बिहार का कोसी क्षेत्र इन दिनों दूसरे प्रदेशों के लिए मखाने का एक अहम सप्लायर साबित हो रहा है। यहां का मखाना घरेलू बाजार के अलावा विदेश में भी जगह बना रहा है। मखाने की इस बढ़ती मांग को देखते हुए इलाके के कई लोग मखाना व्यापार में उतर गए हैं। इस समय मखाने का विपणन का सीजन चालू है, जिस वजह से रोजनाना सहरसा रेल मार्ग के माध्यम से भारी मात्रा में मखाना बिहार से बाहर भेजा जा रहा है।
ट्रेनों से जा रहा मखाना, रेलवे को भी फायदा
कोसी से मखाने की सप्लाई में अधिकतर पुरबिया एक्सप्रेस, जनसेवा एक्सप्रेस और वैशाली एक्सप्रेस का उपयोग किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, केवल सहरसा से ही 40 से 50 बोरा मखाना पंजाब के अलग-अलग हिस्सों में भेजा जा रहा है। बता दें कि एक बोरे में आमतौर पर 9 से 10 किलो मखाना पैक किया जाता है। ऐसे में हर महीने करीब 1.5 करोड़ रुपये का मखाना कोसी बाहर सप्लाई कर रहा है। यह रेलवे के राजस्व में बढ़ोतरी का माध्यम भी बन रहा है।
बंपर उत्पादन से सस्ता हुआ मखाना
हाल ही में मखाने की मांग तेजी से बढ़ी है, जिसे पूरा करने के लिए उत्पादन में भी उछाल आया है। इस समय मखाने की कीमत 600 से 1500 रुपये प्रति किलो के बीच है। व्यापारियों का कहना है कि बीते साल मखाने की कीमत 2200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी। लेकिन, इस बार अच्छे उत्पादन ने कीमतों को गिराया है।
सबसे अच्छी क्वालिटी की बाहर है भारी मांग
बाजार में औसतन तीन साइज- छोटा, मध्यम और बड़ा मखाना ज्यादा बिकता है। इन तीनों साइज की कीमतें अलग-अलग होती हैं। इनमें सबसे महंगा बड़े साइज का मखाना होता है। बिहार के बाहर अन्य प्रदेशों में इसी बड़े साइज वाले प्रीमियम मखाने की डिमांड सबसे ज्यादा है। इसी मांग को पूरा करने के लिए व्यापारियों द्वारा सबसे अच्छी क्वालिटी का मखाना बाहर के प्रदेशों में भेज दिया जाता है।