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कर्नाटक : गन्ने के रेट पर फंसा पेच! आर-पार के मूड में किसान, पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को लिया हिरासत में

गांव जंक्शन डेस्क, लखनऊ Published by: Devesh Saraswat Updated Thu, 05 Nov 2026 06:35 PM IST
सार

  • कर्नाटक के बेलगावी में चीनी मिल मालिकों ने गन्ने का दाम 3,600 रुपये प्रति टन तय किया।
  • पिछले सीजन के मुकाबले गन्ने के दाम में 50 रुपये प्रति टन की बढ़ोतरी हुई।
  • किसान संगठन 50 रुपये प्रति टन और बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
  • मांग पूरी कराने के लिए किसानों ने 'जेल भरो पदयात्रा' शुरू की।

गन्ना की कीमतों को लेकर बेलगावी में किसानों का प्रदर्शन बरकरार।
गन्ना की कीमतों को लेकर बेलगावी में किसानों का प्रदर्शन बरकरार। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कर्नाटक के बेलगावी जिले में गन्ने के दाम को लेकर पिछले एक हफ्ते से चल रहा किसानों का विरोध प्रदर्शन अभी थमा नहीं है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चीनी मिल मालिकों ने गन्ने का दाम 3,600 रुपये प्रति टन देने की घोषणा की है, जो पिछले सीजन की तुलना में लगभग 50 रुपये प्रति टन अधिक है। दूसरी तरफ किसान अभी भी अपना आंदोलन वापस लेने पर कोई पक्का फैसला नहीं ले पाए हैं।

किसानों ने शुरू की जेल भरो पदयात्रा
कुछ किसान संगठनों ने मिल मालिकों द्वारा तय की गई इस नई कीमत का विरोध किया है। किसानों की मांग है कि गन्ने के दाम में 50 रुपये प्रति टन का और इजाफा किया जाए। अपनी इसी मांग को मनवाने के लिए किसानों ने गुरुवार को 'जेल भरो पदयात्रा' शुरू कर दी। इस पदयात्रा के दौरान पुलिस द्वारा कई किसानों को हिरासत में भी लिया गया है।

मंत्री का बयान, यह सिर्फ एक अस्थायी समाधान है
बुधवार रात को जिला प्रभारी मंत्री और खुद चीनी मिल मालिक सतीश जारकीहोली ने स्पष्ट किया कि 3,600 रुपये प्रति टन का यह दाम केवल बेलगावी जिले की चीनी मिलों पर लागू होगा। मंत्री के अनुसार, अगर केंद्र सरकार भविष्य में चीनी या गन्ने की कीमतों में कोई बढ़ोतरी करती है, तो मिलें भी किसानों को ज्यादा कीमत देने के लिए राजी हैं।

मंत्री जारकीहोली ने बताया कि बारिश के पानी पर निर्भर रहने वाले और सिंचाई से खेती करने वाले किसानों की आर्थिक स्थितियां और चुनौतियां अलग-अलग होती हैं। हालांकि, दोनों ही तरह के किसानों के प्रतिनिधियों ने हालिया बैठक में हिस्सा लिया, जिससे दोनों पक्षों के बीच एक आम सहमति बन सकी। उन्होंने इस मौजूदा समझौते को केवल एक 'अस्थायी समाधान' बताया है क्योंकि किसानों ने कई अन्य मांगें भी रखी हैं।

केंद्र और राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र का मामला
किसानों की दूसरी मांगों पर बात करते हुए मंत्री सतीश जारकीहोली के मुताबिक, चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) और गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) तय करना सीधे तौर पर केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। वहीं, उन्होंने कहा कि राज्य सरकार एक साल के बाद गन्ने के राज्य परामर्श मूल्य की समीक्षा करने पर विचार कर सकती है।

सरकार के अनुसार, किसानों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि प्राइवेट, सरकारी और सहकारी (कोऑपरेटिव) चीनी मिलें अलग-अलग आर्थिक स्थितियों में काम करती हैं। इसलिए मिलों को गन्ना देते समय किसानों को मिलों की इस अलग-अलग वित्तीय स्थिति को भी समझना चाहिए।


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