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FAO ने जारी किए नए आंकड़े: सितंबर में वैश्विक खाद्य कीमतें बढ़ीं, चीनी और गेहूं के दाम में तेज उछाल

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sat, 03 Oct 2026 11:50 AM IST
सार

  • सितंबर में FAO खाद्य मूल्य सूचकांक 1.5% बढ़कर 136 अंक हुआ।
  • चीनी मूल्य सूचकांक 6.1% बढ़ा, एक साल में 14.7% की तेजी।
  • गेहूं की वैश्विक कीमतों में 6.3% उछाल, अगस्त 2023 के बाद सबसे ऊंचा स्तर।
  • मक्के के दाम 5.6% बढ़कर तीन साल से ज्यादा के उच्च स्तर पर पहुंचे।

खाद्य महंगाई बढ़ी
खाद्य महंगाई बढ़ी - फोटो : AI Image
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विस्तार
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दुनियाभर में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में सितंबर 2026 में बढ़ोतरी दर्ज की गई। खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के मुताबिक, सितंबर में वैश्विक खाद्य मूल्य सूचकांक औसतन 136.0 अंक रहा। यह अगस्त के संशोधित स्तर से 2 अंक यानी 1.5 फीसदी अधिक है। FAO के अनुसार, अनाज, वनस्पति तेल और चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। वहीं डेयरी उत्पादों की कीमतें लगभग स्थिर रहीं। सितंबर का खाद्य मूल्य सूचकांक पिछले साल के इसी महीने की तुलना में 5.8 फीसदी अधिक रहा। हालांकि, यह मार्च 2022 के रिकॉर्ड उच्च स्तर से अभी भी 15.1 फीसदी नीचे है।

चीनी की कीमतों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी
सितंबर में चीनी मूल्य सूचकांक में सबसे तेज बढ़ोतरी हुई। यह अगस्त के मुकाबले 6.1 फीसदी बढ़कर 114.0 अंक पर पहुंच गया। एक साल पहले की तुलना में इसमें 14.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यह लगातार तीसरा महीना है, जब चीनी की कीमतें बढ़ी हैं। FAO के मुताबिक, चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी की बड़ी वजह 2026-27 सीजन में वैश्विक आपूर्ति कम होने की आशंका है।

यूरोपीय संघ में कम बुवाई क्षेत्र और खराब मौसम के कारण चुकंदर का उत्पादन घटने की संभावना है। वहीं, थाईलैंड में भी उत्पादन कम रहने का अनुमान है। भारत में सामान्य से कम बारिश और मजबूत होते अल नीनो के कारण गन्ने की फसल को लेकर चिंता बढ़ी है। ब्राजील के प्रमुख मध्य-दक्षिण क्षेत्र में भारी बारिश के कारण गन्ने की कटाई धीमी हुई है। इससे भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमतों पर दबाव बढ़ा।

गेहूं की कीमतें दो साल के उच्च स्तर पर
सितंबर में FAO अनाज मूल्य सूचकांक 122.8 अंक रहा। यह अगस्त की तुलना में 5.1 फीसदी और सितंबर 2025 की तुलना में 17.2 फीसदी अधिक है। इस दौरान वैश्विक गेहूं की कीमतों में 6.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। गेहूं के दाम अगस्त 2023 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए। FAO ने इसके लिए काला सागर क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स संबंधी दिक्कतों को प्रमुख कारण बताया। इसके चलते कुछ आयातकों को दूसरे देशों से गेहूं खरीदना पड़ा। उत्तरी अमेरिका के कुछ हिस्सों में सर्दियों के गेहूं की बुवाई से पहले सूखे मौसम ने भी कीमतों को सहारा दिया।

मक्का और ज्वार भी महंगे हुए
सितंबर में मक्के की कीमत 5.6 फीसदी बढ़ी और यह तीन साल से ज्यादा समय के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। अमेरिका में उम्मीद से कम उत्पादन, ब्राजील में निर्यात के लिए कम उपलब्धता और काला सागर क्षेत्र में व्यापार संबंधी दिक्कतों का असर मक्के की कीमतों पर पड़ा।

ज्वार की कीमत 13.7 फीसदी और जौ की कीमत 3.9 फीसदी बढ़ी। चीन और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता के बाद चीन की ओर से ज्वार की खरीद बढ़ने की उम्मीद ने भी कीमतों को मजबूती दी। मौसम संबंधी चिंता और बाजार में मौसमी रूप से कम उपलब्धता के कारण इंडिका चावल की कीमतें भी बढ़ीं। इससे सितंबर में FAO का चावल मूल्य सूचकांक 1.4 फीसदी बढ़ा।

वनस्पति तेल भी हुआ महंगा
सितंबर में FAO का वनस्पति तेल मूल्य सूचकांक 198.6 अंक रहा। यह अगस्त की तुलना में 0.9 फीसदी और पिछले साल की तुलना में 18.3 फीसदी अधिक है। पाम तेल की कीमतों में लगातार चौथे महीने बढ़ोतरी हुई। इसकी वजह मजबूत आयात मांग और दक्षिण-पूर्व एशिया में सूखे की आशंका रही।

दूसरी ओर, सूरजमुखी तेल की कीमतों में लगातार तीसरे महीने गिरावट आई। काला सागर क्षेत्र से पर्याप्त आपूर्ति की उम्मीद इसका प्रमुख कारण रही। हालांकि, लॉजिस्टिक्स संबंधी दिक्कतों ने कीमतों में गिरावट को सीमित किया। सोया तेल की कीमतों में बहुत कम बदलाव हुआ, लेकिन जैव ईंधन की मजबूत मांग के कारण इसकी कीमत पिछले साल के मुकाबले काफी अधिक बनी रही।

डेयरी कीमतें लगभग स्थिर
सितंबर में FAO डेयरी मूल्य सूचकांक 119.1 अंक रहा। यह अगस्त से सिर्फ 0.1 फीसदी कम है। हालांकि, पिछले साल की तुलना में यह सूचकांक 19.1 फीसदी नीचे रहा। पनीर की कीमतों में गिरावट की भरपाई लगभग पूरी तरह मिल्क पाउडर की बढ़ी कीमतों से हो गई। स्किम्ड मिल्क पाउडर की कीमत पिछले साल की तुलना में 33.1 फीसदी अधिक रही। एशिया में मांग बनी रहने और सीमित आपूर्ति से इसकी कीमतों को सहारा मिला। मक्खन की कीमतों में मामूली बदलाव हुआ।
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