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यूपी में बनेगा PLA Plant: बलरामपुर चीनी मिल लगाएगी बायोप्लास्टिक बनाने का प्लांट, केंद्र देगा 75 करोड़ रुपये

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Fri, 25 Sep 2026 12:24 PM IST
सार

बलरामपुर चीनी मिल्स उत्तर प्रदेश में PLA और को-पॉलीमर पर रिसर्च के लिए 110 करोड़ रुपये का प्लांट लगाएगी। केंद्र सरकार ने BioE3 पहल के तहत इसके लिए 75 करोड़ रुपये की सहायता मंजूर की है।

बायोप्लास्टिक बनाने का प्लांट लगाएगी बलरामपुर चीनी मिल
बायोप्लास्टिक बनाने का प्लांट लगाएगी बलरामपुर चीनी मिल - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश में गन्ने से जुड़े उद्योग के लिए नई तकनीक पर बड़ा काम शुरू होने जा रहा है। बलरामपुर चीनी मिल्स को बायोप्लास्टिक बनाने वाली नई तकनीक के अनुसंधान और विकास (R&D) केंद्र के लिए केंद्र सरकार से 75 करोड़ रुपये की मदद मंजूर हुई है। यह प्लांट पॉली लैक्टिक एसिड (PLA) और को-पॉलीमर जैसे जैव आधारित उत्पाद तैयार करने की तकनीक विकसित करेगा।

कंपनी के मुताबिक, यह पायलट रिसर्च प्लांट उत्तर प्रदेश के कुंभी में लगाया जाएगा। इसकी क्षमता 100 टन प्रति वर्ष होगी। प्लांट की कुल लागत करीब 110 करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्र सरकार की ओर से 75 करोड़ रुपये की सहायता दी जाएगी।

BIRAC देगा 75 करोड़ रुपये
केंद्र की यह आर्थिक मदद बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (BIRAC) के माध्यम से दी जा रही है। BIRAC, केंद्रीय जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) के तहत काम करता है। यह परियोजना केंद्र सरकार की BioE3 पहल के तहत स्थापित की जा रही है। BioE3 का उद्देश्य जैव तकनीक के जरिए अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार से जुड़े नए अवसर तैयार करना है।

प्लास्टिक का विकल्प तैयार करने पर जोर
प्रस्तावित प्लांट में PLA और को-पॉलीमर जैसे जैव आधारित पदार्थों पर शोध किया जाएगा। इनका इस्तेमाल पर्यावरण के अनुकूल उत्पाद बनाने में किया जा सकता है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने अनुदान जारी करते हुए कहा कि यह प्लांट PLA और को-पॉलीमर उत्पादों के विकास में मदद करेगा। इससे टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल उत्पादन व्यवस्था को बढ़ावा मिल सकता है। उन्होंने कचरे को उपयोगी उत्पाद में बदलने और ऐसे उत्पादों के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया।

3,000 करोड़ रुपये से बनेगा बड़ा प्लांट
बलरामपुर चीनी मिल्स इसी जगह पर एक बड़े वाणिज्यिक PLA प्लांट की स्थापना भी कर रही है। इसकी उत्पादन क्षमता 80 हजार टन प्रति वर्ष होगी। कंपनी के अनुसार, इस प्लांट पर करीब 3,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। कंपनी का दावा है कि यह भारत में अपनी तरह की पहली वाणिज्यिक PLA विनिर्माण इकाई होगी।

भारत में विकसित होगी स्वदेशी तकनीक
कंपनी की कार्यकारी निदेशक अवंतिका सराओगी ने कहा कि केंद्र की 75 करोड़ रुपये की BioE3 सहायता से देश में उन्नत जैव-विनिर्माण तकनीक को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि परियोजना से स्वदेशी तकनीक विकसित करने, नई पीढ़ी की जैव आधारित सामग्री तैयार करने और तकनीकी विशेषज्ञता बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे टिकाऊ उत्पादन के क्षेत्र में भारत की क्षमता मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।

क्या है PLA?
PLA यानी पॉली लैक्टिक एसिड एक जैव आधारित पदार्थ है, जिसे आमतौर पर पौधों से मिलने वाले शर्करा या स्टार्च जैसे कच्चे माल से बनाया जा सकता है। इसका इस्तेमाल पैकेजिंग, डिस्पोजेबल उत्पादों और अन्य कई चीजों में प्लास्टिक के विकल्प के तौर पर किया जा सकता है। इसकी वास्तविक पर्यावरणीय उपयोगिता उत्पाद के इस्तेमाल और निपटान की व्यवस्था पर भी निर्भर करती है।
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