केंद्र सरकार ने घरेलू जूट उद्योग को बढ़ावा देने के लिए बड़ा उठाया है। सरकार के अनुसार, बांग्लादेश और नेपाल से आयात होने वाले जूट के उत्पादों पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी यानी शुल्क में बढ़ोतरी की गई है। यह नया शुल्क लागू भी हो गया है। इस फैसले से चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में भारतीय जूट मिलों, कच्चे जूट की खेती करने वाले किसानों और इसमें काम करने वाले मजदूरों को सीधा फायदा होने की उम्मीद है, क्योंकि अब विदेश से आने वाले जूट के उत्पादों की कीमत पहले से बढ़े जाएगी। इस तरह घरेलू उद्योग को फायदा हो सकता है।
टैक्स बढ़ाने की जरूरत क्यों पड़ी?
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज (DGTR) नाम की सरकारी संस्था की समीक्षा के बाद वित्त मंत्रालय ने यह नया और बढ़ा हुआ शुल्क लागू किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले चार सालों में बांग्लादेश और नेपाल से जूट के धागे, बोरे और बोरियों का आना करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ गया था। स्थिति यह थी कि भारत में इस्तेमाल होने वाले हर सात टन जूट में से एक टन बाहर से आ रहा था। सरकार ने पाया कि 2017 में जो पुराना टैक्स लगाया गया था, वह अब बेअसर हो चुका था। इसलिए सरकार ने विदेशी मिलों की असल कीमतों के आधार पर नया टैक्स तय किया है। जिन विदेशी निर्यातकों ने जांच में सहयोग नहीं किया, उन पर और भी ज्यादा टैक्स लगाया गया है।
रोजगार और मिलों के उत्पादन में होगी बढ़ोतरी
इंडियन जूट मिल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राघवेंद्र गुप्ता ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने बताया, यह सरकार द्वारा उठाया गया एक बहुत ही सकारात्मक कदम है। इससे भारतीय जूट उद्योग के लिए देश में मांग बढ़ेगी। मांग बढ़ने के साथ ही जूट मिलों की उत्पादन क्षमता का पूरा इस्तेमाल होगा और इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
विदेशी सब्सिडी पर लगेगी लगाम
सरकार की एक अलग जांच में यह बात भी सामने आई है कि बांग्लादेश और नेपाल की सरकारें अपनी मिलों को सामान बाहर (भारत) भेजने पर नकद प्रोत्साहन (कैश), टैक्स में छूट और कई तरह के अनुदान दे रही थीं। विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के तहत ऐसी सब्सिडी देना गलत है। इसी सस्ती कीमत के कारण भारतीय मिलों को भारी नुकसान हो रहा था, उनका उत्पादन और मुनाफा दोनों गिर गया था।
इसे देखते हुए, DGTR ने पहली बार बांग्लादेश और नेपाल से आने वाले जूट पर काउंटरवेलिंग ड्यूटी लगाने की भी सिफारिश की है। फिलहाल, वित्त मंत्रालय द्वारा इस नए टैक्स की अधिसूचना जारी करने का इंतजार है।
आम लोगों और किसानों के लिए इसका क्या मतलब है?
सरकार के अनुसार, भारत के जूट उद्योग से लगभग 4 लाख मजदूर जुड़े हैं और कच्चा जूट उगाने वाले करीब 40 लाख किसान परिवार इस पर निर्भर हैं। बाहर से सस्ता जूट आने के कारण भारतीय जूट बिक नहीं पा रहा था। टैक्स बढ़ने से विदेशी माल महंगा होगा और स्वदेशी जूट की मांग बढ़ेगी। इससे 40 लाख किसान परिवारों और 4 लाख मजदूरों की रोजी-रोटी सुरक्षित होगी। जानकारों के मुताबिक, 2017 के बाद पहली बार भारतीय मिलों को एक निष्पक्ष बाजार मिलेगा। अब विदेशी कंपनियां अपनी सरकारों से मिलने वाले पैसे के दम पर भारत में सस्ता माल नहीं बेच पाएंगी। भारतीय मिलों को अब सिर्फ अपनी गुणवत्ता (क्वालिटी) और असल लागत पर मुकाबला करना होगा, जो देश के घरेलू उद्योग और आम कामगारों के लिए एक बड़ी जीत है।