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Rice-Wheat Export: अल नीनो से चावल-गेहूं उत्पादन पर संकट, महंगाई रोकने के लिए निर्यात पर फिर लग सकती है पाबंदी

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Fri, 25 Sep 2026 12:56 PM IST
सार

  • कम बारिश की वजह से चावल उत्पादन में गिरावट के आसार है, दूसरी तरफ अल नीनो रबी गेहूं के उत्पादन पर खराब असर डाल सकता है
  • केंद्र सरकार घरेलू स्तार पर खाद्यान्न की उपलब्धता और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए गेहूं-चावल के निर्यात पर रोक लगा सकती है
  • देश के बड़े जलाश्यों में पानी का भंडार पिछले साल की तुलना में करीब 20 फीसदी कम है।

गेहूं और चावल के निर्यात पर रोक लगने की संभावना।
गेहूं और चावल के निर्यात पर रोक लगने की संभावना। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कमजोर मानसून और मजबूत होते अल नीनो के बीच सरकार एक बार फिर चावल और गेहूं के निर्यात पर रोक लगा सकती है। इस तरह घरेलू स्तर पर खाद्यान्न की उपलब्धता और महंगाई को काबू में रखने में मदद मिल सकती है। बता दें कि इस मानसून सीजन में कम बारिश की वजह से चावल उत्पादन में गिरावट के आसार हैं। दूसरी ओर अल नीनो की वजह से गेहूं उत्पदान भी प्रभावित हो सकता है।

2009 के बाद सबसे कमजोर मानसून की आशंका
इस साल मानसून सीजन के दौरान बारिश सामान्य से 15 प्रतिशत कम दर्ज की गई है। यदि सितंबर के अंत तक बारिश की स्थिति ऐसी ही बनी रही, तो यह साल 2009 के बाद देश का सबसे कमजोर मानसून साबित होगा। इस बेरुखी का सीधा असर खेती पर दिखाई दे रहा है, जहां इस समय खरीफ फसलों की कुल बुवाई पिछले साल के मुकाबले लगभग 15 लाख हेक्टेयर पीछे चल रही है।

प्रमुख जलाशयों में 20 फीसदी घटा पानी
इस चुनौती को मात्र खरीफ तक सीमित रखकर नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि इसका असर आगामी रबी सीजन पर भी पड़ सकता है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, देश के 178 प्रमुख जलाशयों (बांधों) में कुल भंडारण क्षमता का केवल 131 बीसीएम (बिलियन क्यूबिक मीटर) पानी ही बचा है। यह पिछले साल की इसी अवधि में मौजूद 165 बीसीएम पानी से लगभग 20 प्रतिशत कम है। बांधों में पानी की यह कमी आने वाले समय में सिंचाई व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

उत्तर और दक्षिण भारत में गहराता जल संकट
क्षेत्रीय स्तर पर जलाशयों की स्थिति और भी ज्यादा चिंताजनक है। केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, दक्षिण भारत के जलाशयों में पानी का स्तर उनकी कुल क्षमता से 48 प्रतिशत कम है, जबकि उत्तर भारत के बांधों में पानी क्षमता से 36 प्रतिशत नीचे चल रहा है।

जलाशयों में पानी का स्तर गिरने और खेतों में नमी की कमी होने के कारण किसानों को आगामी रबी फसलों की बुवाई शुरू करने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।


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