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महाराष्ट्र : सूखे की मार से सोयाबीन-कपास बर्बाद, किसानों ने मांगी ₹1 लाख प्रति हेक्टेयर राहत

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Wed, 23 Sep 2026 02:54 PM IST
सार

  • यवतमाल की पुसद तहसील में सोयाबीन और कपास को भारी नुकसान
  • किसानों ने ₹1 लाख प्रति हेक्टेयर राहत की मांग की
  • सोयाबीन की खेती में ₹20-25 हजार प्रति एकड़ खर्च, उत्पादन पर संकट
  • खेतों में काम घटने से मजदूरों का दूसरे शहरों की ओर पलायन

यवतमाल में सूखे की मार, सोयाबीन-कपास बर्बाद
यवतमाल में सूखे की मार, सोयाबीन-कपास बर्बाद - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में बारिश की कमी से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। खासकर पुसद तहसील में सोयाबीन और कपास की फसल को भारी नुकसान हुआ है। सितंबर में ही सूखे जैसे हालात बनने से किसान आने वाले महीनों में पानी और पशुओं के चारे की कमी को लेकर चिंतित हैं। किसानों ने सरकार से फसल नुकसान का सर्वे कराकर जल्द राहत देने की मांग की है।

तीन साल से फसल नुकसान झेल रहे किसान
किसान मनीष जाधव ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि पिछले तीन साल से लगातार फसल खराब होने के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है। उन्होंने कहा कि सोयाबीन और कपास की फसल बर्बाद हो गई है। खेती में काम कम होने से किसान और खेत मजदूर रोजगार की तलाश में दूसरे इलाकों में जा रहे हैं।

जाधव ने सरकार से बिना कड़ी शर्तों के प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपये की मदद और फसल बीमा का लाभ देने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर सूखा जारी रहा तो पानी और पशुओं के चारे की समस्या भी बढ़ सकती है।

सोयाबीन की खेती में 20-25 हजार रुपये खर्च
किसान दुर्गादास राठौड़ के मुताबिक, सोयाबीन की खेती में एक एकड़ पर करीब 20 से 25 हजार रुपये खर्च हुए हैं। लेकिन फसल को इतना नुकसान हुआ है कि उत्पादन मिलना भी मुश्किल है। उन्होंने सरकार से किसानों को मुआवजा देने की मांग की।

खेतों में काम नहीं, मजदूरों का पलायन
सूखे का असर खेत मजदूरों पर भी पड़ रहा है। किसान सचिन साखरे ने बताया कि खेतों में काम कम होने के कारण ग्रामीण परिवार रोजगार की तलाश में शहरों और औद्योगिक इलाकों की ओर जा रहे हैं। कई परिवार पुणे, मुंबई और पश्चिमी महाराष्ट्र का रुख कर रहे हैं। लगातार फसल नुकसान से किसानों के सामने घर का खर्च चलाने, बच्चों की पढ़ाई, इलाज और पशुओं की देखभाल जैसी चुनौतियां बढ़ गई हैं।

1972 जैसे सूखे की आशंका जता रहे किसान
किसानों का कहना है कि पिछले तीन साल में कभी ज्यादा बारिश तो कभी लंबे समय तक बारिश न होने से फसलों को नुकसान हुआ है। सितंबर में ही सूखे की गंभीर स्थिति बनने से कुछ किसान इसकी तुलना 1972 के भीषण सूखे से कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर आगे भी बारिश नहीं हुई तो संकट और बढ़ सकता है। किसान आदित्य जाधव ने प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप कर प्रभावित परिवारों को राहत देने की मांग की है।

सरकार ने राहत के कदम उठाने की बात कही
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में सूखे जैसे हालात से निपटने के लिए राहत की तैयारी शुरू की है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि चंद्रशेखर बावनकुले की अध्यक्षता वाली मंत्रिमंडलीय उपसमिति राहत से जुड़े फैसले लेगी।

सरकार के अनुसार, प्रभावित इलाकों में बुधवार से फसल नुकसान का पंचनामा शुरू किया जाएगा। राज्य सरकार केंद्र से मदद का इंतजार किए बिना सहायता देने की दिशा में काम करेगी। इसके साथ ही पीने के पानी और पशुओं के चारे की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

सरकार ने अगले सात से आठ महीनों की जरूरत को ध्यान में रखकर तैयारी करने की बात कही है। यवतमाल समेत प्रभावित इलाकों में सोयाबीन, कपास और मक्का को प्रमुख रूप से नुकसान पहुंचने की जानकारी दी गई है।
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