खेती अगर सही तरीके से की जाए तो वह तकदीर बदल सकती है, इसका जीता-जागता उदाहरण बांका जिले का जयपुर इलाका है। लाल और पथरीली मिट्टी वाला यह इलाका कभी बंजर और नक्सल प्रभावित माना जाता था। 10-15 साल पहले तक डर और खराब खेती के कारण यहां के लोग दूसरे राज्यों में काम खोजने जाते थे। लेकिन, आज इस इलाके में टमाटर की सफल खेती ने पूरी तस्वीर बदल दी है। झोपड़ियों की जगह पक्के मकानों ने ले ली है और किसानों के बच्चे विदेशों में उच्च शिक्षा ले रहे हैं।
काजू-किशमिश से भी ज्यादा मुनाफा दे रहा टमाटर
गुरुड़ा गांव के एक प्रमुख किसान सोना प्रसाद यादव बताते हैं कि उन्हें टमाटर की फसल से काजू, किशमिश और इलायची जैसी महंगी फसलों से भी ज्यादा मुनाफा हो रहा है। जयपुर इलाके में एक एकड़ में टमाटर लगाने वाले किसानों को कम से कम एक लाख रुपये से लेकर कई लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा हो रहा है। जिन परिवारों के पास 5 से 10 एकड़ बंजर और पहाड़ी जमीन थी, वे आज हर साल टमाटर बेचकर सीधे 5 से 10 लाख रुपये नकद कमा रहे हैं। इस बंपर कमाई ने धान-गेहूं की पारंपरिक खेती को भी पीछे छोड़ दिया है।
किसानों के बच्चे बन रहे अफसर और डॉक्टर
टमाटर की इस कमाई का सबसे बड़ा असर इस इलाके के बच्चों की शिक्षा पर पड़ा है। किसान अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा बच्चों को पटना और दिल्ली जैसे शहरों में रखकर पढ़ाने में लगा रहे हैं। इसी का नतीजा है कि आज कई साधारण किसानों के बच्चे बड़े मुकाम पर हैं, जैसे पलनियां गांव के किसान दिनेश यादव का बेटा अमेरिका की मशहूर स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से बीटेक कर रहा है।
इसी तरह तितलाखो गांव के किसान ईश्वर यादव के दोनों बेटे (पंकज और हिमांशु) और उनकी पत्नियां, पढ़ाई पूरी करके डॉक्टर बन चुके हैं। सरूआ गांव के प्रेम कुमार का बेटा भी नीट पास करके एमबीबीएस कर रहा है। लक्ष्मीपुर के राजेंद्र साह का बेटा दीपक कुमार एमटेक करने के बाद पहले ब्रिटेन में और अब जर्मनी में एक बड़े पद पर नौकरी कर रहा है। झाझा के किसान बनारसी यादव का बेटा मृत्युंजय और उनकी बहू सेंट्रल बैंक में अधिकारी हैं। कोल्हासार गांव के सुरेश यादव का बेटा रंजीत पटना में गृह विभाग में है, जबकि गुड्डू मंडल पटना से पढ़ाई कर एलआईसी में अधिकारी बन गए हैं।
कोल्हासार हाईस्कूल में इतिहास के शिक्षक ऋषिकेश कुमार बताते हैं कि उनके पिता ने भी केवल टमाटर की खेती से हुई कमाई के दम पर ही परिवार और समाज की पूरी जिम्मेदारी निभाई है।
बदलाव की एक नई मिसाल
आज जयपुर और इसके आसपास के दर्जनों गांवों में टमाटर की खेती सिर्फ पेट पालने का जरिया नहीं है, बल्कि यह समाज और शिक्षा में आए एक बड़े बदलाव का प्रतीक बन गई है। कभी गोलियों की आवाज और डर के साए में जीने वाला यह इलाका आज शिक्षा और खुशहाली की रोशनी से चमक रहा है।