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क्रिस्टल क्रॉप को सुप्रीम कोर्ट से राहत: खरपतवारनाशक दवा का रजिस्ट्रेशन रद्द करने का हाईकोर्ट का आदेश खारिज

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Wed, 04 Nov 2026 07:35 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने क्रिस्टल क्रॉप की खरपतवारनाशक दवा का रजिस्ट्रेशन रद्द करने का दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला खारिज किया। जानें धानुका एग्रीटेक की आपत्ति और अदालत की अहम टिप्पणी।

खरपतवारनाशक का छिड़काव
खरपतवारनाशक का छिड़काव - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने खरपतवारनाशक दवा बनाने और आयात करने के लिए क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन लिमिटेड (CCPL) को दिए गए रजिस्ट्रेशन को रद्द करने के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया है। यह दवा गन्ना, मक्का और धान जैसी फसलों में उगने वाले खरपतवारों को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल की जाती है।

न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने 15 अक्टूबर को यह फैसला सुनाया। दिल्ली की कंपनी क्रिस्टल क्रॉप को जुलाई 2021 में कीटनाशक अधिनियम, 1968 के तहत हेलोसल्फ्यूरॉन मिथाइल के आयात और निर्माण के लिए रजिस्ट्रेशन दिया गया था। यह खरपतवारनाशक घास और चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों को नियंत्रित करने में इस्तेमाल होता है। इसमें मोथा और नागरमोथा जैसे खरपतवार भी शामिल हैं, जो गन्ना, मक्का, धान और लौकी जैसी फसलों में उगते हैं।

धानुका एग्रीटेक ने रजिस्ट्रेशन पर उठाई थी आपत्ति
क्रिस्टल क्रॉप के अनुसार, रजिस्ट्रेशन देने से पहले उसके उत्पाद के नमूने की केंद्रीय कीटनाशक प्रयोगशाला में जांच की गई थी। इसके अलावा दवा की रासायनिक संरचना, प्रभाव, विषाक्तता और पैकेजिंग से जुड़े आंकड़ों की भी जांच हुई थी। क्रिस्टल क्रॉप की प्रतिस्पर्धी कंपनी धानुका एग्रीटेक लिमिटेड ने कीटनाशक अधिनियम की धारा 10 और 11 के तहत अपीलीय प्राधिकरण के सामने इस रजिस्ट्रेशन पर आपत्ति जताई थी। हालांकि, उसकी अपील खारिज कर दी गई।

इसके बाद धानुका एग्रीटेक ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया। हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश ने अपीलीय प्राधिकरण के फैसले को सही ठहराया था। लेकिन इसके खिलाफ दायर अपील पर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने क्रिस्टल क्रॉप को दिया गया रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हाईकोर्ट ने अधिकार क्षेत्र से आगे बढ़कर फैसला दिया
हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ क्रिस्टल क्रॉप ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। कंपनी ने दलील दी कि उसके उत्पाद के नमूने की केंद्रीय कीटनाशक प्रयोगशाला में जांच हुई थी और उसमें 98.53 प्रतिशत शुद्धता पाई गई थी। कंपनी ने यह भी बताया कि रजिस्ट्रेशन समिति ने दवा के मूल निर्माता और आपूर्तिकर्ता के बीच संबंधों की जांच कई बैठकों में की थी। इसके लिए जरूरी समझौते और दस्तावेज भी पेश किए गए थे। समिति ने कंपनी के जवाब और दस्तावेजों से संतुष्ट होने के बाद रजिस्ट्रेशन को मंजूरी दी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने इस मामले में अपने न्यायिक समीक्षा के अधिकार की सीमा पार की। उसने प्रभावी रूप से अपीलीय प्राधिकरण की तरह काम किया। पीठ के अनुसार, जब किसी नियामक संस्था का फैसला विशेषज्ञों की जांच और तकनीकी मूल्यांकन के बाद लिया गया हो, तो अदालतों को उसमें सीमित हस्तक्षेप करना चाहिए।

धारा 10 के तहत दूसरी कंपनी को चुनौती देने का अधिकार नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने कीटनाशक अधिनियम की धारा 10 के तहत धानुका एग्रीटेक की अपील के अधिकार पर भी विचार किया। पीठ ने कहा कि यह धारा रजिस्ट्रेशन नहीं देने या पहले से दिए गए रजिस्ट्रेशन को रद्द करने से जुड़े फैसलों के खिलाफ अपील का प्रावधान करती है। यह किसी दूसरी कंपनी को दिए गए रजिस्ट्रेशन को चुनौती देने का अधिकार नहीं देती।

इसलिए धानुका एग्रीटेक खुद को ऐसा पक्षकार नहीं बता सकती, जिसे क्रिस्टल क्रॉप को रजिस्ट्रेशन दिए जाने से कानूनी रूप से नुकसान हुआ हो और जिसे धारा 10 के तहत इसे चुनौती देने का अधिकार मिले। पीठ ने कहा कि जब रजिस्ट्रेशन समिति किसी उत्पाद की जांच, उसके स्रोत का सत्यापन, विषाक्तता और प्रभाव का वैज्ञानिक मूल्यांकन करने के बाद फैसला लेती है, तो अदालतों को आमतौर पर विशेषज्ञ समिति के निष्कर्षों का सम्मान करना चाहिए। इसमें हस्तक्षेप तभी होना चाहिए, जब फैसला मनमाना या कानून के खिलाफ हो।
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