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Home› Khabar Junction› Meeting On Ganga Cleaning 527 Projects Approved 368 Completed 43 000 Crore Spent Sewage And Water Managem

गंगा की सफाई पर बैठक : 527 प्रोजेक्ट मंजूर, 368 पूरे, 43 हजार करोड़ खर्च, सीवेज-जल प्रबंधन की होगी निगरानी

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Thu, 08 Oct 2026 04:57 PM IST
सार

  • गंगा पुनरुद्धार पर सशक्त कार्य बल की 20वीं बैठक नई दिल्ली में हुई
  • अगस्त 2026 तक 43,266 करोड़ रुपये की 527 परियोजनाएं मंजूर
  • 368 परियोजनाएं पूरी, सीवेज ढांचे की 147 परियोजनाएं भी पूरी
  • उपचारित अपशिष्ट जल के सुरक्षित दोबारा उपयोग और प्रकृति आधारित समाधानों पर फोकस 
  • गंगा-यमुना समेत छोटी नदियों के पुनरुद्धार और भूजल सुरक्षा पर चर्चा

कहां पहुंचा नमामि गंगे कार्यक्रम का काम।
कहां पहुंचा नमामि गंगे कार्यक्रम का काम। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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गंगा नदी को फिर से साफ करने के लिए बने सशक्त कार्य बल की 20वीं बैठक केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल की अध्यक्षता राजधानी दिल्ली में आयोजित की गई। बैठक के दौरान नमामि गंगे कार्यक्रम की रफ्तार और सीवेज ढांचा, वैज्ञानिक जल प्रबंधन, उपचारित अपशिष्ट जल का सुरक्षित दोबारा उपयोग, पारिस्थितिकी बहाली, भूजल प्रबंधन समेत प्रकृति से जुड़े समाधानों पर चर्चा हुई।

43,266 करोड़ रुपये की 527 परियोजनाएं मंजूर
अगस्त 2026 तक 527 परियोजनाएं 43,266 करोड़ रुपये की लागत से मंजूर हुई हैं, जिनमें से 368 पूरी हो चुकी हैं। सीवेज ढांचे में 219 परियोजनाएं मंजूर हैं। इनसे 6,603 एमएलडी उपचार क्षमता और 5,245 किलोमीटर सीवर नेटवर्क बनना है। इनमें 147 परियोजनाएं पूरी हुईं, जिससे 4,339 एमएलडी क्षमता और 4,615 किलोमीटर नेटवर्क तैयार हुआ।

बिहार और पश्चिम बंगाल में अपशिष्ट जल के दोबारा इस्तेमाल पर काम
बरौनी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का संशोधित डीपीआर आईआईटी-बीएचयू को मूल्यांकन के लिए भेजा गया। पश्चिम बंगाल के शांतिपुर एसटीपी का डीपीआर कार्यकारी समिति ने मंजूर किया। बिहार और पश्चिम बंगाल ने उपचारित अपशिष्ट जल पुन: उपयोग की नीति अधिसूचित की है। झारखंड में कैबिनेट मंजूरी की प्रक्रिया चल रही है।

गोमती उद्गम स्थल के पुनरुद्धार की भी हुई समीक्षा
बैठक में गोमती उद्गम स्थल, पीलीभीत के पुनरुद्धार की समीक्षा हुई। मास्टर प्लान दिसंबर 2025 की 68वीं कार्यकारी समिति में मंजूर हुआ था। झील बहाली और 1 एमएलडी प्रकृति आधारित एसटीपी का डीपीआर मंजूर है। प्रशासनिक मंजूरी 17 सितंबर 2026 को जारी हुई। कछुआ आवास और पंचवाटिका संबंधी डीपीआर 74वीं समिति में विचाराधीन है। मंत्री ने मंजूर काम बिना देरी शुरू करने और बोली प्रक्रिया समय पर पूरी करने की सलाह दी।

फल्गु नदी के पुनरुद्धार में भूजल रिचार्ज पर जोर
बिहार में निरंजना/फल्गु नदी के पुनरुद्धार पर भी चर्चा हुई। वृक्षारोपण, भूजल रिचार्ज और ट्रेंच के उपाय शामिल हैं। बिहार सरकार ने जल संसाधन विभाग के सचिव को राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी नामित किया है। एनएमसीजी ने बिल ऑफ क्वांटिटी और लागत अनुमान की पुष्टि मांगी है।

यमुना के लिए यूपी और दिल्ली में कई परियोजनाएं मंजूर
यमुना पर उत्तर प्रदेश में मथुरा-वृंदावन, कोसी-छाता, आगरा, फिरोजाबाद और इटावा में परियोजनाएं मंजूर हैं। दिल्ली में यमुना पारिस्थितिकी कार्य बल, आर्द्रभूमि, शहरी नदी प्रबंधन योजना, ड्रोन सर्वे, प्रकृति आधारित समाधान और कोरोनेशन पिलर तथा ओखला एसटीपी से पर्यावरणीय प्रवाह बढ़ाने के काम शामिल हैं।

नदी प्रबंधन के लिए पेशेवर तैयार करने पर जोर
रिवर सिटी अलायंस के तहत दो पाठ्यक्रम तैयार हुए हैं। शहरी नदी प्रबंधन के सिद्धांत और पर्यावरण अनुकूल वॉटरफ्रंट विकास। ये सूरत, ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी और स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर भोपाल में चल रहे हैं। मंत्री ने कहा कि ऐसे पाठ्यक्रम नदी प्रबंधन के पेशेवर तैयार करने में मदद करेंगे।

छोटी नदियों के पुनरुद्धार और माइक्रोप्लास्टिक निगरानी पर पहल
स्वच्छता ही सेवा 2026 के तहत सफाई और जागरूकता अभियान चले। मंत्री ने जल संरक्षण और नदी पुनरुद्धार से जुड़े लोगों से मुलाकात की। जुलाई-अगस्त 2026 में दिल्ली, पुणे और गुवाहाटी में छोटी नदियों के पुनरुद्धार पर कार्यशालाएं हुईं। भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह 2026 में सतत शहरी नदी प्रबंधन ढांचा और नदी में माइक्रोप्लास्टिक निगरानी का प्रोटोकॉल जारी हुआ। विश्व नदी दिवस पर प्रयागराज, वाराणसी, कानपुर, लखनऊ और दिल्ली में जागरूकता अभियान चला।

प्रदूषण कम करने के साथ पानी की उपलब्धता भी जरूरी
पाटिल ने कहा कि नदी पुनरुद्धार में प्रदूषण कम करने के साथ पानी की उपलब्धता, पारिस्थितिकी स्वास्थ्य, भूजल सुरक्षा, जैव विविधता और सामुदायिक भागीदारी जरूरी है। अविरल और निर्मल गंगा के लक्ष्य के लिए निरंतर समन्वय बना रहेगा।


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