विज्ञापन
Home› Khabar Junction› Mann Ki Baat Pm Modi Outlined New Path To Rural Progress Covering Everything From Millets Cotton

खेती से कारोबार तक: मन की बात में PM मोदी ने बताई गांवों की तरक्की की नई राह, मिलेट्स से लेकर कपास तक की चर्चा

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sun, 25 Oct 2026 05:30 PM IST
सार

पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ में प्राकृतिक कपास, मिलेट्स, हथकरघा और स्थानीय उत्पादों की चर्चा की। जानिए कैसे पारंपरिक खेती और नए प्रयोग गांवों में रोजगार और कमाई के अवसर बढ़ा रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात - फोटो : गांव जंक्शन
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में बताया कि पारंपरिक खेती, स्थानीय हुनर और आधुनिक तकनीक को जोड़कर किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। मेघालय में मिलेट्स से खाद्य उत्पाद बनाने, पंजाब में प्राकृतिक कपास और हथकरघे को बढ़ावा देने तथा स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने जैसे प्रयासों का जिक्र किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में खेती, ग्रामीण आजीविका, स्वदेशी उत्पादों और स्थानीय परंपराओं से जुड़े कई प्रेरक उदाहरण साझा किए। उन्होंने बताया कि पारंपरिक फसलों को नए उत्पादों से जोड़ने, कृषि उत्पादों की बेहतर पैकेजिंग करने और स्थानीय हुनर को बाजार उपलब्ध कराने से गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है। पंजाब में प्राकृतिक कपास की खेती और हथकरघे से महिलाओं को रोजगार मिलने से लेकर मेघालय में मिलेट्स की दोबारा बढ़ती लोकप्रियता तक, इन पहलों से खेती में नए अवसर सामने आ रहे हैं।

प्राकृतिक कपास और हथकरघे से महिलाओं को रोजगार
प्रधानमंत्री ने पंजाब के मालवा क्षेत्र में ‘खेती विरासत मिशन’ की ओर से चलाए जा रहे ‘नव-त्रिन्जन’ प्रयास का उल्लेख किया। इसका उद्देश्य प्राकृतिक खेती और पारंपरिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना है। इस पहल के तहत रासायनिक पदार्थों के इस्तेमाल के बिना कपास उगाने और प्राकृतिक रंगों वाली कपास को प्रोत्साहित करने पर काम किया जा रहा है।

इस पहल के तहत बुनकरी के पारंपरिक हुनर को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए एक बुनाई स्कूल भी शुरू किया गया है। प्रधानमंत्री ने बताया कि इस स्कूल से जुड़कर कई महिलाओं के जीवन में बदलाव आया है। रमनदीप कौर, रेखा रानी, सुनेहा देवी और रजनी कौर जैसी महिलाएं प्रशिक्षण लेकर हथकरघे पर कपड़े, शॉल और तौलिए बना रही हैं। इनमें से कुछ महिलाएं पहले मजदूरी या घरेलू काम पर निर्भर थीं।

प्रधानमंत्री के मुताबिक, रेखा रानी की बनाई शॉल राष्ट्रपति को भेंट की गई। उन्होंने इस पहल से जुड़ी टीम की सराहना करते हुए कहा कि पारंपरिक हुनर को बढ़ावा देने से महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसर मिल रहे हैं।

मिलेट्स की खेती और उत्पादों से बढ़ रही किसानों की कमाई
प्रधानमंत्री ने पूर्वोत्तर भारत में मिलेट्स यानी श्रीअन्न की खेती को दोबारा बढ़ावा देने के प्रयासों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि समय के साथ इस पारंपरिक फसल की खेती कुछ क्षेत्रों में कम हो गई थी, लेकिन अब युवा नए प्रयोगों के जरिए इसे फिर से लोकप्रिय बना रहे हैं।

मेघालय के पश्चिम जयंतिया हिल्स जिले के खांडुली गांव में दो महिलाओं ने मिलेट्स से कुकीज, केक, मफिन और बच्चों के लिए खाद्य उत्पाद बनाने शुरू किए। इससे इन उत्पादों की मांग बढ़ी और किसानों को भी मिलेट्स की खेती दोबारा शुरू करने के लिए प्रोत्साहन मिला।

इसी राज्य के पश्चिम गारो हिल्स जिले के सादोलपाड़ा गांव में किसान चेकजिंग संगमा आधुनिक तरीकों से मिलेट्स की खेती कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने बताया कि इससे उनकी आय बढ़ी है और गांव में भी इस फसल के प्रति जागरूकता आई है।

नागालैंड के केजोमा गांव में भी एक दशक से अधिक समय तक बंद रही मिलेट्स की खेती वर्ष 2024 में फिर शुरू की गई। इसके बाद वर्ष 2025 में गांव में पहला मिलेट्स महोत्सव आयोजित हुआ। प्रधानमंत्री ने इन उदाहरणों को पारंपरिक फसलों को नए अवसरों से जोड़ने का प्रयास बताया।

बेहतर पैकेजिंग से स्थानीय उत्पादों को नई पहचान
प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी उत्पाद की गुणवत्ता के साथ उसकी पैकेजिंग भी बाजार में उसकी पहचान बनाने में अहम भूमिका निभाती है। उन्होंने महाराष्ट्र के आदिवासी समुदायों के उत्पादों का उदाहरण दिया, जिन्हें ‘शबरी नेचुरल्स’ के माध्यम से बाजार में लाया जा रहा है। इनमें शहद, महुआ, चिरौंजी और बांस से बने उत्पाद शामिल हैं।

इन उत्पादों की पैकेजिंग में आदिवासी कला की झलक दिखाई देती है। प्रधानमंत्री ने बताया कि इस पैकेजिंग को जापान का प्रतिष्ठित ‘गुड डिजाइन अवॉर्ड’ मिला है। उन्होंने कर्नाटक के एक स्टार्टअप का भी जिक्र किया, जो बांस और कृषि अवशेषों से पैकेजिंग सामग्री तैयार कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयोग स्थानीय संसाधनों के इस्तेमाल, पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों और ग्रामीण उत्पादों को बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।

किसानों के उत्पादों को विदेशों में मिल रहा बाजार
प्रधानमंत्री ने ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय स्थानीय उत्पादों की पहुंच अब विदेशों तक बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि बिहार के पूर्णिया का मखाना ग्रीस और कर्नाटक के कलबुर्गी की अरहर दाल मालदीव तक पहुंच रही है।

उन्होंने गांधी जयंती पर खादी ग्रामोद्योग के उत्पादों की बिक्री का भी जिक्र किया। प्रधानमंत्री के अनुसार, उस दिन खादी उत्पादों की बिक्री 28 करोड़ रुपये से अधिक रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब डेढ़ करोड़ रुपये ज्यादा थी।

प्रधानमंत्री ने त्योहारों पर खरीदारी करते समय स्थानीय कारीगरों और उत्पादकों के सामान को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिलने से कारीगरों का उत्साह बढ़ेगा और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी।

हेवल नदी को बचाने के लिए गांवों ने मिलकर किया काम
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में हेवल नदी को फिर से जीवंत करने के प्रयासों की भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि नदी में पानी कम होने और आसपास के प्राकृतिक जलस्रोतों के सूखने के बाद स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों ने मिलकर अभियान चलाया।

इस दौरान बारिश के पानी को रोकने, जमीन में पानी पहुंचाने और पौधरोपण जैसे काम किए गए। प्रधानमंत्री के अनुसार, इन प्रयासों से नदी को नया जीवन मिला और आसपास के कई प्राकृतिक जलस्रोतों को फिर से जीवित करने में मदद मिली। उन्होंने त्योहारों के दौरान स्वच्छता बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय स्तर पर बड़े बदलाव संभव हैं।

ई-संजीवनी से दूरदराज के इलाकों तक पहुंच रही स्वास्थ्य सेवा
प्रधानमंत्री ने ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा का उल्लेख करते हुए बताया कि इसके जरिए अब तक करीब 50 करोड़ टेली-परामर्श किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि इस सेवा से दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेषज्ञ डॉक्टरों से सलाह लेने में मदद मिल रही है।

उन्होंने अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप, लद्दाख और नागालैंड के उदाहरण साझा किए, जहां स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों ने ई-संजीवनी के माध्यम से विशेषज्ञ डॉक्टरों से संपर्क कर मरीजों के इलाज में मदद ली। प्रधानमंत्री ने लगभग 1.90 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का भी जिक्र किया और कहा कि गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका है।

ब्रेन रिसर्च और नए स्टार्टअप पर भी चर्चा
प्रधानमंत्री ने चेन्नई स्थित आईआईटी मद्रास में ‘सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर’ का जिक्र करते हुए मानव मस्तिष्क की हाई-रिजॉल्यूशन डिजिटल 3डी तस्वीरें तैयार करने और 100 मानव मस्तिष्कों की मैपिंग के लक्ष्य की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस तरह का शोध अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी बीमारियों को समझने में मददगार हो सकता है। उन्होंने अंगदान के महत्व पर भी जोर दिया और मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम की शिवानी के परिवार का उदाहरण साझा किया, जिसने कठिन परिस्थिति में अंगदान का फैसला लिया।

इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने आईआईटी मद्रास से जुड़े स्टार्टअप का उल्लेख किया, जो सोने की शुद्धता जांचने, बैंक धोखाधड़ी से निकाली गई रकम की वसूली, सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस्तेमाल, समुद्र के ऊपर उड़ने वाले इलेक्ट्रिक वाहन और तेज चार्जिंग वाली बैटरियों जैसी तकनीकों पर काम कर रहे हैं।
 
विज्ञापन
विज्ञापन