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Animal Husbandry: गाय-भैंस में 28 से 35 दिन में पता चलेगा गर्भ, 10 मिनट में जांच करेगी यह किट

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Wed, 23 Sep 2026 02:34 PM IST
सार

  • गाय, भैंस, भेड़ और बकरी में शुरुआती गर्भ की जांच
  • 28 से 35 दिन में गर्भ का पता लगाने का दावा
  • 10 मिनट से भी कम समय में पूरी हो सकती है जांच
  • 27 हजार से ज्यादा पशुओं पर इस्तेमाल की जा चुकी है किट

गाय और भैंस
गाय और भैंस - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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डेयरी किसानों के लिए पशुओं में गर्भ ठहरने की जल्दी जानकारी मिलना काफी उपयोगी हो सकता है। गुजरात की स्टार्टअप कंपनी बिग नैनो वेंचर्स ने गाय, भैंस, भेड़ और बकरी में शुरुआती गर्भ की जांच के लिए एक किट तैयार की है। कंपनी के अनुसार, इस किट से करीब 28 से 35 दिन में गर्भ का पता लगाया जा सकता है और जांच में 10 मिनट से भी कम समय लगता है।

स्टार्टअप की संस्थापक कोमल कलंत्री के मुताबिक, यह किट पशुओं के लिए दर्द रहित है और किसान आसानी से इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। समय पर गर्भ की जानकारी मिलने से किसान पशु की बेहतर देखभाल और अपने डेयरी कारोबार की योजना बना सकते हैं। इससे गर्भ में पल रहे बच्चे और बाद में पैदा होने वाले बछड़े या बच्चे की देखभाल में भी मदद मिल सकती है।

27 हजार से ज्यादा पशुओं में इस्तेमाल
कंपनी के मुताबिक, इस किट का इस्तेमाल अब तक 27 हजार से ज्यादा पशुओं पर किया जा चुका है। पशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम के लिए स्टार्टअप को राष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिला है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्टार्टअप के काम के लिए इसे सम्मानित किया है।

आणंद एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी से जुड़े एआईसी आणंद फाउंडेशन के सीईओ निकुंज सोनी ने बताया कि स्टार्टअप को राष्ट्रीय सम्मान के लिए राष्ट्रपति भवन बुलाया गया था। उन्होंने कहा कि गाय और भैंस में गर्भ का जल्दी पता चलने से किसानों को समय पर जानकारी मिलती है। इससे पशुओं की देखभाल और डेयरी से जुड़े फैसले लेने में मदद मिल सकती है।

पशु जांच में नई तकनीक पर काम
कोमल कलंत्री ने बताया कि इस तकनीक को विकसित करने का विचार पशुओं की जांच में मौजूद एक कमी को देखकर आया। आणंद कृषि विश्वविद्यालय के इनक्यूबेशन सेंटर से स्टार्टअप को शोध और तकनीक को जांचने में मदद मिली। विश्वविद्यालय ने मार्गदर्शन और आर्थिक सहायता भी दी। इसके अलावा सरकारी कृषि केंद्रों के साथ संपर्क बनाने और तकनीक के परीक्षण में भी सहयोग मिला।

आणंद कृषि विश्वविद्यालय में कृषि, डेयरी और इससे जुड़े क्षेत्रों में नए कारोबार को बढ़ावा देने के लिए एआईसी आणंद फाउंडेशन काम करता है। इसके जरिए अब तक 80 से ज्यादा कृषि स्टार्टअप को मदद मिल चुकी है।

उद्यमिता में महिलाओं की भागीदारी
आणंद कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एम.पी. पटेल के अनुसार, विश्वविद्यालय के उद्यमिता कार्यक्रमों में महिलाओं की भागीदारी लगातार रही है। उन्होंने बताया कि 1948 से चल रहे इस कार्यक्रम में चुने गए नवाचार करने वालों में 52 प्रतिशत महिलाएं रही हैं।

यह शुरुआती गर्भ जांच तकनीक डेयरी किसानों को पशुओं में गर्भ की स्थिति की समय पर जानकारी देने में मदद कर सकती है। इससे पशुओं की देखभाल, झुंड का प्रबंधन और डेयरी की उत्पादकता बेहतर करने के लिए समय पर फैसले लेने में मदद मिल सकती है।
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