गुजरात में इस साल खरीफ मूंगफली के उत्पादन में भारी कमी देखने को मिल सकती है। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सर्वे का कहना है कि प्रदेश में मूंगफली की उपज में 20.5 प्रतिशत की गिरावट आने की संभावना है। एसोसिएशन के अनुसार, सौराष्ट्र के कुछ जिलों में कम बारिश होने की वजह से मूंगफली की फसल पर बुरा असर पड़ा है।
बीते साल से उपज और रकबे में कमी के आसार
सर्वे का कहना है कि बीते खरीफ सीजन में गुजरात के 20.71 लाख हेक्टेयर रकबे में 33.30 लाख टन मूंगफली उत्पादन का अनुमान है। प्रति हेक्टेयर उपज करीब 1608 किलो रहने के संभावना है। बीते साल पर नजर डालें, तो साल 2025-26 में गुजरात ने 22.02 लाख हेक्टेयर रकबे से 41.88 लाख टन मूंगफली का उत्पादन किया था। इस दौरान उपज 1,902 किलो थी।
सौराष्ट्र पर अल नीनो का सबसे ज्यादा असर, उपज में 19.8% तक की गिरावट का अनुमान
सर्वे का कहना है कि कम बारिश का सबसे ज्यादा असर प्रदेश के सौराष्ट्र इलाके पर पड़ा है, जिस वजह से यहां मूंगफली उत्पादन में 19.8 प्रतिशत की कमी का अनुमान लगाया गया है। इस साल सौराष्ट्र में मूंगफली का रकबा 15.78 लाख हेक्टेयर है, जिससे 25.53 लाख टन मूंगफली उगने (प्रति हेक्टेयर 1618 किलो) की उम्मीद है। बीते साल इस इलाके ने 16.53 लाख हेक्टेयर से 31.82 लाख टन मूंगफली का उत्पादन किया था, जिसमें उपज 1925 किलो प्रति हेक्टेयर थी।
राजकोट और जामनगर में नुकसान, जूनागढ़ में बढ़त
पिछले साल मूंगफली के मुख्य उत्पादक रहे सौराष्ट्र के राजकोट और जामनगर जिलों में इस बार भारी गिरावट का अनुमान है। राजकोट में इस साल उत्पादन 5.90 लाख टन रहने का अनुमान है (पिछले साल यह 6.60 लाख टन था)। जामनगर में यह उत्पादन 3.26 लाख टन रहने का अनुमान है (पिछले साल यह 5.63 लाख टन था)।
हालांकि, कुछ जिलों में पैदावार बढ़ने की भी उम्मीद है। जूनागढ़ में उत्पादन बढ़कर 5.32 लाख टन होने का अनुमान है (पिछले साल यह 4.44 लाख टन था)। इसी तरह अमरेली में पैदावार 3.38 लाख टन तक जा सकती है (पिछले साल 2.81 लाख टन)।
20 सदस्यों की टीम ने किया जमीनी सर्वे
यह जमीनी सर्वे 23 से 25 अक्तूबर के बीच किया गया। इस टीम में एसके इंडस्ट्री के विनोद पटेल, जीजीएन रिसर्च के राजेश पटेल और एसईए के कार्यकारी निदेशक बी.वी. मेहता सहित 20 से अधिक सदस्य शामिल थे। टीम ने सीधे खेतों में जाकर किसानों, मिल मालिकों, व्यापारियों और दलालों से बात करके फसल के आकार, गुणवत्ता और बीजों की किस्मों का आकलन किया। एसईए के अनुसार, इस सर्वे के नतीजे किसानों, प्रोसेसर और खाद्य तेल उद्योग से जुड़े सभी लोगों के लिए गुजरात की मूंगफली की जमीनी हकीकत समझने में बहुत मददगार साबित होंगे।