गुजरात में अब तक 63.35 लाख से ज्यादा किसान Farmer Registry में पंजीकृत हो चुके हैं। इस रजिस्ट्री में किसान की आधार आधारित पहचान को उसके सत्यापित जमीन के रिकॉर्ड से जोड़ा जा रहा है। इसका उद्देश्य किसानों को सरकारी कृषि योजनाओं और सेवाओं का लाभ लेने के लिए बार-बार पहचान और जमीन के दस्तावेज जमा करने की जरूरत को कम करना है।
यह व्यवस्था केंद्र सरकार के डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन (DAM) के तहत लागू की जा रही है। पंजीकरण और जमीन के रिकॉर्ड का सत्यापन पूरा होने के बाद किसान को Unique Farmer ID यानी विशिष्ट किसान पहचान संख्या दी जाएगी।
एक आईडी से कई योजनाओं का लाभ
गुजरात की अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) डॉ. जयंती रवि ने बताया कि राज्य में 63.35 लाख से ज्यादा किसानों का पंजीकरण हो चुका है और प्रक्रिया अभी जारी है। किसान की डिजिटल पहचान को जमीन के रिकॉर्ड से जोड़ने से सरकारी योजनाओं में लाभार्थी की पहचान और सत्यापन आसान हो सकता है। Farmer ID का इस्तेमाल पीएम-किसान, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सरकारी खरीद, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), कृषि ऋण और विभिन्न सब्सिडी व कृषि सहायता योजनाओं में किया जा सकता है।
बार-बार दस्तावेज देने की जरूरत होगी कम
कृषि मंत्री जीतूभाई वाघाणी के अनुसार, Farmer Registry से सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की प्रक्रिया आसान हो सकती है। किसान का पंजीकरण और सत्यापन पूरा होने के बाद उसकी पहचान और जमीन का रिकॉर्ड डिजिटल रूप से जुड़ जाएगा। इससे आवेदन और लाभार्थी के सत्यापन में लगने वाला समय कम करने में मदद मिल सकती है।
ऐसे करा सकते हैं पंजीकरण
किसान Gujarat Farmer Registry Portal के जरिए ऑनलाइन पंजीकरण करा सकते हैं। इसके लिए आधार का सत्यापन और किसान की जमीन से जुड़ी जानकारी की जांच की जाती है। जानकारी सही पाए जाने पर किसान को Unique Farmer ID जारी की जाती है।
अगर पंजीकरण के दौरान जमीन का कोई सर्वे नंबर छूट जाता है, तो किसान Update Farmer Request (UFR) सुविधा के जरिए रिकॉर्ड में सुधार करा सकते हैं। पंजीकरण की सुविधा ऑनलाइन के अलावा ग्राम पंचायत कार्यालय, VCE, ग्राम सेवक और कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से भी उपलब्ध है।
आगे इन सेवाओं से जुड़ सकता है Farmer ID
राज्य सरकार Farmer Registry को कृषि सेवाओं के लिए एक साझा डिजिटल व्यवस्था के रूप में विकसित करना चाहती है। आगे इसे डिजिटल फसल सर्वे, बीज और खाद जैसे कृषि इनपुट, सरकारी खरीद, कृषि ऋण और कृषि सलाह जैसी सेवाओं से जोड़ा जा सकता है।
किसान, जमीन और फसल से जुड़ी जानकारी एक जगह उपलब्ध होने पर सरकार को जरूरत के अनुसार योजनाओं का लाभ पहुंचाने में मदद मिल सकती है। भविष्य में इसी डिजिटल व्यवस्था के जरिए व्यक्तिगत कृषि सलाह और एआई आधारित खेती संबंधी सेवाएं देने की संभावनाएं भी हैं।
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