विज्ञापन
Home› Khabar Junction› Low Rainfall Will Not Impact Wheat Sowing Better Irrigation Expected To Keep Acreage Stable Target Set For R

गेहूं बुवाई पर नहीं पड़ेगा कम बारिश का असर : बेहतर सिंचाई से स्थिर रकबे की उम्मीद, रिकॉर्ड उत्पादन का लक्ष्य

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Sun, 25 Oct 2026 12:29 PM IST
सार

  • कम मानसूनी बारिश के बावजूद रबी सीजन में गेहूं का रकबा स्थिर रहने की उम्मीद
  • सरकार ने 2026-27 में 12.1 करोड़ टन गेहूं उत्पादन का लक्ष्य रखा
  • पिछले फसल वर्ष में 12.07 करोड़ टन गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन
  • अक्टूबर की बारिश से उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में मिट्टी की नमी बेहतर हुई
  • गेहूं का एमएसपी बढ़कर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल हुआ

गेहूं के  स्थिर रकबे की उम्मीद।
गेहूं के स्थिर रकबे की उम्मीद। - फोटो : ai
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मानसूनी में कम बारिश और अल नीनो के खतरे के बावजूद चालू रबी सीजन में गेहूं की बुवाई का रकबा सामान्य और स्थिर रहने की उम्मीद है। ऐसे में गेहूं की बंपर उपज की संभावना है। सरकार ने 2026-27 फसल वर्ष में 12.1 करोड़ टन गेहूं उपज का लक्ष्य तय किया है। वहीं, पिछले फसल वर्ष में 12.07 करोड़ टन का रिकॉर्ड उत्पादन दर्ज किया गया था। सरकारी आंकडे बताते हैं कि साल 2025–26 में गेहूं की बुआई का कुल रकबा 3.36 करोड़ हेक्टेयर रहा था।

बेहतर सिंचाई सुविधा की वजह से रकबे पर ज्यादा असर नहीं
कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक एम. एल. जाट के अनुसार, प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में बेहतर सिंचाई सुविधाओं की उपलब्धता के कारण कम बारिश का बुआई पर बहुत ज्यादा असर पड़ने की आशंका नहीं है। देश के मुख्य गेहूं उत्पादक राज्यों में पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार और गुजरात शामिल हैं।

बारिश की स्थिति और मिट्टी की नमी
रिपोर्ट के अनुसार, जून से सितंबर तक मानसून की कुल बारिश सामान्य से 13 प्रतिशत कम रही। इस दौरान उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में 6 प्रतिशत और मध्य भारत में सामान्य से 3 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई।

इसके बाद अक्तूबर में हुई बारिश से उत्तर-पश्चिम के प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों, खासतौर से उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में मिट्टी की नमी बेहतर हुई है। लेकिन, अलग-अलग इलाकों में बारिश की स्थिति एक समान नहीं रही है। 1 से 14 अक्तूबर के बीच उत्तर-पश्चिमी इलाके में 12 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य (13.1 मिमी) से 9 प्रतिशत कम थी। वहीं मध्य भारत में 95 प्रतिशत की भारी कमी देखी गई, जहां सामान्य 37.3 मिमी के मुकाबले महज 1.9 मिमी पानी बरसा।

सरकारी गोदामों में पर्याप्त अनाज और एमएसपी में बढ़ोतरी
देश में गेहूं का मौजूदा भंडार भी मजबूत स्थिति में है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 16 सितंबर को केंद्रीय पूल में गेहूं का स्टॉक 4.74 करोड़ (47.44 मिलियन) टन था, जबकि तय बफर मानक के तहत 2.75 करोड़ (27.58 मिलियन) टन की ही आवश्यकता होती है। इस अतिरिक्त भंडार से सरकार को खाद्य सुरक्षा की जरूरतें पूरी करने, कल्याणकारी योजनाओं में अनाज देने और घरेलू बाजार में उपलब्धता बनाए रखने में आसानी होगी। हालांकि, अधिक स्टॉक होने से सीधे तौर पर कीमतें कम होने की गारंटी नहीं होती, क्योंकि भाव बाजार की मांग, खरीद लागत और सरकारी नीतियों पर भी निर्भर करते हैं।

इसके साथ ही, सरकार ने आगामी 2027–28 के विपणन सत्र के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ाकर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है, जो पिछले सत्र में 2,585 रुपये प्रति क्विंटल था। आने वाले महीनों में वास्तविक पैदावार कैसी रहेगी, यह पूरी तरह मौसम के मिजाज और खेतों में फसल के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा।


विज्ञापन
विज्ञापन