भारत के झींगा निर्यात में इस साल बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कैलेंडर वर्ष 2026 के पहले सात महीनों में देश से 4,55,489 टन झींगा निर्यात हुआ, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले करीब 1 फीसदी अधिक है। जुलाई में निर्यात बढ़कर 81,674 टन पहुंच गया, जो एक साल पहले की तुलना में 8.2 फीसदी ज्यादा है। यह आंकड़ा अनुमानित 80 हजार टन से भी अधिक रहा।
इनक्रेड रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल की पहली छमाही में मामूली गिरावट के बाद झींगा निर्यात में अब सुधार दिखाई दे रहा है। जुलाई के बेहतर आंकड़ों के बाद जनवरी से जुलाई तक का कुल निर्यात भी सालाना आधार पर बढ़त में आ गया है।
जुलाई में निर्यात ने पकड़ी रफ्तार
रिपोर्ट के अनुसार, साल की शुरुआत में झींगा निर्यात की रफ्तार थोड़ी धीमी रही, लेकिन जून और जुलाई में इसमें तेजी देखने को मिली। जुलाई के आंकड़े इस सुधार का मजबूत संकेत दे रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर यह रफ्तार बनी रहती है तो 2026 में भारत के झींगा निर्यात की मात्रा और कुल निर्यात मूल्य में बढ़ोतरी हो सकती है।
अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप पर नजर
भारत के झींगा निर्यात के लिए अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ (EU) के बाजार महत्वपूर्ण हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर अमेरिकी बाजार में मांग सामान्य होती है और ब्रिटेन व यूरोपीय देशों में भारत की हिस्सेदारी बढ़ती है, तो निर्यात को आगे और बढ़ावा मिल सकता है। इनक्रेड रिसर्च के नितिन अवस्थी के अनुसार, अब मुख्य सवाल यह है कि भारत का झींगा निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर लौटेगा या नहीं, से ज्यादा यह है कि आने वाले महीनों में मासिक निर्यात की रफ्तार कितनी बढ़ सकती है।
कई देशों में बाजार बढ़ाने की कोशिश
सीफूड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महासचिव केएन राघवन ने कहा कि झींगा निर्यात में लगातार सकारात्मक वृद्धि इस क्षेत्र की मजबूती को दिखाती है। उन्होंने बताया कि भारतीय निर्यातक पहले “एक प्रजाति, एक उत्पाद और एक बाजार” पर ज्यादा निर्भर थे। अब वे कई प्रजातियों, कई उत्पादों और अलग-अलग बाजारों पर ध्यान दे रहे हैं।
ब्लैक टाइगर झींगा और वैल्यू एडेड उत्पादों पर जोर
निर्यातकों की ओर से ब्लैक टाइगर झींगा के निर्यात पर भी अधिक ध्यान दिया जा रहा है। पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी एशिया के बाजारों में इसकी अच्छी मांग है।इसके अलावा वैल्यू एडेड यानी प्रसंस्कृत और अधिक मूल्य वाले समुद्री उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा दिया जा रहा है। भारतीय निर्यातक यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, रूस, वियतनाम और चीन जैसे बाजारों में भी अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। इससे भारतीय झींगा उद्योग को एक ही बाजार पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग देशों में निर्यात बढ़ाने का अवसर मिल रहा है।
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