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राजस्थान में 42 निजी कृषि कॉलेजों की NOC रद्द: इस साल नए दाखिलों पर रोक, पुराने छात्रों पर क्या पड़ेगा असर?

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Thu, 29 Oct 2026 05:12 PM IST
सार

राजस्थान हाईकोर्ट ने 42 निजी कृषि कॉलेजों की एनओसी रद्द करने के फैसले को सही ठहराया। जानें बीएससी कृषि की 2,520 सीटों पर दाखिलों और मौजूदा विद्यार्थियों पर क्या असर पड़ेगा।

राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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राजस्थान में 42 निजी कृषि कॉलेजों में इस शैक्षणिक सत्र में बीएससी (कृषि) के नए दाखिले नहीं हो सकेंगे। राजस्थान हाईकोर्ट ने इन कॉलेजों की अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) रद्द करने के कृषि विभाग के फैसले को सही ठहराते हुए सात प्रमुख निजी कृषि कॉलेजों की याचिकाएं खारिज कर दी हैं। यह कार्रवाई राज्य की कृषि शिक्षा नीति-2022 के नियमों और जरूरी मानकों का पालन नहीं करने पर की गई है। इस फैसले से संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेट)-2026 के जरिए भरी जाने वाली करीब 2,520 सीटों पर दाखिले प्रभावित होंगे। हालांकि, इन कॉलेजों में पहले से पढ़ रहे विद्यार्थियों की पढ़ाई जारी रहेगी।

42 कॉलेजों में नए दाखिलों पर रोक
एनओसी रद्द किए गए संस्थानों में 31 निजी कृषि कॉलेज और 11 निजी विश्वविद्यालयों से जुड़े कृषि कॉलेज शामिल हैं। खबर के अनुसार, प्रति कॉलेज 60 सीटों के आधार पर इन संस्थानों में बीएससी (कृषि) की करीब 2,520 सीटें हैं। इस शैक्षणिक सत्र में इन सीटों पर नए दाखिले नहीं हो सकेंगे। इन कॉलेजों पर पिछले तीन वर्षों से निर्धारित नियमों और मानकों का पालन नहीं करने का मामला है। कृषि विभाग ने इसी आधार पर शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए एनओसी का विस्तार देने से इनकार कर दिया था।

हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की कॉलेजों की याचिकाएं?
बीकानेर स्थित स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय की ओर से जेट काउंसिलिंग-2026 की प्रक्रिया चल रही थी। इसी दौरान कृषि आयुक्त ने 10 अक्टूबर को 42 कॉलेजों को शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए एनओसी विस्तार देने से इनकार कर दिया।

इस फैसले के खिलाफ निजी कृषि कॉलेजों ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं। विकल्प फॉर्म भरने की अंतिम तारीख से ठीक पहले रविवार देर रात न्यायाधीश नूपुर भाटी ने सात प्रमुख निजी कृषि कॉलेजों की याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत के फैसले से एनओसी रद्द करने के विभागीय आदेश को राहत नहीं मिली।

छह साल की छूट का मतलब नियमों से राहत नहीं
सुनवाई के दौरान कॉलेजों की ओर से दलील दी गई कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) से मान्यता लेने के लिए छह साल का समय मिलता है। इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि छह साल की अवधि अंतिम मान्यता प्राप्त करने के लिए है। इसका मतलब यह नहीं है कि कॉलेजों को हर साल एनओसी के विस्तार के लिए जरूरी शर्तों का पालन करने से छूट मिल जाएगी। अदालत ने कहा कि कृषि शिक्षा की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों से समझौता नहीं किया जा सकता। कॉलेजों को एनओसी विस्तार के लिए तय 11 बुनियादी शर्तों का पालन करना जरूरी है।

पुराने विद्यार्थियों की पढ़ाई पर असर नहीं
एनओसी रद्द होने और नए दाखिलों पर रोक का असर इन कॉलेजों में पहले से पढ़ रहे विद्यार्थियों पर नहीं पड़ेगा। मौजूदा विद्यार्थी अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगे और डिग्री पूरी कर सकेंगे। इस फैसले का मुख्य असर नए दाखिलों पर पड़ेगा। इससे कृषि शिक्षा में तय मानकों के पालन और कॉलेजों की जवाबदेही का मुद्दा भी सामने आया है।
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