केंद्र सरकार दलहन-तिलहन और प्याज जैसी फसलों का मंडी भाव एमएसपी से नीचे लुढ़कने पर किसानों से प्राइस सपोर्ट स्कीम के तहत खरीद करती है। दूसरी तरफ कीमतों में उछाल आने पर सरकार यही फसलें बाजार में कम भाव पर उतारकर कीमतों को काबू करने की कोशिश में जुट जाती है।
इन पहल में नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन बड़ी भूमिका निभाती है। केंद्र सरकार की यह एजेंसी फसलों की खरीद, भंडारण से लेकर जरूरत पड़ने पर बाजार में फसलों की सप्लाई तक का काम संभालती है।
अब NCCF ने अपने कारोबार में बढ़ोतरी की योजना बनाई है। फेडरेशन ने चालू वित्त वर्ष में अपने कारोबार को 17,200 करोड़ रुपये पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए संस्था सरकारी खरीद के साथ-साथ अपने निजी व्यापर को रफ्तार देने पर जोर दे रही है।
दलहन-तिलहन की खरीद में NCCF का 35 प्रतिशत हिस्सा
एनसीसीएफ के एमडी अनीस जोसेफ चंद्रा कहते हैं कि संस्था ने बीते कुछ सालों में अपनी खरीद से जुड़े कामों को काफी बढ़ाया है। इस समय कृषि मंत्रालय की पीएसएस योजना के तहत तिलहन और दालों की कुल खरीद का लगभग 35 प्रतिशथ हिस्सा एनसीसीएफ द्वारा किया जाता है, जबकि बाकी खरीद नाफेड करती है।
पिछले साल 13,908 करोड़ रहा कारोबार
पिछले वित्त वर्ष (2025-26) के दौरान NCCF का कुल टर्नओवर 13,908 रुपये रहा, जिसमें से 11,500 करोड़ रुपये का योगदार केवल खरीद से जुड़े कामों से आया था। बीते साल संस्था ने 55 लाख किसानों से 20 लाख टन से ज्यादा धान, प्याज, तिलहन-दाल और गेहूं की खरीद की। इस दौरान संस्था ने लागत आदि काटकर 180 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था। वहीं, 2024-25 में NCCF का टर्नओवर 8,270 करोड़ रुपये था। दूसरे शब्दों में कहें तो 2024-25 की तुलना में 2025-26 के दौरान NCCF का कारोबार 68 प्रतिशत बढ़ा है।
इस बढ़त के पीछे संस्था के खरीद कार्यों का 10 नए राज्यों मं विस्तार, को कारण बताया जाता है। दूसरी तरफ वित्त वर्ष 2023-24 में यह आंकड़ा 5,968.96 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2022-23 में यह 2,811 करोड़ रुपये था।
विविध क्षेत्रों में विस्तार और निजी कारोबार
NCCF मात्र फसलों की सरकारी खरीद तक सीमित नहीं है। एनसीसीएफ के एमडी कहते हैं कि संस्था आगामी समय में अपने निजी व्यापार और खुदरा बिक्री पर खास ध्यान देगी। अगले पांच सालों में, एनसीसीएफ के कुल राजस्व का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा खुदरा और कृषि उत्पादों के निजी व्यापार से आने की उम्मीद है। संस्था ने उपभोक्ता वस्तुओं की बिक्री के लिए अपना ब्रांड जनाह (Janah) भी पेश किया है।
इसके साथ ही, एनसीसीएफ ने अपने खुदरा दुकानों के नेटवर्क को बढ़ाने का फैसला लिया है। वर्तमान में संस्था के पास 34 बिक्री केंद्र हैं और वित्त वर्ष 2027 के आखिर तक इनकी संख्या बढ़ाकर 40-45 करने की योजना है। इसके लिए एनसीसीएफ बड़े शहरों में मेट्रो आउटलेट्स के साथ बातचीत कर रही है।
इथेनॉल और अन्य राज्यों के लिए खरीद
सरकारी खरीद के मोर्चे पर एनसीसीएफ की भूमिका में बढ़त हुई है। NCCF पीएसएस और प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड (PSF) के अलावा मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और उत्तराखंड में राज्य सरकारों की ओर से भी धान की खरीद कर रही है। सरकार की इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति को समर्थन देने के लिए, एनसीसीएफ किसानों से सीधे मक्का खरीद रहा है। इस उद्देश्य के लिए संस्था ने अब तक 63 डिस्टिलरीज के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।