कर्नाटक सरकार ने सूखे की मार झेलने वाले 50 लाख किसानों को 2,500 रुपये प्रति किसान अंतिरम इनपुट सब्सिडी देने का एलान किया है। बता दें कि यह सब्सिडी फसल नुकसान की वजह से हुए आर्थिक घाटे का पाटने के लिए दी जाएगी।
इस योजना पर प्रदेश सरकर 1,250 करोड़ रुपये खर्च करेगी। वहीं, केंद्रीय सहायता का इंतजार प्रदेश सरकार कर रही है।
विधानसभा में सूखे पर बात करते हुए सीएम डीके शिवकुमार ने किसानों की कर्ज माफी के लिए पीम मोदी से मिलने के लिए एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ले जाने का प्रस्ताव सामने रखा है।
केंद्र के साथ कर्ज माफी का बोझ बांटने को तैयार राज्य सरकार
सीएम डीके शिवकुमार का कहना है कि जिस तरह केंद्र ने उद्योगपतियों के लाखों करोड़ रुपये के कर्ज माफ किए हैं, उसी तरह किसानों के कर्ज भी माफ होने चाहिए। मुख्यमंत्री ने विपक्ष से अपील की कि वह केंद्र जाने वाले प्रतिनिधिमंडल में शामिल हो।
राज्य सरकार अपने हिस्सा का बोझ उठाएगी, विपक्ष ने सब्सिडी को नाकाफी बताया
सीएम ने साफ किया कि कर्ज माफी के लिए चाहे फॉर्मूला 50:50 का हो, 60:40 का या 70:30, राज्य सरकार अपने हिस्से का वित्तीय बोझ उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है। दूसरी ओर विपक्ष के नेता आर. अशोक ने 2,500 रुपये की इनपुट सब्सिडी को नाकाफी करार देते हुए किसानी की पूरी कर्ज माफई की मांग दोहराई। बता दें कि कर्नाटक भाजपा और जेडीएस किसानों का दो लाख रुपये तक का कर्ज माफ करने की मांग कर रही हैं, जिसे लेकर उन्होंने सदन से वॉकआउट भी किया।
177 तालुके सूखाग्रस्त घोषित, 40,000 करोड़ का प्रारंभिक नुकसान
उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने विधानसभा को बताया कि राज्य के 240 तालुकों में से 177 को सूखा प्रभावित घोषित किया जा चुका है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, सूखे से राज्य में लगभग 40,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, जिसकी रिपोर्ट बनाकर जल्द ही केंद्र सरकार को राहत के लिए भेजी जाएगी।
परमेश्वर ने बताया कि संकट से जूझ रहे किसानों को अतिरिक्त समय देने के लिए फसली ऋण चुकाने की समयसीमा (मोराटोरियम) को 36 महीने से बढ़ाकर 60 महीने कर दिया गया है। इसके अलावा, उन्होंने सुझाव दिया कि विधानसभा को इस सूखे को 'राष्ट्रीय आपदा' घोषित करने के लिए केंद्र को एक प्रस्ताव भेजना चाहिए, क्योंकि देश के 17 से 18 राज्य गंभीर सूखे की चपेट में हैं।
सदन में कृत्रिम बारिश पर भी हुई बहस, 28 करोड़ के नुकसान का आरोप
विशेष सत्र के दौरान राज्य में कराई गई कृत्रिम बारिश (क्लाउड सीडिंग) को लेकर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष में बहस हुई। पूर्व मंत्री एच.के. पाटिल ने इसे एक वैज्ञानिक तरीका बताते हुए इसका बचाव किया, हालांकि उन्होंने यह माना कि इसकी शुरुआत तीन महीने पहले होनी चाहिए थी।
दूसरी तरफ, विपक्ष के नेता आर. अशोक ने आरोप लगाया कि यह कवायद विफल रही और इससे 28 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसके जवाब में कांग्रेस विधायक प्रकाश हुक्केरी ने इस प्रक्रिया को सही ठहराते हुए कहा कि केंद्र सरकार के नियमों के तहत इसे अक्तूबर में भी किया जा सकता है और केंद्र को इससे जुड़े शोध के नतीजे सभी राज्यों के साथ साझा करने चाहिए।