उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के आलू किसानों के लिए राहत की खबर है। अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते कुछ समय से खाड़ी देशों को आलू का निर्यात प्रभावित था, लेकिन अब हालात सामान्य होने के बाद निर्यात की तैयारी शुरू हो गई है। जिले से सितंबर से जनवरी के बीच करीब 20 कंटेनर यानी 600 मीट्रिक टन आलू खाड़ी देशों को भेजने का लक्ष्य रखा गया है।
इससे स्थानीय बाजार में मांग कम होने और निर्यात रुकने से परेशान आलू किसानों को बाजार मिलने की उम्मीद है। निर्यात के लिए फ्राइओम, फ्राइसौना और कुफरी सूर्या प्रजाति के आलू का इस्तेमाल किया जाएगा।
समुद्री रास्ते से भेजा जाएगा आलू
आलू को हवाई जहाज से भेजने पर खर्च अधिक आता है, इसलिए निर्यातक समुद्री रास्ते का इस्तेमाल करेंगे। एक कंटेनर में करीब 30 मीट्रिक टन आलू भेजा जाएगा। निर्यातक पहले आलू को अलीगढ़ से दादरी पहुंचाएंगे। इसके बाद दादरी से मुंबई तक आलू को मालगाड़ी के एसी कंटेनर में भेजा जाएगा, ताकि लंबी दूरी के दौरान आलू खराब न हो। मुंबई से इसे पानी के जहाज के जरिए खाड़ी देशों तक पहुंचाया जाएगा।
समुद्री रास्ते से एक किलो आलू भेजने में करीब 52 रुपये का खर्च आता है और इसे खाड़ी देशों तक पहुंचने में करीब चार सप्ताह लगते हैं। वहीं, हवाई जहाज से करीब पांच घंटे में आलू पहुंच सकता है, लेकिन परिवहन लागत काफी अधिक होने के कारण समुद्री रास्ते को प्राथमिकता दी जा रही है। एफपीओ संचालक जितेंद्र अवस्थी के मुताबिक आलू निर्यात के लिए अब स्थिति सामान्य हो गई है। जनवरी तक हर महीने जरूरत के अनुसार चरणबद्ध तरीके से आलू का निर्यात किया जाएगा। जिला उद्यान अधिकारी सुनील कुमार के मुताबिक, एफपीओ संचालकों के माध्यम से आलू के निर्यात की तैयारी की जा रही है।
31,500 हेक्टेयर में हुई आलू की खेती
अलीगढ़ जिले में कुफरी 3797, कुफरी सूर्या, चिपसोना समेत कई प्रजातियों के आलू की खेती होती है। इस साल जिले में करीब 31,500 हेक्टेयर में आलू की बुआई हुई थी। इससे 80 लाख क्विंटल से अधिक आलू उत्पादन हुआ। हालांकि इस बार निर्यात प्रभावित होने और स्थानीय बाजार में मांग कमजोर रहने से किसानों को आलू की बिक्री में परेशानी का सामना करना पड़ा। इससे किसानों को नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।
भंडारण शुल्क में भी राहत
निर्यात में रुकावट और स्थानीय बाजार में कमजोर मांग को देखते हुए सरकार की ओर से किसानों को राहत देने के लिए आलू भंडारण शुल्क में छूट भी दी जा रही है। अब खाड़ी देशों में निर्यात दोबारा शुरू होने से किसानों को अतिरिक्त बाजार मिलने की उम्मीद है। यदि तय लक्ष्य के अनुसार हर महीने आलू का निर्यात होता है तो इससे स्थानीय बाजार पर दबाव कम करने और किसानों को अपनी उपज बेचने में मदद मिल सकती है।
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