महाराष्ट्र में सूखे का आकलन करने के लिए पहुंची केंद्र सरकार की टीम के साथ सीएम देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को समीक्षा बैठक की। बैठक में सीएम ने केंद्र सरकार से राज्य के लिए वित्तीय सहायता बढ़ाने की मांग की। सीएम के अनुसार, महाराष्ट्र का कृषि क्षेत्र वर्तमान में बड़े संकट का सामना कर रहा है, जिसका असर आगामी रबी फसलों पर भी पड़ सकता है।
खरीफ के बाद रबी में भी किसानों के लिए चुनौती बरकरार
मानसून सीजन में कम बारिश की वजह से प्रदेश की 236 तहसीलों में सूखे का एलान हो चुका है। दूसरी तरफ प्रदेश सरकार ने उपलब्थ जल का सहेजने के लिए 31 अगस्त 2027 तक पीने के पानी को आरक्षित करने का फैसला लिया है। सरकार ने साफ किया है कि कृषि क्षेत्र को सिंचाई के लिए पानी तभी दिया जाएगा जब पेयजल, मवेशियों और चारे की जरूरतें पूरी हो जाएंगी। दूसरी तरफ साल 2027 तक अल नीनो का असर बने रहने के आसार हैं। यही कारण है कि खरीफ में सुस्त पड़ी महाराष्ट्र की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए रबी सीजन कोई बड़े सुधार की संभावना लाता नजर नहीं आ रहा है।
कपास और सोयाबीन उत्पादन में भारी गिरावट
केंद्रीय टीम ने अपने जमीनी दौरे के दौरान सामने आए हालात सीएम को बताए। टीम के निरीक्षण में सामने आया कि प्रदेश में कपास और सोयाबीन उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जबकि तुअर की फसल भी सूखे की जद में आई है। इसके अलावा, सूखे के चलते प्रदेस के जलस्रोतों पर भी खराब असर पड़ा है।
किसानों, खेत मजदूरों और पशुधन की सुरक्षा पर जोर
सीएम देवेंद्र फडणवीस के अनुसार, कृषि क्षेत्र में आए इस संकट को देखते हुए किसानों और खेत मजदूरों को हरसंभव सहायता दी जानी चाहिए। इसी कारण उन्होंने केंद्र सरकार से महाराष्ट्र को अतिरिक्त वित्तीय सहायता देने का अनुरोध किया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार ने पानी का आरक्षण किया है, जिसमें पीने के पानी और मवेशियों की जरूरतों को सबसे पहली प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर राज्य में कहीं भी पीने के पानी की कमी की स्थिति बनती है, तो सरकार एक बड़ी योजना तैयार करने के लिए पूरी तरह तैयार है। संकट के दौरान पशुधन की सुरक्षा को काफी अहम बताते हुए सीएम ने कहा कि हालात से निपटने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।
जल्द पेश की जाएगी अंतिम रिपोर्ट
मुख्यमंत्री ने राज्य का व्यापक दौरा करने के लिए केंद्रीय टीम का आभार व्यक्त किया। उन्होंने जानकारी दी कि राज्य सरकार द्वारा सूखे से जुड़ी एक प्रारंभिक रिपोर्ट पहले ही सौंपी जा चुकी है और इसकी अंतिम रिपोर्ट भी जल्द ही पेश कर दी जाएगी।मुख्यमंत्री के अनुसार, संकट से निपटने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए और इस मौजूदा चुनौती को एक अवसर में बदलने के प्रयास किए जाने चाहिए।