एक तरफ केंद्र सरकार खाद्य तेल में आत्मनिर्भर होने के लिए मिशन चला रहा है, तो दूसरी तरफ विदेशी खाद्य तेलों पर शुल्क घटा रही है। यह बात तेलंगाना के कृषि मंत्री तुम्मला नागेश्वर राव के हवाले से सामने आई है। उनका कहना है कि शुल्क घटाने से ताड़ की खेती करने वाले किसानों को नुकसान हो रहा है। बता दें कि केंद्र सरकार ने कच्चे सोयाबीन और पाम ऑयल पर लागू होने वाली बेसिक कस्टम ड्यूटी को 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया है। दूसरी ओर रिफाइंड यानी बाजार में बिक्री के लिए तैयार सोयाबीन तेल और पॉम तेल के आयात शुल्क को 32.5 प्रतिशत से घटाकर 27.5 प्रतिशत कर दिया गया है। इस कटौती से विदेश से खाद्य तेलों की खरीद कीमतों में पहले की तुलना में कमी आएगी।
पहले की तरह 44 प्रतिशत शुल्क लागू हो
तेलंगाना के कृषि मंत्री ने ताड़ की खेती करने वाले किसानों को समर्थन देने के लिए केंद्र सरकार से कच्चे पाम तेल के आयात पर 44 प्रतिशत का आयात शुल्क फिर से लागू करने की मांग की है। अपनी इस मांग को लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा है।
सस्ते आयात से किसानों को होगा नुकसान
कृषि मंत्री ने अपने पत्र में चिंता जताते हुए कहा है कि आयात शुल्क घटने से देश के अंदर कच्चे पाम ऑयल की कीमतों में गिरावट आ सकती है। इसके कारण, किसानों को उनकी फसल यानी ताजे फलों के गुच्छों के लिए मिलने वाले दाम पर सीधा और बुरा असर पड़ेगा।
उपभोक्ताओं और किसानों के हितों में बने संतुलन
मंत्री तुम्मला नागेश्वर राव के अनुसार, आम ग्राहकों को सस्ती दरों पर तेल उपलब्ध कराने की कीमत देश के घरेलू किसानों को नहीं चुकानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार की नीति ऐसी होनी चाहिए जिससे उपभोक्ताओं और किसानों, दोनों के हितों के बीच सही संतुलन बना रहे।
उन्होंने किसानों के लिए एक स्थिर और पक्की सरकारी नीति बनाने की मांग की है। मंत्री ने कहा कि पाम ऑयल की खेती करने वाले किसान अपनी फसल में भारी निवेश करते हैं और कई सालों तक अपनी जमीन इसी फसल के लिए सुरक्षित कर देते हैं, इसलिए उन्हें नुकसान से बचाना सरकार की जिम्मेदारी है।