केंद्र सरकार ने बाजार में बिक्री के लिए मिलों को एक से 15 अक्तूबर के लिए 14 लाख टन का कोटा जारी किया है। इस 14 लाख टन कोटा में से एक लाख टन का कोटा रिफाइनरों को मिला है। बता दें कि एक अक्तूबर से नया परेाई सीजन शुरू हो चुका है।
तीन बड़े राज्यों को मिला 83 प्रतिशत कोटा
देशभर की चीनी मिलों के लिए तय हुआ 13 लाख टन के बिक्री कोटे का 83 प्रतिशत हिस्सा यानी 10.77 लाख टन केवल तीन राज्यों की मिलों के पास गया है। इसमें 4.39 लाख टन के साथ महाराष्ट्र पहले पायदान पर है। वहीं, उत्तर प्रदेश को 4.18 लाख टन और कर्नाटक को 2.20 लाख टन का कोटा मिला है।
बिक्री के नियमों में सख्ती
चीनी मिलों के लिए सरकार ने बिक्री नियमों में सख्ती की है। इसके मकसद बाजार में चीनी की सप्लाई को रफ्तार देना है, जिससे कीमतों पर लगाम लग सके। इसके तहत चीनी मिलों को अपने तय कोटे का कम से कम 45 प्रतिशत हिस्सा पहले हफ्ते और बाकी बचा हुआ अगले हफ्ते में बेचना होगा।
पेराई शुरू करने वाली मिलों को छूट, उठान के नियम
जानकारी के अनुसार, अक्तूबर महीने में गन्ना पेराई शुरू करने वाली मिलें अपने इस कोटे के अलावा नई चीनी के स्टॉक को अक्तूबर और नवंबर के दौरान किसी भी समय बेच सकती है। हालांकि इस दौरान चीनी मिलों को तय करना होगी कि सौदा होने के सात के अंदर चीनी का मिल से उठान हो जाए। बिक्री के बिल में दर्ज मात्रा को ही बिकी हुई चीनी माना जाएगा ताकि नियमों के पालन की जांच हो सके। पिछले आदेश के विपरीत, बुधवार को जारी किए गए इस आदेश में बिना बिके कोटे के बारे में कोई दिशा-निर्देश नहीं दिया गया है। जानकारों का मानना है कि इसका उद्देश्य मिलों को बिना बिकी चीनी को अक्टूबर में बेचने की छूट देना है, ताकि बाजार में ज्यादा चीनी उपलब्ध हो सके।
दशहरे से पहले कीमतें कम करने की कोशिश और रिफाइनर कोटा
विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य 20 अक्तूबर को आगामी दशहरा त्योहार से पहले खुदरा बाजार में चीनी की कीमतों को नीचे लाना है। इस बार चीनी मिलें सामान्य से पहले गन्ने की पेराई शुरू करने की तैयारी कर रही हैं। महाराष्ट्र में लगभग 15 अक्टूबर से और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 20 अक्टूबर से पेराई शुरू होने की संभावना है। सरकार के अनुसार, जिन रिफाइनरों को पहले घरेलू बाजार में कुछ आयातित चीनी बेचने की अनुमति दी गई थी, उन्हें पिछले दो बार की तरह ही 1 लाख टन का कोटा दिया गया है।