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केसर उत्पादन में भारत को बड़ी सफलता : लद्दाख में मात्र 30 दिनों में खिले केसर के फूल, कश्मीर को मिलेगी टक्कर?

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Tue, 03 Nov 2026 01:25 PM IST
सार

  • लद्दाख की बर्फीली पहाड़ियों में केसर की खेती का सफल प्रयोग।
  • प्रोजेक्ट हिम सरोवर के तहत 4,000 वर्ग मीटर जमीन पर की गई खेती।
  • रोपण के महज 30 दिनों में खिलने लगे केसर के फूल।
  • शुरुआती चार दिनों में करीब 22 ग्राम शुद्ध केसर का उत्पादन।
  • प्रयोग में ईरान की उन्नत किस्म के 90 हजार केसर कंद लगाए गए।
  • सफलता से लद्दाख में केसर उत्पादन का नया केंद्र बनने की उम्मीद।

लद्दाख की पहाडियों पर केसर की खेती का सफल प्रयोग।
लद्दाख की पहाडियों पर केसर की खेती का सफल प्रयोग। - फोटो : AI Image
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विस्तार
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केसर शब्द सुनकर दिमाग में कश्मीर का नाम जरूर आता है, क्योंकि भारत के कुल केसर उत्पादन में घाटी सबसे ज्यादा योगदान देती है। हालांकि अब भारत को केसर उत्पादन का नया हब मिल सकता है। दरअसल लद्दाख की बर्फीली और बंजर पहाड़ियों में केसर की खेती का प्रयोग सफल साबित हुआ है। कृषि वैज्ञानिकों की देखरेख में खराब जमीन को उपजाऊ बनाकर प्रोजेक्ट हिम सरोवर के तहत एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया था।

केसर की कंदों का तेज विकास, 2 महीने का इंतजार 30 दिन में पूरा
इस प्रोजेक्ट के तहत करीब चार हजार वर्ग मीटर जमीन पर केसर लगाया गया है। सबसे खास बात यह है कि आमतौर पर केसर में फूल आने में दो महीने लगते हैं, लेकिन लद्दाख के इस वातावरण में मात्र 30 दिनों के भीतर ही केसर के फूल खिलने लगे हैं। 1 अक्तूबर को रोपण के बाद इतनी जल्दी फूल आना वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ी सफलता है।

रोजाना खिल रहे हैं 20 से 25 फूल
परियोजना से जुड़े वैज्ञानिकों के अनुसार, खेत में रोजाना औसतन 20 से 25 फूल खिल रहे हैं और बीते सोमवार को एक ही दिन में 72 फूल खिले। शुरुआती चार दिनों में ही करीब 22 ग्राम शुद्ध केसर इकट्ठा कर लिया गया है। इस प्रयोग में ईरान की उन्नत किस्म के करीब 90 हजार केसर कंद (लगभग 800 किलोग्राम) लगाए गए हैं।

देश में केसर उत्पादन का नया केंद्र बनने की संभावना
वर्तमान में भारत का लगभग 90 प्रतिशत केसर जम्मू-कश्मीर में पैदा होता है। लद्दाख में मिली इस कामयाबी से यह क्षेत्र केसर उत्पादन के नए केंद्र के रूप में उभर सकता है। यह पहल स्थानीय स्तर पर खेती में विविधता लाने और लद्दाख की अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।


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