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कोसी क्षेत्र में खुलेगी खुशहाली की राह: सरसों की उन्नत खेती के साथ होगा औषधीय 'सफेद शहद' का बंपर उत्पादन

गांव जंक्शन डेस्क, सहरसा Published by: Umashankar Mishra Updated Tue, 27 Oct 2026 08:50 PM IST
सार

बिहार के कोसी क्षेत्र (सहरसा) की बलुई-दोमट मिट्टी और जलवायु को अनुकूल पाते हुए उद्यान विभाग ने सरसों की बड़े पैमाने पर उन्नत खेती और सफेद मस्टर्ड शहद के सह-उत्पादन की बड़ी योजना बनाई है। औषधीय गुणों से भरपूर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मांग वाले सफेद शहद के उत्पादन से जहाँ एक ओर सरसों की पैदावार बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर मधुमक्खी पालन से किसानों को अतिरिक्त आय और कृषि विविधीकरण का एक नया जरिया मिलेगा।

सरसों संग मधुमक्खी बढ़ाएगी किसानों की कमाई
सरसों संग मधुमक्खी बढ़ाएगी किसानों की कमाई - फोटो : AI
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विस्तार
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बिहार के कोसी क्षेत्र की बलुई-दोमट मिट्टी और विशिष्ट जलवायु को ध्यान में रखते हुए उद्यान विभाग ने कृषि विविधीकरण की दिशा में एक बड़ी पहल शुरू की है। विभाग ने इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सरसों की उन्नत खेती कराने के साथ-साथ फसल के परागण (Pollination) के समय उच्च गुणवत्ता वाले विशिष्ट 'सफेद शहद' (मस्टर्ड मधु) के उत्पादन की व्यापक रूपरेखा तैयार की है। इस अनूठे शहद की घरेलू और वैश्विक बाजारों में भारी मांग है, जिससे स्थानीय किसानों को फसल के साथ-साथ अतिरिक्त आमदनी का एक बेहतरीन जरिया मिलेगा।

उन्नत किस्मों के चयन से बढ़ेगी पैदावार
कोसी के वातावरण को ध्यान में रखकर उद्यान विभाग ने सरसों की कई रोग-प्रतिरोधी और अधिक उपज देने वाली विशेष प्रजातियों का चयन किया है:
  • राजेंद्र सुफलाम: यह किस्म विभिन्न पादप रोगों से मुकाबला करने में सक्षम है और लंबे समय तक टिकाऊ पैदावार देने के लिए जानी जाती है।
  • पूसा सरसों 25: सिंचित क्षेत्रों के लिए यह सर्वोत्तम किस्म है, क्योंकि यह बेहद कम समय में पककर तैयार हो जाती है और भरपूर उपज देती है।
  • पूसा बोल्ड: इस किस्म की बुवाई पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसका दाना सामान्य से काफी मोटा होता है और इसमें तेल की मात्रा अधिक होती है, जिससे किसानों को बाजार में इसकी बेहतर कीमत मिलती है।
औषधीय गुणों से भरपूर सफेद शहद की मांग
सरसों के फूलों से तैयार होने वाला यह मधु अपने प्राकृतिक सफेद रंग और बेजोड़ स्वास्थ्यवर्धक गुणों के कारण सामान्य शहद से काफी अलग है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, इस सफेद शहद में एंजाइम, एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-बैक्टीरियल तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को बढ़ाते हैं। इसमें मौजूद प्राकृतिक ग्लूकोज और फ्रुक्टोज शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करते हैं। रिफाइंड चीनी के एक सुरक्षित और स्वस्थ विकल्प के रूप में उभरने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी मांग तेजी से ग्राफ छू रही है।

कृषि विविधीकरण से किसानों की बढ़ेगी खुशहाली
सरसों की खेती के साथ मधुमक्खी पालन को जोड़ने से न केवल शहद का उत्पादन होगा, बल्कि मधुमक्खियों के कारण फसलों में परागण बेहतर होगा जिससे सरसों की कुल पैदावार में भी 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि होगी। सहरसा के जिला कृषि अधिकारी संजय कुमार ने बताया कि कोसी की मिट्टी सरसों के लिए एक वरदान है। उद्यान विभाग का मुख्य ध्येय किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज और मधुमक्खी पालन की आधुनिक किट व तकनीकी सुविधाएं समय पर मुहैया कराना है ताकि निर्धारित उत्पादन लक्ष्यों को हासिल कर क्षेत्र के अन्नदाताओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जा सके।
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