महाराष्ट्र में सूखे की मार झेलने वाले किसानों के लिए एक खास पहल शुरू की गई है। जालना जिले में प्रशासन ने कम बारिश की वजह से फसल नुकसान से प्रभावित किसानों के लिए शेतकरी संवाद सभा शुरू की है। इस पहल के तहत पूरे जिले में तीन सदस्यों वाली टीमें तैनात की गई हैं, जो किसानों की समस्या सुनने के साथ उन्हें हिम्मत और सलाह देने काम कर रही हैं।
दूसरी तरफ स्थानीय किसान संवाद के बजाय पेयजल-चारे की कमी और कर्ज के मोर्चे पर राहत को प्राथमिकता देने की बात कह रहे हैं।
900 गांवों और 6 लाख किसानों तक पहुंचने का लक्ष्य
इस पहल के तहत बनी तीन सदस्यीय टीम में एक कृषि सहायक, एक तलाठी और एक पुलिस पाटिल शामिल हैं। ये टीमें गांव के सरपंच की मौजूदगी में किसानों के साथ संवाद करती हैं। हर बैठक एक घंटे से अधिक समय तक चलती है। इस पहल को जिले के 900 गांवों के लगभग छह लाख किसानों तक पहुंचने का लक्ष्य तय किया है।
किसान आत्महत्या के मामलों में बढ़ोतरी का खतरा
मराठवाड़ा क्षेत्र में किसान आत्महत्या एक गंभीर चुनौती है। जनवरी से अब तक जालाना जिले में खेती-बाड़ी से जुड़े संकट और घरेलू समस्याओं के कारण 60 किसान आत्महत्या कर चुके हैं। इस खरीफ सूखे की मार को देखते हुए किसान आत्महत्या के मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में यह पहल प्रशासन के शब्दों में मानसिक तनाव कम करने के उद्देशय से शुरू की गई है।
अधिकारियों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य किसानों को अपना दुख-दर्द साझा करने का मौका देना है, जिससे किसानों का मानसिक तनाव हो सके। उन्होंने किसानों से आत्महत्या जैसे कदम उठाने से बचने और परेशानी होने पर प्रशासन से संपर्क करने की अपील की है। जिल कलेक्टर ने सभी गांवों में हर 15 दिन में यह सत्र आयोजित करने के निर्देश दिए हैं।
पानी, चारे और मवेशियों की बिक्री पर संकट
प्रशासन की इस पहल का स्वागत करते हुए भी किसानों ने अपनी गंभीर जमीनी समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया है। किसानों में अपने पशुओं के लिए चारे-पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता है। फसल को नुकसान पहुंचने की वजह से कर्ज वापस करना किसानों के लिए काफी चुनौती भरा हो गया है। किसानों ने सरकार को चारे और रोजगार की व्यवस्था करने की सालह दी है।