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अफीम किसानों के लिए लाइसेंस की शर्तें हुईं और सख्त : सरकार ने बढ़ाया उपज का कोटा, 2026-27 तक के आंकड़े सामने

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Sun, 25 Oct 2026 11:52 AM IST
सार

  • अफीम की खेती के लाइसेंस के लिए न्यूनतम पैदावार की शर्तें सख्त
  • अफीम की उपज का लक्ष्य 4.2 से बढ़ाकर 4.4 किलो प्रति हेक्टेयर कर दिया गया है
  • 2027-28 में लाइसेंस के लिए 5.9 किलो मॉर्फिन पैदावार जरूरी
  • बिना चीरा लगे डोडों की खेती के लिए 800 किलो उपज की शर्त बरकरार
  • वित्त मंत्रालय ने फसल वर्ष 2026-27 के लिए नई लाइसेंसिंग नीति जारी की

अफीम की खेती के लिए उपज की शर्त कड़ी हुई हैं।
अफीम की खेती के लिए उपज की शर्त कड़ी हुई हैं। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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सरकार ने अफीम की खेती का लाइसेंस जारी करने के लिए न्यूनतम उपज की शर्तों को और कड़ा कर दिया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, फसल वर्ष 2026-27 के लिए अफीम उगाने वाले किसानों को लाइसेंस की मुख्य पात्रता हासिल करने के लिए अफीम की न्यूनतम उपज का नया स्तर तय किया गया है। इसके अलावा आगामी सालों में भी खेती जारी रखने के लिए पैदावार के लक्ष्य को बढ़ा दिया गया है।

लाइसेंस के लिए पैदावार के नए नियम
वित्त मंत्रालय द्वारा 23 अक्टूबर को जारी तीन अधिसूचनाओं के अनुसार, 1 अक्टूबर 2026 से शुरू हुए फसल वर्ष के लिए सालाना लाइसेंसिंग नीति घोषित कर दी गई है।

नीति के अनुसार, अफीम गोंद उगाने वाले किसानों को मुख्य पात्रता श्रेणी में आने के लिए फसल वर्ष 2025-26 में प्रति हेक्टेयर न्यूनतम 4.4 किलो अपीम की पैदावार हासिल करना जरूरी है। पिछले वर्ष की नीति में यह सीमा 4.2 किलोग्राम थी। इसके अलावा, जिन किसानों को वर्ष 2027-28 में लाइसेंस की पात्रता हासिल करनी है, उन्हें फसल वर्ष 2026-27 में प्रति हेक्टेयर 5.9 किलोग्राम मॉर्फिन का उत्पादन करना होगा।

नीति के अनुसार, जो किसान बिना चीरा लगे डोडे (अन-लांस्ड स्ट्रॉ) के लिए पोस्ता की खेती करते हैं, उनके लिए चालू वर्ष की पात्रता उपज में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वर्ष 2025-26 के उत्पादन के आधार पर यह अनिवार्य उपज 800 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर पर ही बरकरार रखी गई है।

अफीम की खेती पर सरकारी नियंत्रण
सरकार के अनुसार, अफीम पोस्ता की खेती पूरी तरह से नियमों के तहत नियंत्रित होती है और इसके लिए लाइसेंस केंद्र सरकार की ओर से दिए जाते हैं। इस फसल से मिलने वाली अफीम और एल्कलॉइड्स का उपयोग दवाएं, खासतौर से दर्द निवारक दवाएं बनाने में किया जाता है। इस नीति के जरिए ही यह तय किया जाता है कि कौन खेती कर सकता है, कितनी जमीन पर खेती की जा सकती है और आने वाले वर्षों में पात्रता बनाए रखने के लिए किसानों को कितना उत्पादन देना होगा।


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