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कर्नाटक: सूखे से बेहाल किसानों के लिए सरकार का बड़ा एलान, जरूरत पड़ी तो कर्ज लेकर भी देंगे राहत

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Thu, 08 Oct 2026 04:58 PM IST
सार

  • कर्नाटक के 240 में से 217 तालुक सूखाग्रस्त घोषित
  • 50 लाख किसानों को ₹2,500 की पहली राहत किस्त
  • पहली किस्त पर सरकार खर्च कर चुकी है ₹1,250 करोड़
  • 177 तालुकों में फसल नुकसान करीब ₹46,000 करोड़ आंका गया

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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कर्नाटक में सूखे की बढ़ती स्थिति के बीच राज्य सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए हर संभव कदम उठाने की बात कही है। उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने कहा कि जरूरत पड़ने पर सरकार किसानों को राहत देने के लिए कर्ज भी ले सकती है। उन्होंने कहा कि किसानों की आजीविका बचाना सरकार की पहली प्राथमिकता है। परमेश्वर ने गुरुवार को कोप्पल जिले के येलबुर्गा तालुक के गुन्नाल गांव में खेतों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने बताया कि राज्य के 240 में से 217 तालुक सूखाग्रस्त घोषित किए जा चुके हैं।

विजयनगर में 98% फसल बर्बाद
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि हाल में विजयपुरा और बल्लारी जिलों में सूखे की स्थिति का जायजा लिया गया। विजयनगर जिले में करीब 98 प्रतिशत फसल बर्बाद हो चुकी है। बची हुई 2 प्रतिशत फसल से भी किसानों को पर्याप्त उपज मिलने की उम्मीद कम है।

उन्होंने कहा कि उत्तर कर्नाटक के बल्लारी, विजयनगर, कोप्पल, रायचूर और विजयपुरा जैसे जिलों में सूखे का असर मैसूरु क्षेत्र की तुलना में ज्यादा गंभीर है।सरकार फिलहाल तीन प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान दे रही है- पीने का पानी, किसानों को आर्थिक मदद और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार।

पलायन रोकने के लिए गांवों में रोजगार
सूखे के कारण कई गांवों से लोगों का पलायन भी शुरू हो गया है। परमेश्वर ने बताया कि एक लमाणी तांडा में लोग काम की तलाश में गांव छोड़ने की तैयारी में थे। अधिकारियों को ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत गांवों में ही काम उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा, “अगर गांव में ही काम मिलेगा तो पलायन रोका जा सकता है। किसान बचेंगे तभी समाज और सरकार भी मजबूत रहेंगे।”

50 लाख किसानों को ₹2,500 की पहली किस्त
राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष (NDRF) के नियमों के तहत किसानों को केंद्र और राज्य के हिस्से को मिलाकर कुल ₹8,500 की राहत मिलनी है। परमेश्वर के मुताबिक केंद्र की हिस्सेदारी अभी जारी नहीं हुई है। ऐसे में राज्य सरकार ने अपने हिस्से से किसानों को पहली किस्त के तौर पर ₹2,500 प्रति किसान देने का फैसला किया है।

राज्य में करीब 50 लाख किसानों को यह सहायता दी जानी है। सरकार पहली किस्त के लिए अब तक करीब ₹1,250 करोड़ खर्च कर चुकी है। परमेश्वर ने कहा कि यह राशि किसानों की परेशानी के मुकाबले कम है, लेकिन 50 लाख किसानों को सहायता देने में बड़ी राशि खर्च होती है। इसलिए पहली किस्त जारी करना सरकार की जिम्मेदारी है।

₹46 हजार करोड़ फसल नुकसान का आकलन
राज्य सरकार ने केंद्र को 177 तालुकों में हुए नुकसान के आधार पर करीब ₹46,000 करोड़ के फसल नुकसान का आकलन भेजा है। मौजूदा आकलन और NDRF के नियमों के आधार पर कर्नाटक ने केंद्र से करीब ₹10,000 से ₹12,000 करोड़ की राहत मांगी है।

केंद्र सरकार की तीन टीमें कर्नाटक में सूखे की स्थिति का आकलन कर चुकी हैं। टीमों की रिपोर्ट के आधार पर केंद्र से राहत मिलने की उम्मीद है। परमेश्वर ने कहा कि नुकसान का अंतिम आकलन बढ़ सकता है। अगर नुकसान करीब ₹60,000 करोड़ तक पहुंचता है तो राज्य केंद्र से ₹18,000 से ₹20,000 करोड़ तक की राहत मांग सकता है।

किसानों के कर्ज की किस्त चुकाने पर 5 साल की राहत
सूखे से प्रभावित किसानों को कर्ज चुकाने में भी राहत दी जा रही है। सरकार ने किसानों को 60 महीने यानी पांच साल की अवधि देने की व्यवस्था की है। इस दौरान उन्हें कर्ज की किस्त चुकाने की जरूरत नहीं होगी।

सरकार ने बैंकों को ब्याज समेत कर्ज से जुड़ी देनदारियों के संबंध में भी जरूरी कदम उठाने को कहा है। इसके अलावा किसानों को फसल बीमा, डीजल सब्सिडी और बिजली सब्सिडी जैसी योजनाओं का लाभ देने की बात कही गई है। सरकार यह सुनिश्चित करने में जुटी है कि सूखे से फसल गंवाने वाले पात्र किसानों को फसल बीमा की राशि जल्द मिले।

कई इलाकों में 500 फीट तक पानी नहीं
परमेश्वर ने बताया कि राज्य के कई हिस्सों में भूजल स्तर तेजी से नीचे चला गया है। कुछ जगहों पर 500 फीट तक बोरवेल खोदने के बाद भी पानी नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि उनके अपने क्षेत्र में कुछ स्थानों पर 1,800 फीट तक खुदाई के बावजूद पानी नहीं मिला।

मक्का किसानों को कम कीमत की चिंता
उत्तर कर्नाटक के कई जिलों में मक्का किसानों को भी कम कीमत और घटती पैदावार के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। परमेश्वर ने कहा कि इस मामले को केंद्र सरकार के सामने उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करने में केंद्र की अहम भूमिका है और किसानों को जरूरी सहायता देना भी केंद्र की जिम्मेदारी है।

“किसानों के लिए जरूरत पड़ी तो कर्ज लेंगे”
परमेश्वर ने कहा कि अगर मौजूदा सहायता किसानों के लिए पर्याप्त नहीं हुई तो सरकार अतिरिक्त कदम उठाएगी। उन्होंने साफ कहा कि किसानों को किसी भी स्थिति में अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। “जरूरत पड़ी तो किसानों को राहत देने के लिए सरकार कर्ज लेने को भी तैयार है। किसानों की आजीविका बचाना सरकार की जिम्मेदारी है।” उन्होंने केंद्र से भी किसानों की परेशानी दूर करने में सहयोग करने की अपील की। साथ ही कहा कि सूखे के समय किसानों की मदद राजनीति से ऊपर होनी चाहिए।
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