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बागों में घटा सेब, बाजार में बढ़ेगा भाव : हिमाचल में 20 हजार टन कम हुई आवक, मौसम की मार से बागवान परेशान

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sat, 03 Oct 2026 12:23 PM IST
सार

  • हिमाचल में अब तक 3.87 लाख मीट्रिक टन सेब बाजार पहुंचा।
  • पिछले सीजन में इसी अवधि तक 4.07 लाख मीट्रिक टन आवक हुई थी।
  • इस साल उत्पादन 3.5 से 3.75 लाख टन रहने का अनुमान।
  • पिछले साल करीब 7 लाख टन सेब का उत्पादन हुआ था।

सेब उत्पादक चिंतित
सेब उत्पादक चिंतित - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश में इस साल सेब की फसल पिछले सीजन के मुकाबले करीब 20 हजार मीट्रिक टन कम है। अब तक मंडियों में 3.87 लाख मीट्रिक टन सेब पहुंच चुका है, जबकि पिछले सीजन में इसी अवधि तक 4.07 लाख मीट्रिक टन सेब बाजार में आ गया था। कम आवक से आने वाले दिनों में सेब के भाव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

उत्पादन में कमी के पीछे मौसम को प्रमुख कारण माना जा रहा है। दिसंबर 2023 से मई 2024 के बीच पर्याप्त बारिश और बर्फबारी नहीं होने से सेब के लिए जरूरी चिलिंग ऑवर प्रभावित हुए। इसके बाद बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और मौसम में उतार-चढ़ाव ने फूल और फल बनने की प्रक्रिया को प्रभावित किया। इस बार फलों की ड्रॉपिंग भी अधिक रही और सेब सीजन करीब 15 दिन देरी से शुरू हुआ।

7 लाख टन से घटकर 3.5-3.75 लाख टन उत्पादन का अनुमान
पिछले साल हिमाचल में करीब 7 लाख टन सेब का उत्पादन हुआ था। इस साल उत्पादन 3.5 से 3.75 लाख टन रहने का अनुमान है। हालांकि हिमाचल प्रदेश बागवानी विभाग के निदेशक डॉ. सतीश कुमार शर्मा के मुताबिक सीजन अभी खत्म नहीं हुआ है। अंतिम आंकड़े आने तक उत्पादन में अंतर कुछ कम हो सकता है।

मंडी मध्यस्थता योजना के तहत भी पिछले साल की तुलना में सेब की खरीद कम हुई है। पिछले सीजन में इस अवधि तक करीब 49 हजार मीट्रिक टन सेब खरीदा गया था, जबकि इस साल यह आंकड़ा करीब 32 हजार मीट्रिक टन है।

कम आवक से बढ़ सकते हैं सेब के भाव
सेब की आवक कम होने से बाजार में आपूर्ति घट सकती है, जिसका असर कीमतों पर पड़ सकता है। हालांकि खुदरा भाव केवल उत्पादन पर निर्भर नहीं करेंगे। मांग, मंडियों में रोजाना आवक और दूसरे राज्यों से आने वाले सेब भी कीमत तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

हिमाचल की अर्थव्यवस्था में सेब बागवानी की बड़ी भूमिका है। करीब 5,000 करोड़ रुपये की सेब आधारित अर्थव्यवस्था पर उत्पादन में गिरावट का असर पड़ सकता है। इसका प्रभाव सिर्फ बागवानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सेब की ढुलाई, पैकिंग, मजदूरी और मंडी कारोबार से जुड़े लोगों पर भी पड़ सकता है।

जम्मू-कश्मीर में भी उत्पादन पर मौसम की मार
हिमाचल के साथ जम्मू-कश्मीर में भी सेब उत्पादन में बड़ी गिरावट की बात सामने आई है। वहां इस सीजन उत्पादन करीब 40 फीसदी तक घटने का अनुमान है। इससे उत्तर भारत के सेब बाजार में कुल आपूर्ति पर असर पड़ने की संभावना है।

जलवायु परिवर्तन बनी बड़ी चुनौती
बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी के अनुसार, बदलते मौसम में सेब उत्पादन बढ़ाने के लिए हाई डेंसिटी पौधरोपण, आधुनिक तकनीक और नए रूटस्टॉक अपनाना जरूरी है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन को सेब उत्पादन में गिरावट का बड़ा कारण बताया।

सेब बागवानों के लिए बदलता मौसम अब केवल एक सीजन की चुनौती नहीं रह गया है। सर्दियों में कम बर्फबारी, बारिश का समय बदलना, ओलावृष्टि और तापमान में असमानता सीधे फूल, फल बनने और फसल की गुणवत्ता को प्रभावित कर रही है।
 
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