राजस्थान के कई जिलों में सरसों की बुवाई ने रफ्तार पकड़ ली है। इस बीच विशेषज्ञ किसानों को बंपर उपज के लिए मिट्टी और इलाके के मौसम के हिसाब से किस्म के चुनाव की सलाह दे रहे हैं। प्रदेश के किसान आरएच-30, आरएच-749, गिरिराज (डीआरएमआर-आईजे-31), पूसा विजय और पूसा बोल्ड जैसी किस्मों को काफी पसंद करते हैं। पूर्व कृषि अधिकारी डॉ. इंदर सिंह संचेती कहते हैं कि किसाों को अपने इलाके की मिट्टी और कृषि विभाग की सलाह को आधार बनाकर प्रमाणित बीजों का ही उपयोग करना चाहिए।
बुवाई से पहले ये काम जरूर करें
सरसों की बुवाई से पहले बीजोपचार जरूर करना चाहिए। इस तरह फसल में रोगों के फैलने का खतरा कम होता है। किसान अक्तूबर के मध्य से नवंबर की शुरुआत तक बुवाई का काम कर सकते हैं। इससे पहले खेती की मिट्टी को भुरभुरा और समतल करना न भूलें।
बुवाई में देरी से फसल विकास पर दबाव
अगर बुवाई में देरी होती है, तो तापमान बढ़ने पर फसल के विकास पर खराब असर पड़ सकता है। बुवाई के समय पौधों और कतारों के बीच सही दूरी रखें, ताकि पौधों को पर्याप्त धूप और हवा मिल सके।
दो बार करें सिंचाई, खरपतवार से नुकसान का खतरा
जानकारों के अनुसार, सरसों की फसल में दो बार सिंचाई करना लाभकार होता है। पहली सिंचाई फूल आने से ठीक पहले और दूसरी दानों के भराव के समय। इसके अलावा खेत से खरपतवार हटाना काफी अहम है, वरना ये फसल के हिस्से का खाद-पानी चट कर सकती हैं। वही, संतुलित उर्वरक उपयोग के लिए मिट्टी की जांच कराएं।