भारत के चावल समेत दूसरे कृषि उत्पादों के निर्यात में कीटनाशकों के अवशेष और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चेतावनियां एक बड़ी चुनौती बन रही हैं। इसे देखते हुए भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस में उद्योग के विशेषज्ञों ने कृषि उत्पाद की खेत से निर्यात तक की यात्रा के दौरान गुणवत्ता की कड़ी निगरानी करने की मांग की है। विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मानकों को पूरा करने के लिए किसानों में जागरूकता बढ़ाना और कीट-प्रतिरोधी फसलों का विकास करना बेहद जरूरी है।
खेत के स्तर से शुरू हो निगरानी
मीडिया से बात करते हुए, एसजीएस इंडिया में खाद्य और प्रयोगशाला सेवाओं की प्रमुख पूर्वी शाह ने कहा कि कीटनाशकों के अवशेष से जुड़े अलर्ट और कंटेनर संबंधी समस्याएं निर्यात उद्योग को प्रभावित कर रही हैं। पूर्वी शाह के अनुसार, इस समस्या से निपटने के लिए पूरी कृषि सप्लाई चेन में लगातार निगरानी की जरूरत है। उन्होंने कहा, कंटेनर से जुड़ी समस्याएं हैं। यह एक प्रक्रिया है, जिसे खेत से ही शुरू होना चाहिए और सभी प्रक्रियाओं की निगरानी होनी चाहिए।
किसानों की भागीदारी और कीट-प्रतिरोधी फसलें जरूरी
यूरोफिन्स एनालिटिकल सर्विसेज इंडिया के प्रबंध निदेशक पंकज जैमिनी ने कीटनाशकों की समस्या को दूर करने के लिए किसानों और कृषि अनुसंधान संगठनों की भागीदारी पर जोर दिया। पंकज जैमिनी के अनुसार, रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने और अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करने के लिए अनुसंधान संगठनों को कीट-प्रतिरोधी फसलों को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने कहा, आगामी सालों में कीटनाशकों के अवशेषों को कम करने के लिए एक संपूर्ण व्यवस्था में बदलाव की आवश्यकता है, जिसमें किसानों को शामिल करना अनिवार्य है।
यूरोपीय संघ में कीटनाशकों से जुड़े 1,000 अलर्ट
समस्या की गंभीरता को बताते हुए पंकज जैमिनी ने जानकारी दी कि पिछले छह वर्षों में यूरोपीय संघ में लगभग 1,600 'रैपिड अलर्ट' दर्ज किए गए हैं। इनमें से लगभग 1,000 मामले केवल कीटनाशकों से जुड़े थे। जैमिनी के अनुसार, कीटनाशकों का इस्तेमाल केवल भारत की नहीं, बल्कि ज्यादातर कृषि आधारित अर्थव्यवस्थाओं की समस्या है, क्योंकि उत्पाद को कीड़ों या दूसरे नुकसान से बचाने के लिए यही तरीका अपनाया जाता है।