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Marine Animals Found Indian Beaches One Year Goa Reporting Highest Number Cases
Marine Mammal: भारत के समुद्र तटों पर एक साल में फंसे 161 समुद्री जीव, गोवा में सबसे ज्यादा 113 मामले
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Thu, 05 Nov 2026 05:17 PM IST
सार
CMFRI के अनुसार, 2024-25 में भारतीय समुद्री तटों पर 161 समुद्री स्तनधारी फंसे। गोवा में सबसे ज्यादा 113 मामले मिले। जानें डॉल्फिन और अन्य समुद्री जीवों की स्थिति।
Marine Mammals: भारतीय समुद्री तटों पर साल 2024-25 के दौरान समुद्री स्तनधारियों के फंसने (स्ट्रैंडिंग) के 161 मामले दर्ज किए गए। इनमें सबसे ज्यादा 113 मामले गोवा में सामने आए। इसके बाद केरल में 13 और महाराष्ट्र में 11 मामले दर्ज किए गए। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (CMFRI) ने यह जानकारी दी है। संस्थान ने इन घटनाओं पर नजर रखने और समुद्री जीवों के संरक्षण के लिए जीआईएस आधारित डिजिटल मैपिंग प्लेटफॉर्म भी तैयार किया है।
CMFRI के अनुसार, समुद्री स्तनधारियों के फंसने की घटनाओं में सबसे ज्यादा 82 मामले हंपबैक डॉल्फिन के थे। इसके बाद इंडो-पैसिफिक फिनलेस पॉरपॉइज के 44 मामले दर्ज किए गए। ये समुद्री जीव अक्सर किसी कारण से समुद्र के उथले पानी या तट पर फंस जाते हैं। कई बार ऐसी घटनाओं में उनकी मौत भी हो जाती है। यह अध्ययन CMFRI में आयोजित मत्स्य पालन और रिमोट सेंसिंग पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में पेश किया गया। इस अध्ययन का नेतृत्व संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक रतीश कुमार रवींद्रन ने किया।
32 प्रजातियों पर नजर रखेगा डिजिटल मैपिंग प्लेटफॉर्म
समुद्री स्तनधारियों के संरक्षण को मजबूत करने के लिए CMFRI ने जीआईएस तकनीक पर आधारित एक इंटरैक्टिव डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया है। इसमें करीब 1,300 भौगोलिक आंकड़े शामिल किए गए हैं, जो समुद्री स्तनधारियों की 32 प्रजातियों से जुड़े हैं।
इस प्लेटफॉर्म पर समुद्री जीवों के फंसने की जगह, उनकी प्रजाति, घटना का रिकॉर्ड और मौत के संभावित कारणों की जानकारी मिलेगी। इसके इंटरैक्टिव नक्शे की मदद से शोधकर्ता यह भी देख सकेंगे कि समुद्री जीव किन इलाकों में और किस समय सबसे ज्यादा फंस रहे हैं।
कैसे जुटाए गए आंकड़े?
CMFRI ने यह आंकड़े समुद्री स्तनधारी निगरानी नेटवर्क के माध्यम से जुटाए हैं। इसके लिए भारतीय समुद्री तटों पर स्थित संस्थान के क्षेत्रीय केंद्रों के कर्मचारियों की मदद ली गई। इसके अलावा प्रशिक्षित स्वयंसेवकों से मिली जानकारी और समुद्री स्तनधारियों से जुड़े खुले ऑनलाइन डेटाबेस के आंकड़ों को भी शामिल किया गया। इनमें मरीन मैमल रिसर्च एंड कंजर्वेशन नेटवर्क ऑफ इंडिया (MMRCNI) का डेटा भी शामिल है।
अध्ययन में समुद्री जीवों की पहचान के लिए डीएनए जांच, मौके पर जाकर निरीक्षण और भौगोलिक आंकड़ों के विश्लेषण को महत्वपूर्ण बताया गया है। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि समुद्री जीव किन परिस्थितियों में तट पर फंस रहे हैं।
समुद्री जीवों के संरक्षण में मिलेगी मदद
CMFRI के वरिष्ठ वैज्ञानिक रतीश कुमार रवींद्रन के अनुसार, इस डिजिटल प्लेटफॉर्म की मदद से शोधकर्ता और संरक्षण एजेंसियां उन इलाकों की पहचान कर सकेंगी, जहां समुद्री जीवों के फंसने की घटनाएं ज्यादा होती हैं। इससे समुद्री जीवों के लिए संभावित खतरों का पता लगाने और समय पर बचाव की व्यवस्था मजबूत करने में मदद मिलेगी। साथ ही, समुद्री जीवों के फंसने की घटनाओं की जानकारी जुटाने और संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने में भी यह प्लेटफॉर्म उपयोगी साबित हो सकता है।
तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन ट्रेवर प्लैट साइंस फाउंडेशन, कोचीन यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के केमिकल ओशनोग्राफी विभाग, CMFRI और मरीन बायोलॉजिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने संयुक्त रूप से किया है।
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