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Maharashtra Sugarcane Crushing Season Set Begin Amid Rain Shortage Sugar Mills Instructed Conserve Water
महाराष्ट्र : बारिश की कमी के बीच गन्ना पेराई सत्र की तैयारी, चीनी मिलों को पानी बचाने के निर्देश
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Fri, 09 Oct 2026 06:48 PM IST
सार
महाराष्ट्र के कोल्हापुर में चीनी मिलों को पानी बचाने और इस्तेमाल किए गए पानी का दोबारा उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। किसानों को गन्ने की सूखी पत्तियां नहीं जलाने और कम पानी वाली चारा फसलें अपनाने के लिए भी जागरूक किया जाएगा।
इस साल सामान्य से कम बारिश होने के कारण महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में आगामी गन्ना पेराई सत्र से पहले पानी बचाने और पशुओं के चारे का इंतजाम करने पर जोर दिया जा रहा है। कोल्हापुर के जिलाधिकारी डॉ. विजय राठौड़ ने चीनी मिलों को पानी का इस्तेमाल सावधानी से करने, मिलों में इस्तेमाल हुए पानी को दोबारा उपयोग में लाने और कम पानी में होने वाली चारा फसलों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने किसानों को खेती के ऐसे तरीके अपनाने के लिए भी जागरूक करने को कहा है, जिनसे पानी और मिट्टी दोनों को फायदा हो।
कम पानी में उगने वाली चारा फसलों को बढ़ावा दें
जिलाधिकारी ने कलेक्टर कार्यालय के शाहूजी हॉल में आयोजित बैठक में गन्ना पेराई सत्र की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि बारिश की कमी को देखते हुए पशुओं के चारे की संभावित कमी से निपटने के लिए अभी से तैयारी करनी होगी। चीनी मिलें किसानों को कम पानी में उगने वाली चारा फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करें। साथ ही, किसानों को समय पर बीज उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जाए, ताकि चारे की कमी से बचा जा सके।
मिलों में इस्तेमाल हुए पानी का दोबारा करें उपयोग
डॉ. राठौड़ ने चीनी मिलों को पानी की उपलब्धता के अनुसार उपयोग की विस्तृत योजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मिलों में कामकाज के दौरान इस्तेमाल होने वाले पानी को दोबारा उपयोग में लाने के प्रभावी उपाय किए जाएं। उपलब्ध जल स्रोतों को बचाना और पानी का सही इस्तेमाल करना आगामी पेराई सत्र के दौरान बेहद जरूरी होगा। उन्होंने चीनी मिलों और संबंधित विभागों से पानी बचाने के उपायों को प्राथमिकता देने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने की अपील की।
गन्ने की सूखी पत्तियां जलाने से बचें किसान
जिलाधिकारी ने गन्ना किसानों को कटाई के बाद खेतों में बची सूखी पत्तियों और दूसरे अवशेषों को जलाने के बजाय खेत में ही छोड़ने के लिए जागरूक करने को कहा। खेत में गन्ने के अवशेष छोड़ने से मिट्टी की नमी बनाए रखने में मदद मिलती है। इससे मिट्टी में जैविक कार्बन भी बढ़ता है और उसकी सेहत बेहतर होती है।
उन्होंने चीनी मिलों को किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी पहुंचाने के निर्देश दिए। ऐसी तकनीकों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया, जिनसे कम पानी में खेती की जा सके और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो।
मजदूरों के समझौतों और तौल कांटों की भी होगी निगरानी
बैठक में चीनी मिलों से जुड़े श्रमिक समझौतों की निगरानी और तौल कांटों के निरीक्षण का मुद्दा भी उठाया गया। जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को इन व्यवस्थाओं पर नजर रखने के निर्देश दिए, ताकि पेराई सत्र के दौरान कामकाज सुचारु रूप से चल सके।
बैठक में चीनी विभाग की संयुक्त निदेशक उज्ज्वला पलास्कर, निवासी उपजिलाधिकारी गजानन गुरव, कृषि उपनिदेशक नामदेव पारित, समाज कल्याण सहायक आयुक्त सचिन साले, पशुपालन उपायुक्त डॉ. प्रमोद बाबर और जिले की चीनी मिलों के अधिकारी शामिल हुए। डॉ. राठौड़ ने कहा कि आगामी पेराई सत्र को सुचारु रूप से चलाने के लिए जिला प्रशासन और चीनी मिलों को मिलकर काम करना होगा। कम बारिश की स्थिति में पानी का समझदारी से इस्तेमाल, चारे की उपलब्धता और पर्यावरण के अनुकूल खेती पर ध्यान देना जरूरी है।
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