विज्ञापन
Home› Khabar Junction› National Action Plan For Small Scale Fisherfolk In The Works First Draft Likely On November 21 States Asked

छोटे मछुआरों के लिए राष्ट्रीय कार्ययोजना : 21 नवंबर को आ सकता है पहला मसौदा, निर्यात को रफ्तार की उम्मीद

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Fri, 09 Oct 2026 10:18 AM IST
सार

  • छोटे मछुआरों के लिए राष्ट्रीय कार्ययोजना लाने की तैयारी में केंद्र सरकार
  • 21 नवंबर को विश्व मत्स्य पालन दिवस के आसपास जारी हो सकता है योजना का मसौदा
  • कार्ययोजना के लिए तटीय राज्यों और मछुआरों से मांगे जा रहे सुझाव
  • 2030 तक समुद्री खाद्य निर्यात को एक लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य

छोटे पैमाने के मछली पालन क्षेत्र को मजबूती देने के लिए सरकार राष्ट्रीय कार्ययोजना लाने की तैयारी में जुटी।
छोटे पैमाने के मछली पालन क्षेत्र को मजबूती देने के लिए सरकार राष्ट्रीय कार्ययोजना लाने की तैयारी में जुटी। - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

केंद्र सरकार छोटे पैमाने के मछली पालन क्षेत्र को व्यवस्थित और मजबूत बनाने के लिए एक राष्ट्रीय कार्ययोजना लाने की तैयारी कर रही है। इस क्षेत्र में परिवार कम लागत और पारंपरिक तरीके से मछली पालन और मछली पकड़ने का काम करते हैं। सरकार साल 2030 तक समुद्री खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ाकर एक लाख करोड़ तक पहुंचाना चाहती है। इस विजन को पूरा करने में छोटे पैमाने का मछली पालन क्षेत्र अहम भूमिका निभा सकता है। 

21 नवंबर को आ सकता है मसौदा, राज्यों और मछुआरों से मांगी गई राय
मत्स्य पालन विभाग इस कार्ययोजना को अंतिम रूप देने से पहले खुद मछुआरों की राय ले रहा है। योजना का पहला मसौदा 21 नवंबर को विश्व मत्स्य पालन दिवस के आसपास जारी होने की संभावना है। इसके लिए केंद्र सरकार ने सभी तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र लिखा है। राज्यों से कहा गया है कि वे इसके लिए एक नोडल अधिकारी या टीम तय करें और इसी महीने मछुआरों व संबंधित पक्षों के साथ बैठकें आयोजित करें। इन बैठकों से मिलने वाले सुझावों को एक समर्पित राष्ट्रीय टास्क फोर्स को सौंपा जाएगा, जो इस पूरी कार्ययोजना का मसौदा तैयार करेगी।

अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनेगा एकीकृत ढांचा
सरकार के अनुसार, भारत में छोटे मछुआरों के लिए पहले से कई योजनाएं और नीतियां चल रही हैं। इस नई कार्ययोजना का मकसद उन सभी अलग-अलग योजनाओं को एक मंच पर लाना है, ताकि प्राथमिकताओं, जिम्मेदारियों, बजट और निगरानी के नियमों को स्पष्ट रूप से तय किया जा सके।

यह कार्ययोजना संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन के दिशा-निर्देशों और भारत की राष्ट्रीय समुद्री मत्स्य नीति (2017) के आधार पर तैयार की जा रही है। जानकारों के अनुसार, यह योजना छोटे मछुआरा समुदायों से जुड़े कई अहम मुद्दों का समाधान करेगी। इनमें मत्स्य संसाधनों तक पहुंच, मछली पालन का टिकाऊ प्रबंधन, लैंगिक समानता, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम जैसे विषय शामिल हैं। राज्यों में मछुआरों से राय जुटाने और इस पूरी प्रक्रिया में समन्वय का काम BOBP-IGO द्वारा किया जा रहा है।

डिजिटल ट्रैकिंग से नए बाजारों में निर्यात बढ़ाने की तैयारी
सरकार ने पिछले साल मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए एक केंद्रीय डिजिटल ट्रेसेबिलिटी सिस्टम का ढांचा भी जारी किया था। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करना, खाद्य सुरक्षा को बेहतर बनाना और भारतीय उत्पादों की वैश्विक पहुंच बढ़ाना है।

समुद्री उत्पादों के लिए नए बाजार खोजने में मिलेगी मदद
सरकार के अनुसार, अमेरिका द्वारा भारतीय झींगा और दूसरे समुद्री उत्पादों पर ऊंचा शुल्क (टैरिफ) लगाए जाने के बाद यह कदम भारत को अन्य देशों में नए बाजार खोजने में मदद करेगा। वर्ष 2024-25 में भारत का समुद्री खाद्य निर्यात 62,408 करोड़ रुपये रहा था, जिसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी झींगा निर्यात की थी। यह डिजिटल प्रणाली समुद्री उत्पादों की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी। इसके जरिए उत्पाद को पकड़े जाने से लेकर उपभोक्ता की थाली तक पहुंचने की हर जानकारी दर्ज रहेगी, जो दुनिया के कई देशों में आयात के लिए एक जरूरी नियम है।


विज्ञापन
विज्ञापन