विज्ञापन
Home› Khabar Junction› Icar Cmfri Clam Stock Enhancement Experiment Support Fishermen Livelihood Large Production 5 Tonnes Of Seed

ICAR-CMFRI: मछुआरों की आजीविका को सहारा देगा क्लैम स्टॉक बढ़ाने का प्रयोग, 5 टन बीज से बड़ा उत्पादन

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sat, 03 Oct 2026 12:38 PM IST
सार

  • वेम्बनाड झील में 5 टन क्लैम बीज एक हेक्टेयर क्षेत्र में डाला गया।
  • 12 महीने बाद उत्पादन शुरुआती मात्रा से 7-8 गुना रहा।
  • एक हेक्टेयर क्षेत्र से करीब 40 टन उत्पादन की उम्मीद।
  • क्लैम की 80-90 फीसदी जीवित रहने की दर रही।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

केरल की वेम्बनाड झील में काले क्लैम (सीप जैसी जलीय प्रजाति) के संरक्षण और उत्पादन बढ़ाने की पहल को बड़ी सफलता मिली है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (ICAR-CMFRI) की परियोजना में डाले गए क्लैम बीज की मात्रा से करीब 7 से 8 गुना अधिक उत्पादन मिला है। इससे झील में घट रहे क्लैम संसाधन को दोबारा बढ़ाने और मछुआरा परिवारों की आय को सहारा देने की उम्मीद जगी है।

अलाप्पुझा जिले के वडक्कुमकरा में एक हेक्टेयर क्षेत्र में पिछले साल सितंबर में 5 टन काले क्लैम के बीज डाले गए थे। करीब 12 महीने तक पालन के बाद इनकी कटाई की गई। इस दौरान क्लैम की अच्छी बढ़वार देखी गई और इनकी जीवित रहने की दर करीब 80 से 90 फीसदी रही। एक हेक्टेयर क्षेत्र से करीब 40 टन क्लैम उत्पादन होने का अनुमान है। संस्थान के अनुसार, यह परिणाम वैज्ञानिक तरीके से क्लैम के स्टॉक को बढ़ाने की क्षमता को दिखाता है।

भारत के क्लैम संसाधन में 80 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी
काला क्लैम, जिसे वैज्ञानिक नाम Villorita cyprinoides से जाना जाता है, वेम्बनाड झील की प्रमुख मत्स्य प्रजातियों में शामिल है। भारत के कुल क्लैम संसाधन में इसका हिस्सा 80 फीसदी से अधिक बताया जाता है। इससे सीधे तौर पर 6,000 से अधिक परिवारों की आजीविका जुड़ी है। वहीं, क्लैम मछली पकड़ने से जुड़ी ढुलाई, प्रसंस्करण और अन्य गतिविधियों से करीब इससे दोगुनी संख्या में लोग जुड़े हुए हैं।

18 साल में करीब 40 फीसदी घटा क्लैम उत्पादन
वेम्बनाड झील में क्लैम संसाधन लगातार घट रहा है। इसके पीछे अत्यधिक दोहन और पर्यावरण में हो रहे बदलाव प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। ICAR-CMFRI के अनुमान के अनुसार, क्षेत्र में काले क्लैम की पकड़ 2006 में 75,592 टन के उच्चतम स्तर पर थी। 2024 में यह घटकर 45,601 टन रह गई। यानी इस अवधि में पकड़ में करीब 40 फीसदी की कमी आई।

एससी समुदाय को 100 फीसदी सब्सिडी
यह परियोजना केंद्र सरकार की अनुसूचित जाति उप-योजना (SCSP) के तहत अनुसूचित जाति समुदायों के लिए 100 फीसदी सब्सिडी पर लागू की गई। परियोजना में तकनीकी मार्गदर्शन ICAR-CMFRI ने दिया, जबकि थैकट्टुस्सेरी ब्लैक क्लैम को-ऑपरेटिव सोसाइटी ने सहयोग किया।

ICAR-CMFRI के निदेशक ग्रिंसन जॉर्ज ने कहा कि वैज्ञानिक तरीके से क्लैम के स्टॉक को बढ़ाने की यह पहल घटते संसाधन को दोबारा बढ़ाने के साथ मछुआरा समुदायों को लंबे समय तक आजीविका का सहारा दे सकती है। परियोजना की समन्वयक और CMFRI की वरिष्ठ वैज्ञानिक विद्या आर. ने कहा कि इसका सफल परिणाम दिखाता है कि वैज्ञानिक हस्तक्षेप के जरिए प्राकृतिक संसाधनों की बहाली, पारिस्थितिकी तंत्र में सुधार और स्थानीय समुदायों की आजीविका को एक साथ मजबूत किया जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन