रबी सीजन में मटर की खेती करने वाले किसानों के लिए कृषि विभाग ने जरूरी सलाह जारी की है। विभाग ने किसानों को वैज्ञानिक तरीके अपनाकर मटर की खेती करने की सलाह दी है, ताकि कम लागत में बेहतर पैदावार मिल सके। जिला कृषि पदाधिकारी अनुप कुमार हेंब्रम के अनुसार, मटर की बुवाई के लिए नवंबर का मध्य समय सबसे उपयुक्त रहता है। इसके लिए ऐसी जमीन का चुनाव करना चाहिए, जहां पानी की निकासी अच्छी हो। दोमट और बलुई दोमट मिट्टी मटर की खेती के लिए बेहतर मानी जाती है।
बुवाई से पहले बीजों को फफूंदनाशी और राइजोबियम कल्चर से उपचारित करना जरूरी है। इससे फसल की शुरुआती बढ़वार में मदद मिलती है और बीजों को मिट्टी से होने वाली बीमारियों से बचाया जा सकता है।
ऐसे करें खेत की तैयारी
कृषि विभाग के अनुसार, खेत तैयार करते समय अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या कंपोस्ट का इस्तेमाल करना चाहिए। रासायनिक खाद का प्रयोग मिट्टी की जांच के आधार पर ही करें। नाइट्रोजन का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने से बचें। फसल में फूल आने और फलियां बनने के समय खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखना जरूरी है। इसके लिए जरूरत के अनुसार सिंचाई करें।
कीटों से बचाव के साथ सही समय पर करें तुड़ाई
मटर की फसल में फली छेदक और माहू जैसे कीट नुकसान पहुंचा सकते हैं। इनसे बचाव के लिए कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही कीटनाशकों का छिड़काव करना चाहिए। वहीं, जब फलियां हरी, मुलायम और दानों से भरी हों, तब उनकी तुड़ाई कर लेनी चाहिए। सही समय पर तुड़ाई करने से मटर की गुणवत्ता बनी रहती है और किसानों को बाजार में अच्छी कीमत मिलने की संभावना रहती है।