मलेशिया में पाम ऑयल की कीमतों में लगातार छठे कारोबारी सत्र गिरावट दर्ज की गई। शुक्रवार को कीमतें 12 हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गईं। कमजोर निर्यात और पाम ऑयल के बढ़ते भंडार की चिंता से बाजार पर दबाव बना हुआ है।
बर्सा मलेशिया डेरिवेटिव्स एक्सचेंज में दिसंबर डिलीवरी वाला बेंचमार्क पाम ऑयल वायदा 21 रिंगिट यानी 0.46 फीसदी गिरकर 4,533 रिंगिट प्रति टन रह गया। यह 10 जुलाई के बाद इसका सबसे निचला बंद स्तर है। पूरे सप्ताह में पाम ऑयल की कीमत 2.98 फीसदी घटी।
सितंबर में निर्यात 17-29 फीसदी तक घटा
कुआलालंपुर के एक कारोबारी के मुताबिक कमजोर निर्यात, उत्पादन में बढ़ोतरी और भंडार बढ़कर 30 लाख टन से अधिक होने से पाम ऑयल वायदा दबाव में है। सितंबर में उत्पादन में भी तेज बढ़ोतरी हुई।कार्गो सर्वे कंपनियों इंटरटेक टेस्टिंग सर्विसेज और एमस्पेक एग्री मलेशिया के अनुसार, अगस्त की तुलना में सितंबर में मलेशिया से पाम ऑयल उत्पादों का निर्यात 17.1 से 28.8 फीसदी तक घटा।
दूसरे खाद्य तेलों पर भी बाजार की नजर
शिकागो बोर्ड ऑफ ट्रेड में सोयाबीन तेल (Soyoil) की कीमत लगभग स्थिर रही और इसमें 0.01 फीसदी की मामूली बढ़ोतरी हुई। वहीं, सार्वजनिक अवकाश के कारण डालियान कमोडिटी एक्सचेंज बंद रहा। पाम ऑयल की कीमतों पर दूसरे खाद्य तेलों की कीमतों का भी असर पड़ता है, क्योंकि वैश्विक वनस्पति तेल बाजार में पाम ऑयल की सीधी प्रतिस्पर्धा सोयाबीन और सूरजमुखी जैसे तेलों से होती है।
आगे महंगा हो सकता है वनस्पति तेल
उद्योग विश्लेषक थॉमस मील्के के अनुसार, आने वाले महीनों और 2027 में वैश्विक वनस्पति तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसका कारण आपूर्ति में कमी है। काला सागर क्षेत्र से सूरजमुखी तेल की आपूर्ति प्रभावित होने और दक्षिण अमेरिका से सोयाबीन तेल के निर्यात में कमी से बाजार में दबाव बढ़ सकता है।
वहीं, उद्योग विश्लेषक डोराब मिस्त्री का अनुमान है कि दिसंबर तक मलेशियाई पाम ऑयल की कीमत 4,500 से 5,000 रिंगिट प्रति टन के बीच रह सकती है। उनके मुताबिक बढ़ता स्टॉक कीमतों पर दबाव बनाए रखेगा। हालांकि अगले साल अल नीनो के कारण उत्पादन घटने की आशंका है।
इंडोनेशिया का निर्यात भी थोड़ा घटा
आंकड़ों के मुताबिक इंडोनेशिया ने जनवरी से अगस्त के बीच 1.613 करोड़ टन कच्चा और रिफाइंड पाम ऑयल निर्यात किया। यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 0.39 फीसदी कम है। तकनीकी बाजार विश्लेषण के अनुसार पाम ऑयल की कीमत 4,478 रिंगिट प्रति टन के स्तर तक जा सकती है। यदि यह स्तर टूटता है तो कीमत 4,445 रिंगिट तक पहुंचने की संभावना जताई गई है।
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