कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को अलग-अलग पत्र लिखकर आपातकालीन वित्तीय सहायता की मांग की है। उपमुख्यमंत्री ने किसानों और ग्रामीण आजीविका पर पड़े सूखे के गहरे असर की जानकारी देते हुए कहा कि संकट में फंसे किसानों तक समय पर और पर्याप्त राहत पहुंचाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय होना आवश्यक है।
177 तहसीलों में 46 हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान, 220 के पार जा सकता है आंकड़ा
कर्नाटक सरकार ने शुरुआत में 101 सूखा प्रभावित तहसीलों की जानकारी केंद्र को दी थी, जिसके तहत 3,705.30 करोड़ रुपये की सहायता मांगी गई थी। इसके बाद वैज्ञानिक आकलन के आधार पर दूसरे चरण में 76 और तहसीलों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया, जिससे कुल प्रभावित तहसीलों की संख्या बढ़कर 177 हो गई है। वर्तमान में 40 दूसरी तहसीलों में भी जमीनी सत्यापन चल रहा है और संभाावना है कि मानसून सीजन के आखिर तक राज्य में सूखा प्रभावित तहसीलों की संख्या 220 के पार पहुंच जाएगी।
प्रदेश की सभी 177 सूखा प्रभावित तहसीलों में अब तक लगभग 47.09 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसलें को नुकसान हुआ है, जिससे खेती की लागत के आधार पर करीब 46,324.5 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है। प्रदेश सरकार का अनुमान है कि खरीफ 2026 के दौरान कुल फसल नुकसान 55 लाख हेक्टेयर को पार कर जाएगा। दोनों चरणों के तहत कर्नाटक ने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष के प्रावधानों के तहत कुल 7,142.64 करोड़ रुपये की मांग की है। इसमें से 4,998.60 करोड़ रुपये किसानों की इनपुट सब्सिडी के लिए और 2,144.04 करोड़ रुपये पशु चारे समेत पेयजल आपूर्ति जैसे आवश्यक प्रबंधों के लिए मांगे गए हैं।
अरहर, मक्का और कपास समेत बागवानी फसलों पर भारी असर
दूसरे चरण में शामिल किए गए 76 नए सूखा प्रभावित तहसीलों में नुकसान के आकलन से पता चला है कि वहां 26.08 लाख हेक्टेयर कृषि फसलों और 1.49 लाख हेक्टेयर बागवानी फसलों को नुकसान हुआ है। इन क्षेत्रों में नुकसान का दायरा 33 से 100 प्रतिशत के बीच रहा है, जबकि अधिकांश हिस्सों में 50 प्रतिशत से अधिक फसलें बर्बाद हो चुकी हैं।
प्रभावित होने वाली प्रमुख कृषि फसलों में अरहर (तुअर), मक्का, कपास, गन्ना, सोयाबीन और मूंग शामिल हैं, जबकि बागवानी फसलों में प्याज, सुपारी और लाल मिर्च को भारी नुकसान पहुंचा है। इन 76 तहसीलों में 27.57 लाख हेक्टेयर रकबे में हुए नुकसान की आर्थिक लागत 27,576.2 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसके लिए मौजूदा राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष नियमों के तहत 2,981.34 करोड़ रुपये की इनपुट सब्सिडी की जरूरत है।
मौजूदा नियम खेती की असल लागत को पूरा नहीं करते
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखे पत्र में जी. परमेश्वर ने एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के राहत नियमों, खासतौर से इनपुट सब्सिडी की दरों में जल्द से जल्द बदलाव करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा इनपुट सब्सिडी खेती की असल लागत की तुलना में बेहद अपर्याप्त है और यह किसानों के कुल नुकसान का केवल एक छोटा हिस्सा ही पूरा कर पाती है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि 16वें वित्त आयोग की अवधि के दौरान इन मानकों में बदलाव को प्राथमिकता दी जाए, ताकि किसानों को उनके वास्तविक नुकसान के हिसाब से भरपाई मिल सके। कर्नाटक सरकार इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव केंद्रीय गृह मंत्रालय को पहले ही भेज चुकी है।
केंद्रीय टीम का स्वागत, जल्द जांच पूरा करने का अनुरोध
वहीं, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को लिखे पत्र में उन्होंने राज्य में केंद्रीय मूल्यांकन टीम के दौरे का स्वागत किया और सूखे की गंभीरता को देखते हुए जांच प्रक्रिया को जल्द पूरा करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि फसल बर्बादी के इस दौर में किसानों को तत्काल राहत पहुंचाना बेहद जरूरी है। उपमुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार कर्नाटक की मांगों पर सकारात्मक कदम उठाते हुए राहत नियमों को दुरुस्त करेगी और सहायता राशि जल्द जारी करेगी।