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अफीम की खेती करना होगा और मुश्किल? : नियम सख्त... लाइसेंस के लिए बढ़ानी होगी मॉर्फीन की उपज

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sun, 25 Oct 2026 06:44 PM IST
सार

अफीम की खेती के नए नियम 2026-27 जारी। केंद्र सरकार ने लाइसेंस के लिए मॉर्फीन की न्यूनतम उपज बढ़ाई। जानें किसानों के लिए पात्रता की नई शर्तें।

अफीम की खेती
अफीम की खेती - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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अफीम की खेती करने वाले किसानों के लिए केंद्र सरकार ने नियम सख्त कर दिए हैं। अब अफीम पोस्ता की खेती का लाइसेंस लेने और उसे आगे जारी रखने के लिए किसानों को मॉर्फीन की तय न्यूनतम उपज हासिल करनी होगी। सरकार ने 2026-27 के फसल वर्ष के लिए पात्रता की शर्तों में बदलाव किया है। इसका उद्देश्य अफीम की गुणवत्ता और उससे मॉर्फीन प्राप्त करने की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ फसल की निगरानी मजबूत करना है।

वित्त मंत्रालय ने 23 अक्टूबर को तीन अधिसूचनाएं जारी कर अफीम की खेती के लिए सालाना लाइसेंस नीति घोषित की। इनमें 1 अक्टूबर 2026 से शुरू हुए फसल वर्ष के लिए पात्रता की शर्तें और खेती के लिए अनुमत क्षेत्रों की जानकारी दी गई है।

मॉर्फीन की न्यूनतम उपज बढ़ाई
नई नीति के मुताबिक, मुख्य पात्रता श्रेणी में लाइसेंस पाने के लिए किसानों को 2025-26 के फसल वर्ष में प्रति हेक्टेयर कम से कम 4.4 किलोग्राम मॉर्फीन की उपज हासिल करनी होगी। पिछले साल यह सीमा 4.2 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी।

वहीं, 2027-28 के फसल वर्ष में लाइसेंस पाने के लिए किसानों को 2026-27 में प्रति हेक्टेयर कम से कम 5.9 किलोग्राम मॉर्फीन की उपज प्राप्त करनी होगी। यानी आने वाले वर्षों में खेती जारी रखने के लिए उत्पादन का लक्ष्य और बढ़ाया गया है।

अफीम की खेती पर सरकार का नियंत्रण
अफीम की खेती केंद्र सरकार के नियंत्रण में होती है और इसके उत्पादन के लिए लाइसेंस लेना जरूरी है। अफीम से मिलने वाले मॉर्फीन सहित विभिन्न एल्कलॉइड का इस्तेमाल दर्द कम करने वाली दवाओं और अन्य औषधियों में किया जाता है।

सरकार की लाइसेंस नीति में यह तय किया जाता है कि कौन किसान अफीम की खेती कर सकता है, कितने क्षेत्र में खेती की अनुमति होगी और लाइसेंस की पात्रता बनाए रखने के लिए कितना उत्पादन जरूरी है। नए नियमों के जरिए सरकार फसल की गुणवत्ता सुधारने और अफीम के अवैध इस्तेमाल या दूसरे कामों के लिए उसके गैरकानूनी हस्तांतरण पर रोक लगाने की निगरानी मजबूत करना चाहती है।

बिना चीरा लगाए पोस्ता उगाने वालों के लिए भी उपज की सीमा
जो किसान पोस्ता के पौधों पर चीरा लगाए बिना (अनलांस्ड) उसकी डंठल यानी पोस्ता स्ट्रॉ के लिए खेती करते हैं, उनके लिए भी उपज की सीमा तय की गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस श्रेणी में पात्रता के लिए 2025-26 के उत्पादन के आधार पर न्यूनतम उपज 800 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रखी गई है।

नियमों में बदलाव से अफीम की खेती करने वाले किसानों को अपनी फसल और उत्पादन का प्रबंधन तय मानकों के अनुसार करना होगा। लाइसेंस हासिल करने या उसे जारी रखने के लिए संबंधित श्रेणी की पात्रता शर्तें पूरी करना जरूरी होगा।
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