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Home› Khabar Junction› Farmers In This Up District Suffer Heavy Losses Due To Rain Over 35 000 Hectares Of Paddy Crop Destroyed

UP के इस जिले में बारिश से किसानों को बड़ा नुकसान : 35 हजार हेक्टेयर से ज्यादा धान की फसल बर्बाद...

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Thu, 01 Oct 2026 10:08 AM IST
सार

  • पीलीभीत में शुक्रवार से रविवार तक हुई भारी बारिश से किसानों की मुश्किल बढ़ गई।
  • जिले में 35 हजार हेक्टेयर से ज्यादा धान की फसल प्रभावित होने का शुरुआती अनुमान है।
  • तेज हवाओं और बारिश से पककर तैयार धान की फसल खेतों में गिर गई।
  • कई खेतों में जलभराव से धान की बालियां डूबने का खतरा बढ़ गया है।

पीलीभीत में खेती-बाड़ी पर बारिश की मार।
पीलीभीत में खेती-बाड़ी पर बारिश की मार। - फोटो : AI
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विस्तार
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पीलीभीत में शुक्रवार से रविवार तक हुई मूसलाधार बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लगातार बारिश और तेज हवाओं के कारण पककर तैयार खड़ी धान की फसल खेतों में ही बिछ गई है। कृषि विभाग के शुरुआती सर्वे के अनुसार, जिले में 35 हजार हेक्टेयर से अधिक धान की फसल प्रभावित हुई है। बारिश के कारण खेतों में जलभराव हो गया है, जिससे किसानों की महीनों की मेहनत और लागत पानी में डूबने का खतरा पैदा हो गया है।

खेतों में पानी भरने से बालियां डूबने का खतरा
जिले के कलीनगर तहसील क्षेत्र, गजरौला, बरखेड़ा, शिवनगर, लालपुर और बरिधिपुर सहित कई गांवों में धान की फसल को भारी नुकसान हुआ है। जिले में इस साल धान का कुल रकबा लगभग 1.17 लाख हेक्टेयर है। अधिकांश खेतों में फसल कटाई के लिए बिल्कुल तैयार थी, लेकिन अचानक हुई बारिश से पौधे जमीन पर गिर गए हैं। किसानों का कहना है कि खेतों में पानी भर जाने से धान की बालियां डूब गई हैं, जिससे दाना खराब होने की आशंका है। इसके अलावा, मक्का, ज्वार, बाजरा, दलहन, तिलहन और गन्ने की फसल को भी 10 से 35 प्रतिशत तक का नुकसान पहुंचने का अनुमान है। फसल गिरने से अब कटाई करना भी बेहद मुश्किल हो गया है।

नुकसान का सर्वे जारी, मिलेगा मुआवजा
किसानों की इस परेशानी को देखते हुए राजस्व और कृषि विभाग की टीमों ने गांवों में जाकर फसल क्षति का सर्वे शुरू कर दिया है। उप कृषि निदेशक राममिलन परिहार के अनुसार, बारिश से धान की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है। इसके लिए विभागीय टीमें गठित कर दी गई हैं। अधिकारियों के अनुसार, सर्वे का काम पूरा होने के बाद ही नुकसान की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी, जिसके आधार पर प्रभावित किसानों को मुआवजा दिया जाएगा। सेवाराम, प्रमोद कुमार और ललित कुमार जैसे कई किसानों ने बताया कि बीज, खाद और मजदूरी पर उनका काफी पैसा खर्च हुआ था, अब उन्हें सिर्फ विभागीय सर्वे और मुआवजे की ही उम्मीद है।

सरकार और कृषि विभाग की किसानों के लिए अहम सलाह
हालात को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए विशेष बचाव सलाह जारी की है। अधिकारियों के अनुसार, किसान अपने खेतों से तुरंत अतिरिक्त पानी निकालें। धान के खेत में 5 सेंटीमीटर से ज्यादा और गन्ना, दलहन, सोयाबीन व सब्जियों में 24 से 48 घंटे से अधिक पानी न रुकने दें। जब तक मौसम साफ न हो जाए, तब तक कटाई रोक दें। जो फसल कट चुकी है, उसे ऊंचे स्थान पर तिरपाल से ढककर रखें। तेज हवा से गन्ने को गिरने से बचाने के लिए दो-तीन पौधों को एक साथ बांध दें।

विभाग के अनुसार, बारिश के दौरान यूरिया या किसी भी तरह के कीटनाशक का छिड़काव बिल्कुल न करें; धूप निकलने के बाद ही दवाओं का इस्तेमाल करें। इसके अलावा, पशुओं को जलभराव वाले स्थानों से हटाकर सूखे और पक्के स्थानों पर रखें और उन्हें भीगा या फफूंद लगा भूसा न खिलाएं। सबसे महत्वपूर्ण बात, जिन किसानों की फसल का नुकसान हुआ है, वे तुरंत अपने खेत का फोटो-वीडियो लेकर 72 घंटे के भीतर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के टोल-फ्री नंबर या क्रॉप इंश्योरेंस ऐप पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं ताकि उन्हें समय पर क्लेम मिल सके।


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