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सोयाबीन के जीएम खल के आयात का विरोध : SOPA बोला- देश में पर्याप्त स्टॉक, किसानों को होगा नुकसान
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Wed, 28 Oct 2026 11:56 AM IST
सार
SOPA ने 30 लाख टन जीएम सोयाबीन खल के आयात का विरोध किया है। संगठन के मुताबिक, देश में मांग से ज्यादा उपलब्धता है और आयात से सोयाबीन किसानों की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है।
सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) ने केंद्र सरकार से आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) सोयाबीन खल के आयात की अनुमति नहीं देने की मांग की है। संगठन ने अफ्रीका के सभी देशों से बिना आयात शुल्क के गैर-जीएम सोयाबीन के आयात की छूट देने का भी विरोध किया है। SOPA का कहना है कि देश में सोयाबीन खल की पर्याप्त उपलब्धता है। ऐसे में आयात की अनुमति देने से घरेलू बाजार में कीमतें गिर सकती हैं और किसानों की आमदनी प्रभावित हो सकती है।
SOPA ने यह मांग ऐसे समय की है, जब ऑल इंडिया पोल्ट्री ब्रीडर्स एसोसिएशन ने सरकार से 30 लाख टन जीएम सोयाबीन खल के आयात की अनुमति देने की मांग की है। पोल्ट्री उद्योग ने यह भी कहा है कि बिना आयात शुल्क के गैर-जीएम सोयाबीन के आयात की छूट केवल कम विकसित अफ्रीकी देशों तक सीमित न रखकर सभी अफ्रीकी देशों को दी जानी चाहिए।
मांग से ज्यादा सोयाबीन खल की उपलब्धता
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को भेजे गए अपने पत्र में SOPA ने कहा है कि पोल्ट्री उद्योग की मांग भारतीय सोयाबीन प्रसंस्करण उद्योग और सोयाबीन किसानों, दोनों के हित में नहीं है। संगठन के मुताबिक, देश में सोयाबीन खल की कमी नहीं है और मौजूदा समय में कीमतों में मजबूती को देखते हुए आयात की जरूरत भी नहीं बनती।
SOPA के अनुमान के अनुसार, अक्टूबर 2026 से सितंबर 2027 के तेल वर्ष में देश में 81.72 लाख टन सोयाबीन खल उपलब्ध रहेगा, जबकि कुल मांग करीब 80 लाख टन रहने का अनुमान है। इस हिसाब से 30 सितंबर 2027 तक करीब 1.72 लाख टन सोयाबीन खल बचने की संभावना है।
इसके अलावा, सीजन के अंत में करीब 8.82 लाख टन सोयाबीन का स्टॉक रहने का अनुमान है। इससे लगभग 7 लाख टन सोयाबीन खल तैयार किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर इस सोयाबीन को पेराई करके खल की उपलब्धता बढ़ाई जा सकती है।
SOPA का कहना है कि सोयाबीन खल का प्रभावी अतिरिक्त भंडार करीब 9 लाख टन है। संगठन के मुताबिक, बाजार में कमी नहीं, बल्कि कीमतों को लेकर अंतर है। केवल कीमतों के अंतर के आधार पर आयात की अनुमति देना उचित नहीं होगा।
सोयाबीन की फसल 107.90 लाख टन रहने का अनुमान
SOPA ने वर्ष 2026-27 के लिए देश में सोयाबीन का उत्पादन 107.90 लाख टन रहने का अनुमान लगाया है। वहीं, व्यापार जगत के कुछ अनुमानों में महाराष्ट्र में सूखे जैसे हालात के कारण उत्पादन 95 से 100 लाख टन के बीच रहने की आशंका जताई गई है।
संगठन के मुताबिक, इस साल की शुरुआत में भी सोयाबीन की कीमत अचानक 7,500 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर पहुंच गई थी, लेकिन बाद में इसमें गिरावट आई। SOPA का कहना है कि मौजूदा तेजी अगर केवल बाजार की धारणा के कारण है, तो नई फसल की आवक बढ़ने और वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने पर कीमतें खुद नीचे आ सकती हैं।
संगठन ने यह भी कहा कि अगर कीमतों में तेजी वास्तव में कम उत्पादन के कारण है, तो इससे किसानों को बेहतर भाव मिलने का संकेत मिलता है। ऐसे में आयात के जरिये कीमतों पर दबाव डालना किसानों के हित में नहीं होगा।
पोल्ट्री उद्योग की मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त सोयाबीन खल
SOPA के मुताबिक, पोल्ट्री और जलीय जीवों के पालन से जुड़े उद्योगों में सोयाबीन खल की मांग करीब 62.43 लाख टन है। इस अनुमान में डीडीजीएस के इस्तेमाल से होने वाली खपत में कमी को भी शामिल किया गया है।
निर्यात और खाद्य उपयोग समेत सोयाबीन खल की कुल मांग करीब 80 लाख टन है, जबकि उपलब्धता 81.72 लाख टन रहने का अनुमान है। इसके अलावा, सोयाबीन के मौजूदा स्टॉक से करीब 7 लाख टन खल और तैयार किया जा सकता है।
SOPA का कहना है कि कम फसल होने की स्थिति में भी सोयाबीन खल का निर्यात घटने और सोयाबीन के आयात को पहले से ही आपूर्ति के अनुमान में शामिल किए जाने के कारण पोल्ट्री उद्योग की जरूरतें पूरी की जा सकती हैं। इसलिए 30 लाख टन जीएम सोयाबीन खल का आयात जरूरी नहीं है।
सभी अफ्रीकी देशों को शुल्क छूट देने का भी विरोध
SOPA ने सरकार से यह भी आग्रह किया है कि बिना आयात शुल्क के गैर-जीएम सोयाबीन के आयात की सुविधा सभी अफ्रीकी देशों तक नहीं बढ़ाई जाए। फिलहाल यह छूट कम विकसित देशों के लिए है। संगठन के मुताबिक, मौजूदा व्यवस्था पर्याप्त है। इसे सभी अफ्रीकी देशों के लिए सामान्य शुल्क छूट में बदलने से घरेलू बाजार में आयातित सोयाबीन का दबाव बढ़ सकता है। इससे देश के सोयाबीन किसानों को मिलने वाली कीमतों पर असर पड़ने की आशंका है।
SOPA का तर्क है कि आयात की अनुमति तभी दी जानी चाहिए, जब घरेलू उपलब्धता मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त न हो। मौजूदा अनुमानों के अनुसार, देश में सोयाबीन खल की उपलब्धता मांग से अधिक है। ऐसे में आयात की अनुमति देने से किसानों और घरेलू प्रसंस्करण उद्योग को नुकसान हो सकता है।
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