वैज्ञानिक तरीकों से खेती करने पर लागत कम आती है और किसानों की आय में सीधे तौर पर बढ़ोतरी होती है।