फसल कटाई के सीजन में खेतों में दिखने वाले कंबाइन हार्वेस्टर किसानों की सेहत के लिए खतरा है। ये हार्वेस्टर फसलों की कटाई करते समय धूल फेंकते हैं, जो किसानों के फेफड़ों को भारी नुकसान पहुंचाती है। इस चुनौती को देखते हुए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने हार्वेस्टर की धूल से किसानों-मजदूरों को बचाने का एक व्यावहारिक उपाय खोजने की अपील की है।
कटाई में हार्वेस्टर का साथ देने वाले अधिकतर मजदूर ज्यादा समय तक धूल के संपर्क में रहते हैं, जिसकी वजह से धूल सांस के माध्यम से फेफड़ों को चोट पहुंचाती है। इसके अलावा, धूल में मौजूद खनिज कणों को सांस के जरिए अंदर लेने से 'न्यूमोकोनिओसिस' (खनिज धूल से होने वाली फेफड़ों की गंभीर बीमारियों का एक समूह) का खतरा भी काफी बढ़ जाता है।
ICMR और ICAR का संयुक्त मिशन सेहत
इस व्यावसायिक स्वास्थ्य खतरे से निपटने के लिए आईसीएमआर ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के साथ मिलकर अपने संयुक्त राष्ट्रीय मिशन सेहत के तहत एक कदम उठाया है।
आईसीएमआर ने कंबाइन हार्वेस्टर श्रमिकों में धूल के संपर्क और सांस की बीमारियों को कम करना शीर्षक से एक एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट यानी रुचि पत्र जारी किया है। इसके जरिए शोधकर्ताओं से कहा गया है कि वे मजदूरों की आंखों और सांस से जुड़ी बीमारियों, फेफड़ों की स्थिति और उन तक पहुंचने वाली धूल की मात्रा को मापने के लिए अध्ययन करें।
खोखे जाएंगे सस्ते और असरदार उपाय
इस प्रस्तावित रिसर्च का मुख्य उद्देश्य ऐसी कम लागत वाली तकनीकें और उपाय खोजना है, जिन्हें आसानी से अपनाया जा सके। इनमें खुले प्लेटफॉर्म वाले हार्वेस्टर में फिल्टर वाले और दबाव वाले केबिन (एन्क्लोजर) लगाना, धूल को कम करने के लिए मशीनों में बदलाव करना और सांस व आंखों की सुरक्षा के लिए बेहतर उपकरण तैयार करना शामिल है।
अधिकारियों के अनुसार, इस पहले के तहत केवल उपकरण नहीं, बल्ति मजदूरों की ट्रेनिंग और काम करने के सुरक्षित तरीके भी शामिल हो सकते हैं।