कम बारिश के चलते महाराष्ट्र के 21 से अधिक जिलों में पानी के गंभीर संकट को देखते हुए राज्य सरकार राज्य की 364 में से करीब आधी तहसीलों में सूखा जैसी स्थिति घोषित करने जा रही है। विदर्भ के वाशिम जिले के गांवों का दौरा करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को बताया कि शुक्रवार को इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि राज्य सरकार केंद्र की सहायता का इंतजार किए बिना प्रभावित क्षेत्रों के किसानों को सीधे राहत पहुंचाएगी।
दिवाली से पहले राहत और रोजगार के अवसर
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि प्रभावित क्षेत्रों में मवेशियों के चारे, पीने के पानी और खाद्यान्न की कोई कमी न हो। उन्होंने बताया कि सरकार ने एक समान सहायता नीति तैयार की है और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसानों को प्रति हेक्टेयर के आधार पर दी जाने वाली सीधी आर्थिक मदद दिवाली से पहले उनके पास पहुंच जाए।
इसके अलावा, सूखा प्रभावित क्षेत्रों के किसानों को बिजली बिलों में छूट, फसली ऋणों का पुनर्गठन और बच्चों की स्कूल फीस माफी जैसी राहत दी जाएगी। मुख्यमंत्री के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए जलसंभर (वाटरशेड) विकास और झीलों व जलाशयों से गाद निकालने का काम तुरंत शुरू किया जाएगा। साथ ही, जिन इलाकों में पानी उपलब्ध होगा, वहां किसानों को रबी सीजन की बुवाई के लिए आवश्यक सहायता दी जाएगी।
'ट्रिगर 1' के तहत राहत और किसानों की मांग
वाशिम के करंजा तालुका स्थित म्हासला गांव के दौरे के दौरान स्थानीय किसानों ने जिले को आधिकारिक रूप से सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग को लेकर नारेबाजी की और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर 50,000 रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजे की मांग की।
मुख्यमंत्री ने बताया कि अमरावती सहित कई जिलों में सोयाबीन, कपास, उड़द और तुअर की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। राहत एवं पुनर्वास विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, 25 प्रतिशत से अधिक बारिश की कमी और लंबे सूखे अंतराल के कारण 21 से अधिक जिलों में सूखे के नियमों का पहला चरण यानी 'ट्रिगर 1' लागू हो चुका है। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि भूजल स्तर, मिट्टी की नमी, बुवाई प्रतिशत और फसल संकट के आधार पर 'ट्रिगर 2' का आकलन 30 सितंबर के बाद किया जाएगा, जिसके बाद ही औपचारिक सूखा घोषित कर केंद्र को रिपोर्ट भेजी जाएगी। तब तक इन क्षेत्रों को 'सूखा जैसी स्थिति' मानकर राज्य सरकार अपने खजाने से राहत देगी।
सोलापुर सबसे ज्यादा प्रभावित, फसलों को 90% तक नुकसान का अंदेशा
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून से 21 सितंबर के बीच महाराष्ट्र में औसत की तुलना में केवल 80.82 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई है। राज्य के 17 जिलों में सामान्य से 50 से 75 प्रतिशत बारिश हुई, जबकि सोलापुर सबसे गंभीर स्थिति में है, जहां औसत की मात्र 48.65 प्रतिशत बारिश हुई है। सोलापुर की आठ तहसीलों में हालात बेहद नाजुक हैं और वहां सोयाबीन, मूंग व उड़द की फसलों को 80 से 90 प्रतिशत तक नुकसान होने की आशंका है।
इसके अलावा, बुलढाणा में सोयाबीन के उत्पादन में 70 से 75 प्रतिशत और जालना में कपास व सोयाबीन में 40 से 60 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। सांगली और सतारा जिलों में भी सूखे का बड़ा खतरा बना हुआ है। राज्य में इस बार खरीफ की बुवाई 137.27 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले पांच साल के औसत का लगभग 95 प्रतिशत है।