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पंचायती राज मंत्रालय की बड़ी पहल : अब गांवों में बनेगा जल बजट, 10 राज्यों की 1,000 पंचायतों से होगी शुरुआत

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Umashankar Mishra Updated Mon, 13 Jul 2026 06:40 PM IST
सार

  • वाटर बजट से बदलेगी गांव की तस्वीर! पंचायती राज मंत्रालय की नई पहल शुरू
  • पंचायतें खुद निकालेंगी पानी की समस्या का हल, गांव-गांव में अब बनेगा जल बजट
  • देश की ग्राम पंचायतों को मिलेगी 'जल सुरक्षा' की ट्रेनिंग, दिल्ली में बड़ा आयोजन
  • IIPA दिल्ली में जल सुरक्षा मैनुअल हुआ लॉन्च, शुरू हुई मास्टर ट्रेनर्स की खास ट्रेनिंग

केंद्रीय पंचायती राज सचिव विवेक भारद्वाज ने एक खास 'वॉटर सिक्योरिटी मैनुअल' भी लॉन्च किया।
केंद्रीय पंचायती राज सचिव विवेक भारद्वाज ने एक खास 'वॉटर सिक्योरिटी मैनुअल' भी लॉन्च किया। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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गांवों में बढ़ते जल संकट और गिरते भूजल स्तर से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने नई पहल शुरू की है। केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय 13 से 16 जुलाई 2026 तक नई दिल्ली स्थित भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (IIPA) में चार दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। इसमें मास्टर ट्रेनर्स को ग्राम पंचायतों के लिए जल बजट और जल सुरक्षा योजना तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि हर गांव अपने जल संसाधनों का आकलन कर पानी के संरक्षण और बेहतर प्रबंधन की प्रभावी योजना बना सके।

लॉन्च हुआ जल सुरक्षा मैनुअल, पंचायतों को मिलेगी सीधी मदद
इस अवसर पर केंद्रीय पंचायती राज सचिव विवेक भारद्वाज ने 'जल पर्याप्त पंचायत प्रशिक्षण पुस्तिका' के फेज-1 और फेज-2 का विमोचन किया। यह पुस्तिका ग्राम पंचायतों को वैज्ञानिक, सहभागी और जलवायु-अनुकूल जल सुरक्षा योजनाएं तैयार करने में मदद करेगी। इसके तहत राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर मास्टर ट्रेनर्स का नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जो पंचायतों को जल संसाधनों के आकलन, जल बजट और सामुदायिक भागीदारी आधारित जल सुरक्षा योजनाएं बनाने में सहयोग देंगे। इसका उद्देश्य देशभर में 'जल पर्याप्त ग्राम पंचायत' की अवधारणा को साकार करना है।

जल सुरक्षा ग्रामीण विकास की मजबूत नींव
केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने कहा कि टिकाऊ ग्रामीण विकास के लिए जल सुरक्षा बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायतों और स्थानीय समुदायों के अनुभव को वैज्ञानिक जल बजट और जल सुरक्षा योजना में बदलने के लिए यह प्रशिक्षण शुरू किया गया है। उन्होंने इस अभियान की सफलता के लिए सामुदायिक भागीदारी और व्यवहार परिवर्तन को अहम बताया।
पंचायती राज मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव सुशील लोहानी ने कहा पंचायतें जल सुरक्षा की मजबूत कड़ी हैं।
पंचायती राज मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव सुशील लोहानी ने कहा पंचायतें जल सुरक्षा की मजबूत कड़ी हैं। - फोटो : गांव जंक्शन
ग्राम पंचायत विकास योजना से जुड़ेगी जल सुरक्षा
पंचायती राज मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव सुशील कुमार लोहानी ने कहा कि जल संकट का समाधान स्थानीय स्तर पर प्रभावी जल प्रबंधन और जनभागीदारी में है। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायतें अपने जल स्रोतों की स्थिति सबसे अच्छी तरह जानती हैं, इसलिए जल संरक्षण को ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) का हिस्सा बनाना जरूरी है। उन्होंने महिला स्वयं सहायता समूहों और ग्राम सभा की सक्रिय भागीदारी पर जोर देते हुए कहा कि पानी का बेहतर प्रबंधन गांव के समग्र विकास की नींव है। साथ ही उन्होंने बताया कि PRADAN के सहयोग से तैयार यह पहल चरणबद्ध तरीके से पूरे देश, खासकर जल संकट वाले क्षेत्रों में लागू की जाएगी।

वैज्ञानिक और व्यवहारिक प्रशिक्षण पर रहेगा फोकस
प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को कई महत्वपूर्ण विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिनमें शामिल हैं:
  • जल बजट तैयार करना
  • स्थानीय जल स्रोतों का वैज्ञानिक आकलन
  • जल की उपलब्धता और मांग का विश्लेषण
  • जल संरक्षण के उपयुक्त उपायों की पहचान
  • जलवायु परिवर्तन के अनुरूप जल सुरक्षा योजना बनाना
  • इन योजनाओं को ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) से जोड़ना
  • गांव स्तर पर क्रियान्वयन रणनीति तैयार करना
प्रशिक्षण के बाद प्रतिभागियों का मूल्यांकन भी किया जाएगा ताकि वे अपने-अपने राज्यों में आगे प्रशिक्षण दे सकें।

पहले चरण में 10 राज्यों की 1,000 ग्राम पंचायतें शामिल
इस पहल के पहले चरण में बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल को शामिल किया गया है। यह कार्यक्रम इन राज्यों के 100 जिलों, 100 विकासखंडों और 1,000 ग्राम पंचायतों में लागू होगा। पहले बैच में बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल के प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जो बाद में अपने-अपने राज्यों, जिलों और ब्लॉकों में अन्य अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित करेंगे।

IIPA के महानिदेशक की सीख - तकनीक और परंपरा दोनों जरूरी
IIPA के महानिदेशक डॉ. सुरेंद्र कुमार बागड़े ने कहा कि टिकाऊ ग्रामीण विकास के लिए जल सुरक्षा सबसे अहम प्राथमिकताओं में है। उन्होंने वैज्ञानिक तरीकों, नई तकनीक, सामुदायिक भागीदारी और भूजल के संतुलित प्रबंधन पर जोर देते हुए कहा कि प्रभावी जल संरक्षण के लिए तकनीकी उपायों के साथ लोगों के व्यवहार में बदलाव भी जरूरी है।

PRADAN के निदेशक बोले - पानी को बनाएं विकास योजना की जान
PRADAN के कार्यकारी निदेशक सरोज कुमार महापात्रा ने कहा कि जल सुरक्षा को ग्राम पंचायत विकास योजना का केंद्र बनाया जाना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि जल बजट, जनभागीदारी और पंचायतों के साथ सभी संबंधित संस्थाओं के समन्वित प्रयासों से ही जल संसाधनों का टिकाऊ प्रबंधन संभव है। उन्होंने मास्टर ट्रेनर्स से आह्वान किया कि अब विचारों को जमीन पर उतारते हुए 'आइडिया से एक्शन' की दिशा में काम करें।
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