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पिपलांत्री मॉडल को राष्ट्रीय सम्मान : बेटी के जन्म पर लगाए जाते हैं 111 पेड़, डॉक्यूमेंट्री ने जीता रजत कमल

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Wed, 23 Sep 2026 06:38 PM IST
सार

  • राजस्थान के राजसमंद जिले की पिपलांत्री ग्राम पंचायत की पहल को राष्ट्रीय पहचान मिली।
  • ‘पिपलांत्री: ए टेल ऑफ इको फेमिनिज्म’ को रजत कमल पुरस्कार मिला।
  • हर बेटी के जन्म पर 111 पेड़ लगाने की पहल पिपलांत्री मॉडल की खास पहचान है।
  • मॉडल में बेटी के सम्मान, महिला सशक्तीकरण और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ा गया है।

पिपलांत्री मॉडल को राष्ट्रीय सम्मान
पिपलांत्री मॉडल को राष्ट्रीय सम्मान - फोटो : सोशल मीडिया
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राजस्थान के राजसमंद जिले की पिपलांत्री ग्राम पंचायत की पर्यावरण और महिला सशक्तीकरण से जुड़ी पहल को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। पिपलांत्री मॉडल पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘पिपलांत्री: ए टेल ऑफ इको फेमिनिज्म’ को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार 2024 में सामाजिक और पर्यावरणीय मूल्यों को बढ़ावा देने वाली सर्वश्रेष्ठ नॉन-फीचर फिल्म के लिए रजत कमल पुरस्कार मिला है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 22 सितंबर 2026 को गुजरात के एकता नगर (केवड़िया) में आयोजित समारोह में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान किए। डॉक्यूमेंट्री हिंदी, राजस्थानी और अंग्रेजी भाषाओं में बनाई गई है।

बेटी के जन्म पर लगाए जाते हैं 111 पेड़
पिपलांत्री ग्राम पंचायत की खास पहल में हर बेटी के जन्म पर 111 पेड़ लगाए जाते हैं। इस अभियान का उद्देश्य बेटी के जन्म को सम्मान देने के साथ पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। इस पहल में स्थानीय लोगों की भागीदारी भी अहम रही है। पिपलांत्री मॉडल ने बेटी के सम्मान, महिला सशक्तीकरण, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया है।

दूसरी ग्राम पंचायतों के लिए भी मॉडल
पंचायती राज मंत्रालय पिपलांत्री मॉडल को दूसरी ग्राम पंचायतों के लिए एक प्रेरक उदाहरण के तौर पर सामने रखता रहा है। मंत्रालय का कहना है कि ग्राम पंचायतें अपनी स्थानीय जरूरतों और परिस्थितियों के अनुसार ऐसे प्रयास शुरू कर सकती हैं।

यह मॉडल सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को स्थानीय स्तर पर लागू करने की सोच को भी दर्शाता है। इसका उदाहरण बताता है कि ग्राम पंचायतें स्थानीय लोगों की भागीदारी से सामाजिक और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को विकास कार्यों से जोड़ सकती हैं।

राष्ट्रीय मंच पर मिली पहचान
पिपलांत्री ग्राम पंचायत के पूर्व सरपंच और पद्मश्री से सम्मानित श्याम सुंदर पालीवाल भी राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में डॉक्यूमेंट्री की प्रोडक्शन टीम के साथ मौजूद रहे। डॉक्यूमेंट्री को मिला राष्ट्रीय सम्मान ग्राम पंचायत स्तर पर किए जा रहे स्थानीय नेतृत्व, जनभागीदारी और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाता है।
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