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साहूकारों की मनमानी पर महाराष्ट्र सरकार सख्त: 12 हजार साहूकारों के लिए नए आदेश जारी, जानें सब कुछ

गांव जंक्शन डेस्क, मुंबई Published by: Devesh Saraswat Updated Sun, 08 Jun 2025 11:47 AM IST
सार

महाराष्ट्र सरकार ने साहूकारों की मनमानी पर लगाम कसने के लिए नया आदेश जारी किया है। सहकारिता विभाग ने राज्य के 12,000 से ज्यादा निजी साहूकारों को निर्देश दिया है कि वे अपने लाइसेंस नंबर और कृषि ऋण पर वसूले जाने वाले ब्याज की दरें स्पष्ट रूप से अपने कार्यालय या दुकान के बाहर बोर्ड पर प्रदर्शित करें। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

साहूकारों के गोरखधंधे पर लगाम लगाने के उद्देश्य से महाराष्ट्र सरकार ने एक नया आदेश जारी किया है।
साहूकारों के गोरखधंधे पर लगाम लगाने के उद्देश्य से महाराष्ट्र सरकार ने एक नया आदेश जारी किया है। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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महाराष्ट्र में बीते सात से आठ सालों से हर साल किसानों की आत्महत्या के लगभग 2700 से 2800 मामले आते हैं। इन आत्महत्याओं में एक बड़ी भूमिका कृषि ऋण चुकाने में असमर्थता है। वहीं, महाराष्ट्र में निजी साहूकारों द्वारा कृषि ऋण पर अधिक ब्याज दर वसूलने और ऋण नहीं चुकाने पर किसानों की जमीन कब्जाने की शिकायतों में बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में राज्य सरकार ने इन साहूकारों के गोरखधंधे पर लगाम लगाने के उद्देश्य से एक नया आदेश जारी किया है।

निजी साहूकारों के लिए नए नियम 
महाराष्ट्र के सहकारिता विभाग ने 12 हजार से अधिक निजी साहूकारों को अपने-अपने लाइसेंस नंबर और कृषि ऋण पर लगाए जाने वाले ब्याज से जुडी जानकरी अपने दफ्तर या दुकान के बाहर बोर्ड पर लिखना अनिवार्य कर दिया है। इस आदेश को नहीं मानने वाले साहूकारों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। 

निजी साहूकार हर साल देते हैं एक हजार करोड़ का ऋण
महाराष्ट्र में निजी साहूकार की पहुंच बहुत अधिक है। प्रदेश के मनी लेंडिंग (रेगुलेशन) एक्ट 2014 के तहत 12 हजार से अधिक निजी साहूकार पंजीकृत हैं। ये पंजीकृत साहूकार किसानों और अन्य लोगों को हर साल एक हजार करोड़ रुपये तक का ऋण देते हैं। इस ऋण में कृषि और गैर-कृषि दोनों शामिल है।

कितनी है ब्याज दर 
अगर किसान अपनी जमीन गिरवी रखते हैं तो उन्हें 9 फीसदी के हिसाब से ब्याज देनी होती है। वहीं, बिना जमीन गिरवी रखे लिए गए ऋण पर उन्हें 12 फीसदी की ब्याज देनी पड़ती है। गैर-किसानों (जैसे मजदूर या छोटे दुकानदार) से किसानों से 3% ज़्यादा ब्याज लिया जाता है यानी अगर जमीन गिरवी हो तो 15 फीसदी  और बिना गिरवी के 18 फीसदी तक ब्याज देनी पड़ती है। 

किसानों के शोषण की शिकायतें 
इन नियमों के बाद भी राज्य सरकार को नियमित रूप से निजी साहूकारों द्वारा किसानों के शोषण की शिकायतें मिलती रही हैं, जो कथित तौर पर उनकी अशिक्षा का फायदा उठाकर उन्हें लूटते हैं। इसलिए, सहकारिता विभाग ने 2 जून को साहूकारों के लिए नए आदेश जारी किए हैं। 

15 जून तक का समय 
सहकारिता विभाग के प्रमुख सचिव प्रवीण दराडे के अनुसार, निजी साहूकारों को 15 जून से पहले अपने कार्यालयों के बाहर निर्धारित आकार के बोर्ड पर उधार दरें और लाइसेंस संख्या प्रदर्शित करने का आदेश दिया गया है। सहकारिता विभाग के उप जिला रजिस्ट्रार (डीडीआर) को उधारदाताओं द्वारा उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। 

उप जिला रजिस्ट्रार को करनी होगी रिपोर्ट तैयार 
उप जिला रजिस्ट्रार को अपने-अपने  जिलों में ऋण देने वालों द्वारा आदेश का पालन करने की रिपोर्ट फोटोग्राफिक साक्ष्य के साथ प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। विभाग के एक दूसरे अधिकारी के अनुसार, जब तक ऋणदाता नियमों का पालन नहीं करते, उनके डीडीआर लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं करेगा, जो हर साल अनिवार्य होता है। 

कर्ज न चुका पाने पर जमीन हड़पने की शिकायतें
एचटी की रिपोर्ट में विभाग के जुड़े एक दूसरे अधिकारी का हवाला देते हुए बताया गया कि लाइसेंस नहीं रखने वाले किसी भी व्यक्ति द्वारा ऋण देना अवैध है और अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। ऐसी संस्थाओं द्वारा भूमि हड़पने की शिकायतें मिल रही हैं, जब किसान अपने ऋण चुकाने में विफल रहते हैं। 2014 में अधिनियम लागू होने के बाद से, सरकार ने ऋणदाताओं द्वारा हड़पी गई 750 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि किसानों को वापस कर दी है। 

अवैध ऋणदाताओं पर लगाम लगाने का प्लान 
राज्य सरकार अवैध ऋणदाताओं के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए प्रशासन के निचले स्तर पर शक्ति सौंपने का काम भी कर रही है। अधिकारी के अनुसार, अवैध उधारदाताओं के खिलाफ शिकायतों का जायजा लेने के लिए सभी जिलों में कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक (एसपी) और डीडीआर की समितियां गठित की गई हैं। कलेक्टर और एसपी पर काम का बहुत बोझ है, इसलिए हम उनसे अपने डिप्टी जैसे कि अतिरिक्त कलेक्टर या अतिरिक्त एसपी को अधिकार सौंपने और उन्हें समितियों का हिस्सा बनाने के लिए कह रहे हैं। इससे हमें अवैध ऋणदाताओं के खिलाफ प्रभावी और त्वरित कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।"
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