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पंचायती राज दिवस 2026: पंचायतों को 4.35 लाख करोड़ का रिकॉर्ड अनुदान, आय सृजन पर मिलेगा अतिरिक्त प्रोत्साहन

डॉ उमाशंकर मिश्र, नई दिल्ली Published by: Umashankar Mishra Updated Thu, 23 Apr 2026 01:45 AM IST
सार

केंद्रीय पंचायती राज सचिव विवेक भारद्वाज ने बताया कि गांवों को आत्मनिर्भर बनाने और आय सृजन को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से ग्रामीण स्थानीय निकायों के अनुदान में रिकॉर्ड बढ़ोतरी की गई है। ग्रामीण निकायों को केंद्रीय वित्त आयोग ने इस बार 4 लाख 35 हजार करोड़ रुपये का बड़ा अनुदान दिया है, जो पिछली बार के 2 लाख 36 हजार करोड़ रुपये से लगभग दोगुना है।

केंद्रीय पंचायती राज सचिव विवेक भारद्वाज।
केंद्रीय पंचायती राज सचिव विवेक भारद्वाज। - फोटो : गांव जंक्शन
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राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस (24 अप्रैल) के अवसर मौके पर देश भर की ग्राम पंचायतों के लिए अच्छी खबर है। ग्रामीण स्थानीय निकायों को केंद्रीय वित्त आयोग ने इस बार 4 लाख 35 हजार करोड़ रुपये का बड़ा अनुदान दिया है, जो पिछली बार के 2 लाख 36 हजार करोड़ रुपये से लगभग दोगुना है। केंद्रीय पंचायती राज सचिव विवेक भारद्वाज ने बताया कि इस बढ़ी हुई राशि से पंचायतों की वित्तीय स्थिति मजबूत होने और स्थानीय विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि यह पहल देश को आत्मनिर्भर बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यापक लक्ष्य से जुड़ी हुई है।

पंचायतों को आय सृजन पर मिलेगा प्रोत्साहन
ग्रामीण निकायों के लिए दिए गए इस अनुदान में से 87 हजार करोड़ की राशि पंचायतों को अपने आय के स्रोत सृजन करने के लिए दी गई है। अगर कोई ग्राम पंचायत या जिला परिषद अपने आय सृजन के स्रोत को विकसित करके कम से कम 2.5 प्रतिशत की वृद्धि दिखाती है, तो उसे अतिरिक्त अनुदान भी मिलेगा। भारद्वाज ने कहा, इससे पंचायतों को स्वावलंबी बनने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

ग्राम पंचायतों में 14 लाख महिला प्रतिनिधि
भारद्वाज ने बताया कि भारत में लगभग 2.6–2.7 लाख ग्राम पंचायतें और उतने ही ग्राम प्रधान) हैं, जबकि कुल पंचायत प्रतिनिधियों की संख्या करीब 24–25 लाख है। देश में पंचायती राज संस्थाओं में लगभग 14 लाख निर्वाचित महिला प्रतिनिधि हैं, ग्रामीण स्थानीय निकायों में महिलाओं की सशक्त भागीदारी को दर्शाता है। हालांकि, कुछ स्थानों पर प्रधान-पति की प्रवृत्ति बनी हुई है। उन्होंने बताया कि इसे सुधारने के लिए एक समिति बनाई गई है और उसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे कदम उठाए जाएंगे।

उत्तर और दक्षिण के बीच अंतर
केंद्रीय पंचायती राज सचिव ने कहा, देश में पंचायतों की संरचना समान होने के बावजूद कार्यक्षमता में अंतर साफ दिखाई देता है। दक्षिण भारत के राज्यों में पंचायतें आय सृजन में आगे हैं। उन्होंने बताया कि आंध्र प्रदेश ने संपत्ति कर से 1000 करोड़ रुपये से अधिक और कर्नाटक ने करीब 1,350 करोड़ रुपये की आय अर्जित की है। वहीं, उत्तर भारत के कई राज्यों में संवैधानिक प्रावधानों के बावजूद पंचायतों को पर्याप्त अधिकार नहीं मिल पाए हैं।

केंद्रीय सचिव ने कहा कि पंचायतों की मजबूती के लिए जागरूकता और जनभागीदारी जरूरी है। पंचायत प्रतिनिधियों को भी यह समझना होगा कि आय सृजन विकास का मुद्दा है, न कि चुनावी हार-जीत का। उन्होंने कहा, समाज को भी अपने विकास में योगदान देने के लिए आगे आना होगा।

स्वामित्व योजना के तहत 3.30 लाख गांवों का सर्वे
केंद्रीय सचिव ने बताया कि स्वामित्व योजना के तहत 3.30 लाख गांवों को शामिल किया गया है और लगभग सभी जगह ड्रोन सर्वे पूरा हो चुका है। सर्वे के बाद नक्शे तैयार कर राज्य सरकारों को सौंप दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि दावा-आपत्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन्हें अंतिम रूप दिया जाता है, जिससे ग्रामीणों को उनकी संपत्ति पर कानूनी अधिकार मिल सके, और किसी तरह के विवाद की स्थिति न रहे।

2.55 लाख पंचायतें ई-ग्राम स्वराज पोर्टल से जुड़ी
भारद्वाज ने बताया कि पंचायती राज व्यवस्था में तेजी से डिजिटलीकरण हुआ है। देश की 2.55 लाख ग्राम पंचायतें अब ई-ग्राम स्वराज पोर्टल से जुड़ी हैं, जहां योजना, खर्च, लेखा और ऑडिट जैसी सभी प्रक्रियाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर दर्ज होती हैं। 'मेरी पंचायत' एप के जरिये नागरिक पंचायत के खर्चों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, जिसे एक करोड़ से अधिक लोग डाउनलोड कर चुके हैं।


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